वंदे मातरम के 150 साल पर सियासत गरमाई: बीजेपी ने अबू आजमी और उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना, पार्थ पवार भूमि घोटाले से महाराष्ट्र में मचा भूचाल

बीजेपी प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी और उद्धव ठाकरे गुट पर निशाना साधते हुए कहा— “वंदे मातरम भारत की आत्मा है। जो लोग इस गीत को गाने से इंकार करते हैं, वे देश की संस्कृति और संविधान दोनों का अपमान कर रहे हैं। अबू आजमी और उद्धव ठाकरे जैसे नेता वोट बैंक की राजनीति के लिए देशभक्ति तक को बंधक बना रहे हैं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

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मुंबई: आज “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जहां देशभर में राष्ट्रभक्ति का माहौल रहा, वहीं महाराष्ट्र की सियासत में इस मौके पर जबरदस्त तूफान आ गया।
बीजेपी ने इस ऐतिहासिक दिन पर विपक्षी दलों को देशभक्ति के मुद्दे पर घेरते हुए करारा हमला बोला है।

बीजेपी प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी और उद्धव ठाकरे गुट पर निशाना साधते हुए कहा—

“वंदे मातरम भारत की आत्मा है। जो लोग इस गीत को गाने से इंकार करते हैं, वे देश की संस्कृति और संविधान दोनों का अपमान कर रहे हैं। अबू आजमी और उद्धव ठाकरे जैसे नेता वोट बैंक की राजनीति के लिए देशभक्ति तक को बंधक बना रहे हैं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि “महाराष्ट्र की मिट्टी ने हमेशा देश के लिए बलिदान दिए हैं, ऐसे में वंदे मातरम का विरोध करना केवल राष्ट्रद्रोह नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के गौरव का भी अपमान है।”

इसी बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम एक बड़े भूमि घोटाले में सामने आने से राज्य की राजनीति में भूचाल मच गया है।
सूत्रों के मुताबिक, पुणे जिले में सरकारी जमीन को अवैध तरीके से निजी बिल्डरों के हवाले करने का मामला प्रकाश में आया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

फडणवीस ने कहा—

“राज्य सरकार किसी भी भ्रष्टाचार या जमीन के घोटाले को बर्दाश्त नहीं करेगी, चाहे आरोपी कोई भी क्यों न हो। जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने भी सख्त बयान देते हुए कहा—

“महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार और वोट बैंक की राजनीति का गठजोड़ साफ दिख रहा है। एक तरफ वंदे मातरम का अपमान हो रहा है, दूसरी तरफ सत्ता के लोग घोटालों में लिप्त हैं — जनता अब सब समझ चुकी है।”

वहीं, राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि “वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर देशभर में राष्ट्रभाव का उत्सव होना चाहिए था, लेकिन कुछ लोग आज भी तुष्टिकरण में लगे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देशभक्ति पर भी राजनीति की जा रही है।”

राजनीतिक हलकों में अब चर्चा गर्म है कि बीजेपी इस राष्ट्रवादी भावनाओं के मुद्दे को आगामी चुनावों में बड़े अभियान के रूप में भुना सकती है, जबकि एनसीपी और सपा डिफेंसिव मोड में नज़र आ रही हैं।

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