Category: Maharashtra

  • Toxic Yash Movie: यश की एक्शन थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी, कियारा आडवाणी संग दिखेगी धमाकेदार जोड़ी

    Toxic Yash Movie: यश की एक्शन थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी, कियारा आडवाणी संग दिखेगी धमाकेदार जोड़ी

    साउथ सुपरस्टार यश एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाका करने के लिए तैयार हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज़ डेट की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। फिल्म 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी — यानी गुड़ीपड़वा और ईद के मौके पर दर्शकों को एक साथ डबल सेलिब्रेशन मिलेगा।

    फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर गीतू मोहनदास ने किया है, जो अपनी दमदार विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के लिए जानी जाती हैं। इस फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी, जबकि नयनतारा, हुमा कुरैशी और अक्षय ओबेरॉय भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं।

    पहले जारी किए गए पोस्टर में यश का इंटेंस और रहस्यमयी लुक देखकर फैंस में जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिली थी।

    बीते दिनों फिल्म की रिलीज़ डेट आगे बढ़ने की अफवाहें तेज थीं, लेकिन फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि “टॉक्सिक” तय समय पर ही रिलीज़ होगी, इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है।

    फिल्म की शूटिंग का अंतिम चरण पूरा हो चुका है और जनवरी 2026 से इसका भव्य प्रमोशन अभियान शुरू किया जाएगा। खास बात यह है कि ‘टॉक्सिक’ को भारतीय भाषाओं के अलावा अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में भी डब किया जा रहा है, जिससे इसे एक वैश्विक रिलीज़ का दर्जा मिलेगा।

    ‘केजीएफ’ के बाद ‘टॉक्सिक’ यश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म मानी जा रही है, जो भारतीय सिनेमा के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है।

  • क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ जल्द कहेगा अलविदा? फैंस में बढ़ी बेचैनी, हितेन तेजवानी ने दी सफाई

    क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ जल्द कहेगा अलविदा? फैंस में बढ़ी बेचैनी, हितेन तेजवानी ने दी सफाई

    टीवी जगत में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है — क्या एकता कपूर का सुपरहिट शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ अब ऑफ-एयर होने वाला है? टीआरपी चार्ट्स में ‘अनुपमा’ के बाद दूसरा स्थान हासिल करने वाला यह शो दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। लेकिन ताजा खबरों के अनुसार, यह बहुचर्चित सीक्वल अपने तय समय से पहले ही अचानक बंद किया जा सकता है।

    25 साल बाद स्मृति ईरानी की वापसी
    29 जुलाई 2025 को स्टार प्लस पर लॉन्च हुए इस शो ने नॉस्टैल्जिया और नए ड्रामे का बेहतरीन संगम पेश किया। 25 साल बाद स्मृति ईरानी की छोटे पर्दे पर वापसी ने दर्शकों को फिर से तुलसी-मिहिर के दौर में लौटा दिया। शो की कहानी, संवाद और पारिवारिक ट्विस्ट ने पुराने और नए दोनों दर्शकों को जोड़ रखा है।

    हितेन तेजवानी बोले — ‘कोई आधिकारिक जानकारी नहीं’
    शो में करण वीरानी का किरदार निभा रहे अभिनेता हितेन तेजवानी ने इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

    “मुझे इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि शो बंद हो रहा है या नहीं, क्योंकि मैं नियमित रूप से शूटिंग नहीं कर रहा हूं। यह शो पहले से ही लिमिटेड सीरीज़ के तौर पर प्लान किया गया था। अब आगे क्या फैसला होगा, यह चैनल और प्रोडक्शन टीम पर निर्भर करता है।”

    एकता कपूर क्या करेंगी कोई नई घोषणा?
    मनोरंजन जगत में चर्चाएं हैं कि शो का अंत अचानक किया जा सकता है, लेकिन फैंस को उम्मीद है कि एकता कपूर शायद कोई नया ट्विस्ट या स्पिन-ऑफ लेकर आएंगी। तुलसी और मिहिर की जोड़ी को फिर से स्क्रीन पर देखना दर्शकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं रहा, इसलिए यह खबर उनके लिए निराशाजनक हो सकती है।

    अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ वाकई जल्द अलविदा कह देगा या फिर एकता कपूर इसे किसी भावनात्मक क्लाइमेक्स या बड़े सरप्राइज के साथ आगे बढ़ाएंगी।

  • Bombay High Court बड़ा फैसला: नाती-नातिन को नाना की संपत्ति में नहीं है जन्मसिद्ध अधिकार

    Bombay High Court बड़ा फैसला: नाती-नातिन को नाना की संपत्ति में नहीं है जन्मसिद्ध अधिकार

    मुंबई।
    पारिवारिक संपत्ति को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हिंदू परिवार में नाती या नातिन को अपने नाना की पैतृक संपत्ति पर कोई जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त नहीं होता। इस निर्णय ने हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 की सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया है।
    इस अधिनियम के अनुसार संयुक्त परिवार की संपत्ति में बेटियों को भी बेटों के समान सह-हिस्सेदार (coparcener) का दर्जा दिया गया है, किंतु यह अधिकार केवल पुत्र-पुत्री तक सीमित है, उनके बच्चों तक नहीं बढ़ाया गया है।

    मामला क्या था

    यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘विश्वंभर बनाम सॉ. सुनंदा’ मामले में सुनाया। इस मामले में एक नातिन (वादी) ने अपने नाना की पैतृक संपत्ति के बंटवारे और उसमें हिस्सेदारी का दावा किया था।
    वादी के नाना का निधन हो चुका था, और उनके पीछे चार पुत्र और चार पुत्रियां थीं, जिनमें से वादी की माता (नाना की बेटी) जीवित थीं। सुनवाई के दौरान यह प्रश्न उठा कि क्या बेटी की बेटी (नातिन) को अपने नाना की संयुक्त पारिवारिक संपत्ति के विभाजन की मांग करने का अधिकार है।

    अदालत का निर्णय

    हाई कोर्ट ने नातिन के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि नातिन को अपने नाना की संपत्ति के बंटवारे में कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2005 के अधिनियम ने भले ही बेटों और बेटियों को समान दर्जा दिया हो, लेकिन बेटी के बच्चों को उस दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
    चूंकि नातिन अपने नाना की पुरुष वंश परंपरा की रेखीय उत्तराधिकारी नहीं है, इसलिए उसे संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में कोई जन्मसिद्ध हिस्सा नहीं मिल सकता।

    मिताक्षरा कानून की पृष्ठभूमि

    हिंदू मिताक्षरा कानून के अनुसार, पैतृक संपत्ति में अधिकार जन्म से प्राप्त होता है। ऐतिहासिक रूप से यह अधिकार केवल पिता और उसके पुरुष वंशजों तक सीमित था।
    2005 के संशोधन अधिनियम के बाद बेटियों को भी यह समान अधिकार मिला, जिससे वे अपने पिता की संयुक्त संपत्ति में हिस्सा मांग सकती हैं।
    हालांकि यह अधिकार केवल बेटी तक सीमित है, उसके बच्चों तक नहीं बढ़ता। इसलिए नाती या नातिन को नाना की संपत्ति में कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं कहा जा सकता।

    कानून की स्पष्टता और सीमाएँ

    2005 के अधिनियम के बाद उत्तराधिकार संबंधी कई जटिल प्रश्न उभरे हैं, जिनमें यह मुद्दा भी प्रमुख है कि बेटी के बच्चों का उनके नाना की संपत्ति पर क्या अधिकार है।
    परंपरागत मिताक्षरा सिद्धांतों के अनुसार, बेटी के बच्चे नाना की संपत्ति में सह-वारिस नहीं माने जाते।
    हालांकि दुर्लभ परिस्थितियों में, यदि नाना की कोई पुरुष संतान नहीं है और उन्होंने वसीयत द्वारा संपत्ति बेटी के बच्चों को दी है, तो वे ‘सहायकों से प्राप्त विरासत’ (succession through will) के अंतर्गत संपत्ति पा सकते हैं।

    फैसला क्यों महत्वपूर्ण है

    बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर (legal precedent) बनेगा।
    यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि उत्तराधिकार के अधिकार सीमित और परिभाषित होते हैं, और कानून में समानता का अर्थ यह नहीं कि वह अगली पीढ़ियों तक स्वतः विस्तारित हो।

    यह फैसला न केवल पारिवारिक संपत्ति विवादों में दिशा-निर्देश प्रदान करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि हिंदू उत्तराधिकार कानून की व्याख्या में पारिवारिक वंश परंपरा की रेखा एक निर्णायक तत्व है।

  • सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता कैसे जुड़े? – सचिन सावंत ने उठाए गंभीर सवाल-कहा चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से मतदाता सूची में हुआ बड़ा घोटाला

    सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता कैसे जुड़े? – सचिन सावंत ने उठाए गंभीर सवाल-कहा चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से मतदाता सूची में हुआ बड़ा घोटाला

    मुंबई: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश के सामने उजागर किए गए भाजपा और चुनाव आयोग के कथित “वोट चोरी गठजोड़” के बाद महाराष्ट्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं का नया खुलासा हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 नए मतदाता कैसे जोड़े गए? उन्होंने यह आंकड़ा स्वयं चुनाव आयोग के डेटा के हवाले से पेश किया है।

    सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग के अनुसार लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में 9,29,43,890 पंजीकृत मतदाता थे। इसके बाद केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा 30 अगस्त 2024 तक की गई जांच में यह संख्या बढ़कर 9,53,74,302 हो गई — यानी चार महीनों में 24 लाख मतदाता बढ़े। फिर 15 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव की घोषणा के समय मतदाताओं की संख्या 9,63,69,410 बताई गई।

    चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार नामांकन की पहली तारीख से दस दिन पहले तक मतदाता पंजीकरण खुला रहता है। इसके बाद आठ दिनों तक जांच की जाती है और नामांकन के पहले दिन अंतिम पूरक सूची जारी की जाती है। चूँकि 29 अक्टूबर नामांकन का पहला दिन था, इसलिए पंजीकरण 19 अक्टूबर तक खुला रहा।
    इस अवधि में — 16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर के बीच — पंजीकरण सक्रिय रहा और जब 30 अक्टूबर को अंतिम पूरक सूची प्रकाशित की गई, तब मतदाताओं की संख्या 9,70,25,119 पहुँच गई।

    इसका अर्थ है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता जोड़े गए, जो बेहद असामान्य और संदेहास्पद है। सावंत ने कहा कि मतदाता पंजीकरण पूरे वर्ष नियमित रूप से जारी था, ऐसे में चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद इतनी बड़ी संख्या में पंजीकरण होना “अभूतपूर्व और संदिग्ध” है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    सावंत ने आगे कहा कि यही त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची अब 1 जुलाई 2025 तक बढ़ाई गई है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को मतदाता सूची तक पहुँच नहीं दी जा रही है और उन्हें इस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी नहीं दिया जा रहा।

    उन्होंने कहा, “राज्य चुनाव आयोग का यह रवैया पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से तैयार की गई इस मतदाता सूची के आधार पर स्थानीय निकाय चुनाव कराना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ होगा। विपक्षी दलों की इस विषय पर उठाई गई आपत्ति पूरी तरह न्यायसंगत है।”

  • भाजपा महायुति सरकार के खिलाफ कांग्रेस का 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’

    भाजपा महायुति सरकार के खिलाफ कांग्रेस का 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’

    मुंबई। महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा और सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’ करने की घोषणा की है। इस दिन कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों के साथ बैठकर पिठला-भाखर और ठेचा खाएंगे और भाजपा महायुति सरकार की किसान-विरोधी नीतियों का विरोध दर्ज कराएंगे।

    कांग्रेस ने कहा है कि अतिवृष्टि के कारण राज्य के 30 जिलों के 350 तालुकों में लाखों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन सरकार ने जो राहत पैकेज घोषित किया है, वह बेहद कमज़ोर और भ्रामक है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने केवल पुरानी योजनाओं को जोड़कर 32,000 करोड़ रुपये का “फसवा पैकेज” घोषित किया है, जिससे किसानों को कोई वास्तविक सहायता नहीं मिली है।

    कांग्रेस ने मांग की थी कि किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये, जबकि पूरी तरह बह गई जमीन के लिए प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये की सहायता और साथ ही पूर्ण कर्जमाफी दी जाए। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नज़रअंदाज़ कर दिया है।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “देश का अन्नदाता इस दिवाली पर काली दिवाली मना रहा है और इसके लिए पूरी तरह भाजपा महायुति सरकार ज़िम्मेदार है।” पार्टी ने घोषणा की कि यह आंदोलन राज्य के हर ज़िले, हर तालुके और हर गांव में एक साथ आयोजित किया जाएगा ताकि किसानों की आवाज़ सरकार तक पहुंचाई जा सके।

  • Navi Mumbai Medicover Hospital: मेडिकवर हॉस्पिटल ने नवी मुंबई में शुरू किया अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर , सड़क दुर्घटनाओं व आपात स्थितियों में अब मिलेगी त्वरित जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा

    Navi Mumbai Medicover Hospital: मेडिकवर हॉस्पिटल ने नवी मुंबई में शुरू किया अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर , सड़क दुर्घटनाओं व आपात स्थितियों में अब मिलेगी त्वरित जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा

    नवी मुंबई: आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में एक नई दिशा देते हुए मेडिकवर हॉस्पिटल ने नवी मुंबई में क्षेत्र का पहला एडवांस्ड ट्रॉमा सेंटर शुरू किया है। यह अत्याधुनिक केंद्र सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों और आपात स्थितियों में मरीजों को त्वरित और समग्र चिकित्सा सहायता प्रदान करेगा।

    इस केंद्र में प्री-हॉस्पिटल केयर, इन-हाउस मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम और पोस्ट-हॉस्पिटल रिहैबिलिटेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उद्घाटन समारोह में मरीज, एंबुलेंस चालक, सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक और आरटीओ अधिकारी उपस्थित थे।

    मेडिकवर हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा एवं पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स सर्जन डॉ. नितीश अरोड़ा ने बताया कि ट्रॉमा मामलों में “गोल्डन ऑवर” यानी दुर्घटना के पहले 60 मिनट बेहद अहम होते हैं। इस समय के भीतर उपचार मिलने पर जीवन बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि नया ट्रॉमा सेंटर ऑन-साइट रिस्पॉन्स से लेकर सर्जरी और रिहैबिलिटेशन तक हर स्तर पर विशेषज्ञ देखभाल सुनिश्चित करेगा।

    डॉ. अरोड़ा ने बताया कि अस्पताल ने विशेष आपातकालीन नंबर 8655845861 जारी किया है, जिस पर संपर्क करने पर प्रशिक्षित टीम तुरंत एंबुलेंस भेजकर मरीज को स्थिर स्थिति में अस्पताल पहुंचाती है। केंद्र में ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोसर्जरी, जनरल सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थेसियोलॉजी, आईसीयू केयर और फिजियोथैरेपी विशेषज्ञों की 24×7 टीम कार्यरत है।

    मेडिकवर हॉस्पिटल्स के रीजनल डायरेक्टर (महाराष्ट्र व कर्नाटक) नीरज लाल ने कहा कि यह नया केंद्र नवी मुंबई के लिए “जीवनरक्षक पहल” साबित होगा। प्रशिक्षित इमरजेंसी टीम और अत्याधुनिक तकनीक से युक्त यह केंद्र हर सेकंड को बचाने की दिशा में काम करेगा।

    दुर्घटना पीड़ित विकास गुप्ता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ट्रॉमा सेंटर की तत्परता और विशेषज्ञ टीम की वजह से उनकी जान बच पाई। उन्होंने कहा, “हर सेकंड जब मायने रखता था, तब मेडिकवर हॉस्पिटल ने मुझे नई जिंदगी दी।”

    मेडिकवर हॉस्पिटल का यह ट्रॉमा सेंटर न केवल नवी मुंबई बल्कि पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

  • BJP Corporate Hindutva: भाजपा देश के हवाई अड्डे, बंदरगाह और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ पहले ही बेच चुकी है, अब देवी-देवताओं और महापुरुषों को भी नहीं बख्शा : कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत

    BJP Corporate Hindutva: भाजपा देश के हवाई अड्डे, बंदरगाह और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ पहले ही बेच चुकी है, अब देवी-देवताओं और महापुरुषों को भी नहीं बख्शा : कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत

    भाजपा का ‘कॉरपोरेट हिंदुत्व’: सचिन सावंत का आरोप, कहा अस्मिता और आस्था का हो रहा सौदा

    मुंबई: कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ने सत्ता के लिए धर्म, अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव का व्यापार शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का तथाकथित हिंदुत्व अब “कार्पोरेट हिंदुत्व” बन चुका है, जहां देव-दैवत और महापुरुषों तक को प्रायोजक कंपनियों के हवाले किया जा रहा है।

    गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावंत ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का नाम अब कोटक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस कर दिया गया है। सिद्धिविनायक मेट्रो स्टेशन को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, महालक्ष्मी स्टेशन को एचडीएफसी लाइफ और आचार्य अत्रे स्टेशन को निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड के नाम से जोड़ा गया है। यह महाराष्ट्र की अस्मिता और श्रद्धा का घोर अपमान है।”

    उन्होंने मांग की कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार इस नामकरण पर जनता के सामने स्पष्टीकरण दें। सावंत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और स्वाभिमानी जनता यह अपमान किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी।

    सावंत ने आगे कहा कि जब देश में किसान, मजदूर, बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे असली मुद्दे हैं, तब भाजपा नामकरण की राजनीति कर जनता का ध्यान भटका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इलाहाबाद का प्रयागराज, फैजाबाद का अयोध्या, दिल्ली के राजपथ का कर्तव्यपथ और रेसकोर्स रोड का लोक कल्याण मार्ग कर दिया, लेकिन नेहरू और गांधी के नामों को हटाने में उसे परेशानी नहीं होती।

    उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा ने देश की संपत्तियाँ — हवाई अड्डे, बंदरगाह, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ — पहले ही कार्पोरेट्स को सौंप दी हैं, अब देवताओं और महापुरुषों की अस्मिता भी बेचने निकल पड़ी है। जो पार्टी धर्म और संस्कारों की बात करती है, वही अब देवालयों और आस्थाओं के नाम पर सौदेबाज़ी कर रही है — यही भाजपा का असली, दोगला हिंदुत्व है।”

  • Election: भिवंडी में जिला परिषद चुनाव के लिए शिवसेना का सम्मेलन संपन्न

    Election: भिवंडी में जिला परिषद चुनाव के लिए शिवसेना का सम्मेलन संपन्न

    भिवंडी। आगामी पंचायत समिति और ठाणे जिला परिषद चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं। इसी कड़ी में शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लिए सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नाशिक रोड स्थित शांग्रीला होटल में आयोजित किया गया।

    सम्मेलन का आयोजन शिवसेना पक्ष प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आदेशानुसार और सांसद श्रीकांत शिंदे के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर शिवसेना नेता प्रकाश पाटील, ठाणे ग्रामीण जिलाध्यक्ष देवानंद थले, विधायक शांताराम मोरे, पूर्व विधायक रूपेश म्हात्रे, लोकसभा संपर्क प्रमुख मदनबुवा नाईक, उपनेता अरुण पाटील, मोनिकाताई पालवे सहित युवा सेना और महिला आघाडी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

    सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावों में महायुति के माध्यम से जीत हासिल करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया। कार्यकर्ताओं से अपने-अपने गुटों के युवा और महिला मतदाताओं के साथ संवाद स्थापित कर सक्रियता से काम करने का आह्वान किया गया।

    इस अवसर पर विधायक शांताराम मोरे, मदन नाईक सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी मार्गदर्शन दिया। सम्मेलन में कोनगांव, पडघा, कशेली, अंबाडी, राहनाल, अंजूर, पिंपलास, काल्हेर, अनगांव जैसे विभिन्न गांवों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। पार्टी के नेताओं ने कार्यकर्ताओं से ठाणे जिला परिषद में महायुति का झंडा फहराने के लिए पूरी तैयारी रखने का संदेश दिया।

  • His personality is very attractive: “शख्सियत”

    His personality is very attractive: “शख्सियत”

    धर्म, समाज और कर्म का संगम ही जीवन का सच्चा अर्थ है: सौरभ सिंह

    राष्ट्रीय स्वाभिमान। प्रेम चौबे

    जब संस्कारों की जड़ें गहरी हों और कर्मभूमि पर सेवा का बीज बोया जाए, तब जीवन केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाता है।
    ऐसे ही एक प्रेरक युवा हैं सौरभ सिंह, जिनकी सोच में आध्यात्मिकता की गहराई और कर्म में समाजसेवा की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

    प्रश्न 1: सौरभ जी, अपने परिवार और प्रारंभिक जीवन के बारे में कुछ बताइए।

    उत्तर:
    मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मड़ियाहूं क्षेत्र के कोरा बीर गांव में वर्ष 1997 में हुआ। मेरे पिता श्री प्रभात सिंह ‘बबलू’ और माता श्रीमती पुष्पा सिंह ने बचपन से ही हमें सेवा, धर्म और संस्कार का मूल्य सिखाया।
    प्रारंभिक शिक्षा जौनपुर में प्राप्त करने के बाद मैंने ग्रेजुएशन और फार्मेसी की पढ़ाई अपनी कर्मभूमि वसई-विरार (महाराष्ट्र) में पूरी की।
    मेरे पिता स्वयं एक समाजसेवी हैं — उन्होंने मानिकपुर क्षेत्र में समाजसेवा की जो परंपरा शुरू की, वही आज मेरी प्रेरणा है।

    प्रश्न 2: आपके जीवन में आध्यात्मिकता की भूमिका क्या है?

    उत्तर:
    हमारा परिवार वसई तालुका की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित कांवड़ यात्रा का आयोजन करता है। यह यात्रा केवल भक्ति का नहीं, बल्कि सेवा और अनुशासन का प्रतीक है।
    मुझे लगता है कि समाजसेवा तभी सार्थक होती है जब उसमें ईश्वर के प्रति आस्था और मानवता के प्रति करुणा जुड़ी हो।
    भक्ति और सेवा — यही मेरे जीवन के दो आधार हैं।

    प्रश्न 3: कोरोना काल में आपके परिवार की भूमिका को समाज ने बहुत सराहा, उस अनुभव को कैसे देखते हैं?

    उत्तर:
    कोविड-19 महामारी के समय स्थिति बहुत कठिन थी। लोग भय और असहायता में थे।
    तब मेरे पिता ने मित्रों के सहयोग से जौनपुर जिले के लोगों की मदद के लिए दो विशेष ट्रेनें रवाना करवाने की पहल की।
    वह पल मेरे जीवन का turning point था, मैंने समझा कि सेवा किसी पद या पहचान से नहीं, बल्कि संवेदना से शुरू होती है।

    प्रश्न 4: आप राजनीति में आने की तैयारी कर रहे हैं। राजनीति को कैसे देखते हैं?

    उत्तर:
    मेरी दृष्टि में राजनीति केवल सत्ता नहीं, बल्कि समाजसेवा का सबसे बड़ा मंच है।
    मेरे राजनीतिक प्रेरणास्रोत महाराष्ट्र के पूर्व गृहराज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह जी हैं। उनसे मैंने सीखा कि राजनीति धर्म और नैतिकता के आधार पर चलनी चाहिए।
    धर्म हमारे खून में है, इसलिए राजनीति को मैं धर्म की तरह ही सेवा का साधन मानता हूँ, न कि व्यक्तिगत लाभ का।

    प्रश्न 5: युवा पीढ़ी के लिए आपका संदेश क्या है?

    उत्तर:
    आज के युवा को यह समझना होगा कि आधुनिकता और संस्कार एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
    अगर हम अपने धर्म, संस्कृति और परिवार से जुड़कर समाज के लिए कार्य करें, तो यही सच्ची देशभक्ति है।
    मैं मानता हूँ कि “धर्म मनुष्य को जोड़ता है, और राजनीति अगर धर्म के साथ चले तो समाज को ऊँचाई देती है।”

    सौरभ सिंह की यह यात्रा यह दर्शाती है कि भक्ति और कर्म, परंपरा और आधुनिकता, समाज और आत्मा सबका संगम एक युवा मन में संभव है। वे उस नई पीढ़ी का चेहरा हैं जो व्यवसाय में सफल होकर भी समाज से जुड़े रहना चाहती है, और जो राजनीति को सुधार और सेवा का माध्यम मानती है।

  • Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का 10वां स्टील ब्रिज अहमदाबाद में लॉन्च

    Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का 10वां स्टील ब्रिज अहमदाबाद में लॉन्च

    ठाणे। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अहमदाबाद, गुजरात में 10वां स्टील ब्रिज सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह अहमदाबाद जिले में इस परियोजना का पहला स्टील ब्रिज है।

    60 मीटर लंबाई वाले इस ब्रिज को रेलवे ट्रैक के पास स्थित पश्चिमी रेलवे सुविधा (लॉन्ड्री) के ऊपर लॉन्च किया गया। महीनों की बारीक योजना और तैयारी के बाद, ब्रिज की लॉन्चिंग केवल 7 घंटे में सटीकता के साथ पूरी की गई।

    ब्रिज को पार्श्विक रूप से लॉन्च करने के लिए इसे अस्थायी ट्रैसलों पर जमीन से 16.5 मीटर की ऊँचाई पर असेंबल किया गया और फिर साइड-स्ल्यू किया गया। इस प्रक्रिया में प्रत्येक 200-टन क्षमता वाले दो अर्ध-स्वचालित जैक और लॉकिंग ट्रॉली का उपयोग किया गया।

    ब्रिज की विशेषताएँ:

    • लंबाई: 60 मीटर
    • चौड़ाई: 11.4 मीटर
    • ऊँचाई: 12 मीटर
    • वजन: 485 मीट्रिक टन
    • निर्माण स्थल: वर्धा (नागपुर, महाराष्ट्र)
    • इस्तेमाल किए गए उच्च शक्ति वाले बोल्ट: 20360 टॉर-शियर प्रकार (TTHS)
    • संरचना में सी5 प्रणाली की सुरक्षात्मक पेंटिंग और इलास्टोमेरिक बीयरिंग का उपयोग

    मुख्य संरचना के संयोजन के लिए 35×60 मीटर का अस्थायी प्लेटफ़ॉर्म बनाया गया और ट्रैक बीम को मज़बूत करने के लिए अतिरिक्त ब्रैकेट लगाए गए। कुल 14 स्किड व्यवस्थाओं का उपयोग किया गया, जिनमें से चार विशेष रूप से अनुप्रस्थ प्रक्षेपण (transverse launching) के लिए डिज़ाइन की गई थीं।

    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल 28 स्टील ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनमें से 17 गुजरात और 11 महाराष्ट्र में हैं। अहमदाबाद में यह ट्रेन रेलवे ट्रैक, फ्लाईओवर, नहर, साबरमती नदी पर पुल और छह स्टील ब्रिज सहित 31 क्रॉसिंग से होकर गुज़रती है।