मुंबई। केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना (PM E-Bus Service Scheme) महाराष्ट्र में अब तक केवल कागज़ों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस योजना के तहत राज्य के 22 शहरों के लिए 1,609 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,411 बसों के लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी ई-बस प्रत्यक्ष सेवा में शामिल नहीं हुई है।
यह जानकारी कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दी है। सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरा और योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में इस योजना के अंतर्गत कितने शहर शामिल हैं, कितनी इलेक्ट्रिक बसों को अब तक मंजूरी दी गई है, कितनी बसों के लिए निविदाएं निकाली गई हैं और कितनी बसें वास्तव में सेवा में आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस डिपो की तैयारी और बिजली की उपलब्धता की पर्याप्त समीक्षा की है या नहीं, और इस योजना से यात्रियों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलने वाला है।
केंद्र सरकार की ओर से नगर विकास मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना के तहत ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) इलेक्ट्रिकल और सिविल डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 370.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें से अब तक 200.18 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन कमेटी (PMEC) और सेंट्रल स्टियरिंग एंड अप्रूवल कमेटी (CSAC) के माध्यम से राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है। पीएम-ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य देश के 100 से अधिक शहरों में 10,000 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना है, ताकि शहरी परिवहन को स्वच्छ, स्मार्ट और समावेशी बनाया जा सके।
इस योजना में 3 से 40 लाख आबादी वाले शहरों, 3 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की राजधानियों तथा पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों की राजधानियों को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे छोटे शहरों और उन इलाकों में रहने वाले यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जहां संगठित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में अब तक एक भी ई-बस के सेवा में न आने को लेकर योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं और इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है।

