इंडिगो संकट के बाद हवाई टिकट 70 हजार तक पहुंचे। दिल्ली-बेंगलुरु- मुंबई से पटना फ्लाइट दाम 5-7 गुना। जनता नाराज़, सरकार और DGCA से कार्रवाई की मांग।
इंडिगो एयरलाइंस में तकनीकी खराबी और पायलट-क्रू की कमी के कारण देशभर में सैकड़ों फ्लाइटें रद्द होने के बाद हवाई यात्रा में अफरातफरी मच गई है। सबसे बड़ा झटका टिकट दामों में आया, जो सामान्य दिनों की तुलना में 5 से 7 गुना तक बढ़ गए।इंडिगो संकट से पैदा विचित्र हालात में स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एयर इंडिया और अकासा एयरलाइंस कूटकर किराया वसूल रही है। पटना का टिकट दिल्ली से 40 हजार, मुंबई से 36 हजार और बेंगलुरु से 70 हजार पार हो गया है।इंडिगो संकट के बाद हवाई टिकट 70 हजार तक पहुंचे। दिल्ली-बेंगलुरु- मुंबई से पटना फ्लाइट दाम 5-7 गुना। जनता नाराज़, सरकार और DGCA से कार्रवाई की मांग।
बेंगलुरु- पटना का टिकट 70,000 रुपये
साधारण दिनों में 8–10 हजार में मिलने वाला टिकट 70,000 रुपये से ऊपर बिका। कई वेबसाइटों पर लगातार कीमत बढ़ती दिखी।
जनता का सीधा सवाल: मंत्रालय और DGCA चुप क्यों?
सोशल मीडिया पर यात्रियों का आरोप है कि:
- हजारों फ्लाइटें रद्द हुईं
- करोड़ों रुपये टिकट में फंस गए
- रिफंड धीमा है
- बाकी एयरलाइंस ने किराये बढ़ा दिए
लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA की ओर से सख्त दखल नहीं दिखा।
लोग कह रहे हैं —
“संकट में राहत देने के बजाय किराये आसमान भेज दिए, कोई रोक नहीं।”
मंत्रालय पर निगरानी ढीली रखने के आरोप
वर्तमान नागरिक उड्डयन मंत्री Kinjarapu Ram Mohan Naidu हैं।
यात्रियों की शिकायत है कि:
- टिकट प्राइस की कोई सीमा तय नहीं
- रिफंड की गैर–साफ़ व्यवस्था
- वैकल्पिक उड़ानों का कड़ाई से प्रबंध नहीं
- एयरलाइंस पर कठोर निर्देश जारी नहीं किए गए
इसलिए गुस्सा उमड़ा है कि:
“संकट में भी आम जनता को बचाने के बजाय बाजार अपने आप चल रहा है।”
सरकार की ओर से अभी तक मूल्य नियंत्रण या राहत पैकेज का कोई ऐलान नहीं हुआ।
कई शहरों में दाम रिकॉर्ड स्तर पर
दिल्ली – पटना
- कई टिकट 40,000+
- 5-6 दिसंबर में सिर्फ दो फ्लाइट दिखीं, दोनों महंगी
मुंबई – पटना
- सीधी फ्लाइट नहीं
- एक-स्टॉप टिकट 80,000 रुपये तक
बेंगलुरु – पटना
- टिकट 72,000 रुपये पार
दरभंगा, गया, पूर्णिया
- किराये में 2–6 गुना बढ़ोतरी
- कुछ तारीखों पर फ्लाइट ही नहीं
नागरिकों का आरोप: संकट में बाजार को खुली छूट
यात्रियों का कहना है:
- “इंडिगो की उड़ानें बंद, बाकी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं”
- “मंत्रालय और DGCA केवल देख रहे हैं”
- “कोई प्राइस कैप क्यों नहीं?”
विशेषज्ञों का कहना है कि DGCA के पास आपातकालीन मूल्य-नियंत्रण के अधिकार हैं, लेकिन उपयोग नहीं किए गए।
राजनीतिक सवाल तेज
विपक्ष और यात्री पूछ रहे हैं:
- इंडिगो संकट के समय अमल में क्या प्लान था?
- यात्रियों के लिए राहत मैकेनिज्म कहाँ है?
- टिकट कीमत इतनी तेज़ कैसे बढ़ी?
मोदी सरकार की आलोचना हो रही है कि:
“हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ी, अब हवाई यात्रा भी आम आदमी की पहुंच से बाहर।”
इंडिगो संकट ने दिखाया कि:
- एयरलाइंस एक-दूसरे पर निर्भर हैं
- कीमतें नियंत्रण में नहीं
- यात्री सुरक्षा और सुविधा पर गंभीर सवाल खड़े हैं
जब तक सख्त निगरानी और पारदर्शी प्राइस-रूल नहीं आते,
यात्रियों का गुस्सा कम होने वाला नहीं।

