नासिक। नासिक महानगरपालिका चुनाव (Municiple Election2025-26) से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर गहरी असंतोष की लहर सामने आ गई है। पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता, हाल ही में अन्य दलों से आए नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने से नाराज़ होकर खुलकर विरोध में उतर आए हैं। गुरुवार को नासिक रोड स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन हुआ, जहां विधायक राहुल ढिकले के खिलाफ नारेबाजी की गई।
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वालों को दरकिनार कर शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से आए नेताओं को टिकट थमा दिए गए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें लगातार उम्मीदवार बनाए जाने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन आखिरी वक्त पर उन्हें धोखा मिला।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने भाजपा की शहर इकाई के अध्यक्ष सुनील केदार को घेर लिया। कार्यकर्ताओं ने उनसे सीधे सवाल किया कि टिकट वितरण का आधार क्या था और वफादार कार्यकर्ताओं को बाहर क्यों रखा गया। हालात बिगड़ते देख पार्टी कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
इसी बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) के कार्यकर्ता भी भाजपा कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने महायुति गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी जाहिर की और नारेबाजी की। हालात को देखते हुए भाजपा कार्यालय को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा और सुनील केदार को पुलिस सुरक्षा में बाहर निकाला गया।
पार्टी के भीतर असंतोष का एक और दृश्य बुधवार को देखने को मिला, जब वार्ड क्रमांक 29 से टिकट न मिलने से नाराज़ भाजपा कार्यकर्ता बालासाहेब घुगे ने विधायक सीमा हीराय के खिलाफ नारे लगाए और विरोध दर्ज कराने के लिए सार्वजनिक रूप से खुद को थप्पड़ मारा।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी तनाव बना रहा। 30 दिसंबर को एबी फॉर्म बांटे जाने के दौरान नाराज़ कार्यकर्ताओं ने केदार की गाड़ी का पीछा किया था। चुनावी प्रशासन के अनुसार, 31 वार्ड वाली नासिक महानगरपालिका की 122 सीटों के लिए कुल 2,356 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें से जांच के बाद 2,079 नामांकन वैध पाए गए, जबकि 277 नामांकन विभिन्न कारणों से रद्द कर दिए गए।
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 2 जनवरी तय की गई है और अंतिम उम्मीदवार सूची 3 जनवरी को जारी होगी। वहीं, मालेगांव महानगरपालिका में 21 वार्डों की 84 सीटों के लिए कुल 808 नामांकन प्राप्त हुए, जिनमें से 94 नामांकन अमान्य घोषित किए गए हैं, जबकि 714 नामांकन अभी विचाराधीन हैं।
नासिक की राजनीति में यह घटनाक्रम भाजपा के लिए चुनावी चुनौती बनता दिख रहा है, जहां भीतरघात और असंतोष का असर सीधे चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।

