By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
rashtriyaswabhimaan.comrashtriyaswabhimaan.comrashtriyaswabhimaan.com
  • देश
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखण्ड
    • छत्तीसगढ़
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • हिमाचल
  • महाराष्ट्र
    • मुंबई
    • ठाणे महानगरपालिका
    • नवी मुंबई महानगरपालिका
    • कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका
    • भिवंडी
  • राजनीति
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • ई-पेपर
  • More
    • मनोरंजन
    • बिज़नेस
    • टेक्नॉलजी
    • धर्म
    • वेब स्टोरीज
Reading: Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
rashtriyaswabhimaan.comrashtriyaswabhimaan.com
Font ResizerAa
Search
  • देश
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखण्ड
    • छत्तीसगढ़
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • हिमाचल
  • महाराष्ट्र
    • मुंबई
    • ठाणे महानगरपालिका
    • नवी मुंबई महानगरपालिका
    • कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका
    • भिवंडी
  • राजनीति
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • ई-पेपर
  • More
    • मनोरंजन
    • बिज़नेस
    • टेक्नॉलजी
    • धर्म
    • वेब स्टोरीज
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
rashtriyaswabhimaan.com > Maharashtra > मुंबई > बृहन्मुंबई महानगरपालिका > Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे
MaharashtramumbaiPoliticsUncategorizedबृहन्मुंबई महानगरपालिकामुंबईमुंबई पुलिस

Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

Rastriya Swabhimaan
Last updated: January 31, 2026 1:32 pm
Rastriya Swabhimaan
Share
6 Min Read
शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे
शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे
SHARE

अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

Contents
क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबीपटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिकासुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षापार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook X Copy Link Print
Share
By Rastriya Swabhimaan
Follow:
About Us – Rashtriya Swabhimaan "A Platform of People's Sentiment, A Voice of Truth" Rashtriya Swabhimaan is not just a media outlet — it is a commitment to fearless, ethical, and people-centric journalism. In today’s world, where mainstream media often succumbs to TRP pressure, commercial interests, and political bias, Rashtriya Swabhimaan chooses a different path. We are here to restore faith in journalism — not as a business, but as a responsibility. ✊ What We Stand For: We raise real questions that elected representatives and bureaucrats prefer to avoid. We give voice to the common citizen, whose pain and protest are ignored by power. We represent those who have no PR teams, no platforms, and no privileges. We are not for sale — we don’t bend, we don’t compromise. 🎯 Our Mission: To become the voice of every Indian whose story deserves to be heard, and whose truth needs to be told. We report what matters, not what trends.
Previous Article प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की। Forged Certificate: अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे के बाद भाई ने किया बड़ा खुलासा, प्रशासन में मचा हड़कंप
Next Article तेहरान ने तैयार किया ‘विनाशकारी’ प्लान, 40 हजार अमेरिकी सैनिक निशाने पर Hormuz Blockade to Proxy Attacks, Tehran’s Full-Scale Battle Plan Ready:अमेरिका–ईरान युद्ध की आहट: होर्मुज की नाकाबंदी से प्रॉक्सी हमलों तक, तेहरान ने बिछाया जंग का पूरा शतरंज
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

235.3kFollowersLike
69.1kFollowersFollow
11.6kFollowersPin
56.4kFollowersFollow
136kSubscribersSubscribe
4.4kFollowersFollow

Latest News

राष्ट्रवाद के नारों और बेरोज़गारी-महंगाई जैसे मुद्दों के बीच बढ़ती बहस पर विशेष विश्लेषण।
Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?
Politics February 11, 2026
भारत-अमेरिका कृषि समझौते को लेकर किसानों के हितों पर उठे सवाल, सरकार और विपक्ष आमने-सामने।
INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?
Discover February 11, 2026
सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में 3 मिनट 10 सेकंड के छह अंतरों वाले “वंदे मातरम्” संस्करण को अनिवार्य किया।
Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल
Uncategorized February 11, 2026
विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है.
Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’
Politics February 10, 2026
rashtriyaswabhimaan.comrashtriyaswabhimaan.com
Follow US
© 2024 Rashtriya Swabhimaan. All Rights Reserved. Designed by - Creative Web Solution
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • राजनीति
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • ई-पेपर
  • More
Join Us!
Subscribe to our newsletter and never miss our latest news, podcasts etc..
Zero spam, Unsubscribe at any time.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?