नई दिल्ली। 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसके दौरान चांद लालिमा लिए दिखाई देगा। इसी वजह से इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है।

भारत में कब लगेगा चंद्र ग्रहण?
भारतीय समय (IST) के अनुसार अनुमानित समय इस प्रकार है:
- 🌒 आंशिक ग्रहण शुरू: देर रात लगभग 3:20 बजे
- 🔴 पूर्ण ग्रहण (Blood Moon) शुरू: सुबह करीब 4:30 बजे
- 🌕 पूर्ण ग्रहण समाप्त: लगभग 5:40 बजे
- 🌑 ग्रहण समाप्त: सुबह लगभग 6:50 बजे
(सटीक समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।)
कितनी देर दिखेगा ‘ब्लड मून’?
पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवस्था लगभग 1 घंटा 10 मिनट तक रहने की संभावना है। इस दौरान चंद्रमा गहरे लाल या तांबे रंग का दिखाई देगा।
हालांकि भारत के कई हिस्सों में सूर्योदय के कारण पूरा चरण स्पष्ट रूप से देखने में कठिनाई हो सकती है। पश्चिमी और मध्य भारत में दृश्यता अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है।
क्यों लाल दिखता है चांद?
जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं। वायुमंडल नीली रोशनी को अधिक बिखेर देता है और लाल रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी कारण चांद लालिमा लिए दिखाई देता है।

क्या रखें सावधानी?
- चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित होता है।
- दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर दृश्य और भी आकर्षक दिखता है।
- किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती (यह सूर्य ग्रहण से अलग है)।
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं
भारत में चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। कई लोग ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करते और मंत्र जाप या पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है।
3 मार्च 2026 की यह खगोलीय घटना आसमान में दुर्लभ नजारा पेश करेगी। मौसम साफ रहा तो देशभर में लाखों लोग ‘ब्लड मून’ का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे।

