Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिल्ली में बीजेपी नेताओं से मुलाकात ने राज्य की सियासी गलियों में हलचल मचा दी थी। हालांकि, अब हाई कोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दी है। रांची हाई कोर्ट ने सीएम को निचली अदालत में सशरीर उपस्थिति से छूट दे दी है, और वे केवल 6 दिसंबर को ट्रायल के दौरान अदालत में उपस्थित होंगे। यह राहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन की अवहेलना मामले में दी गई है।
28 नवंबर से दिल्ली में रहे हेमंत सोरेन बुधवार शाम को अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ रांची लौट आए। इस दौरान मीडिया में खबरें आई थीं कि उन्होंने बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ गुप्त बैठक की। इस खबर ने अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया कि क्या सीएम विपक्षी गठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि, झारखंड बीजेपी और जेएमएम नेताओं ने इन अटकलों को तुरंत खारिज कर दिया। जेएमएम के एक्स हैंडल पर भी “झारखंड झुकेगा नहीं” कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया, जिससे साफ संकेत मिला कि राज्य में गठबंधन मजबूत है और अफवाहों से प्रभावित नहीं होगा।
सीएम हेमंत सोरेन के रांची लौटने के बाद कांग्रेस विधायक और राज्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, “इन तरह की अटकलों पर रोक लगनी चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। झारखंड में ग्रैंड अलायंस को स्पष्ट जनादेश मिला है। बीजेपी की कोशिशें गठबंधन को कमजोर करने की हैं, लेकिन सफल नहीं होंगी। हमारे मुख्यमंत्री कभी भी बीजेपी की चालों में नहीं आएंगे। जो नेता राज्य और जनता के हित के लिए जेल जा सकता है, वह कभी भी विपक्ष की साजिशों में शामिल नहीं होगा। हमारी सरकार मजबूत है और आगे भी मजबूत रहेगी।”
राज्य की सियासी प्रतिक्रिया साफ है: हेमंत सोरेन अपनी राजनीतिक जमीन पर अडिग हैं और बीजेपी की साजिशों के बावजूद ग्रैंड अलायंस मजबूत रहेगा।

