भिवंडी: कोणार्क विकास अघाड़ी के पूर्व महापौर विलास पाटील और उनके बेटे पार्षद मयूरेश पाटील को शनिवार को भिवंडी कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। जमानत मिलने के बाद महापौर पद के चुनाव (Mayor Election) में प्रतिस्पर्धा और भी तेज हो गई है।
भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका चुनाव के बाद कोणार्क विकास अघाड़ी के पूर्व महापौर विलास पाटील और भाजपा विधायक महेश चौगुले के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस मामले में निजामपुरा पुलिस स्टेशन में दोनों गुटों के लगभग 51 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस एफआईआर में विलास पाटील और उनके बेटे मयूरेश पाटील का नाम भी शामिल था।
शनिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने विलास पाटील और मयूरेश पाटील को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। इनके साथ ही कोणार्क विकास अघाड़ी के कुल 23 लोगों को जमानत मिली। वहीं, भाजपा विधायक के 3 समर्थकों को भी जमानत मिली। कुल मिलाकर 26 लोगों को भिवंडी कोर्ट से राहत मिली है।
इस बीच, शुक्रवार को भाजपा की ओर से नारायण चौधरी के नाम की आधिकारिक घोषणा महापौर पद के लिए की गई थी। हालांकि, इस घोषणा के बाद भाजपा पार्षद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटील के भतीजे सुमित पाटील ने अपनी नाराजगी जाहिर की, जिससे पार्टी में दो गुट बन गए हैं।
विलास पाटील के चुनावी मैदान में सक्रिय होने और भाजपा के आंतरिक मतभेदों के कारण महापौर पद की जंग काफी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गई है। इससे पहले कोणार्क विकास अघाड़ी ने सिर्फ़ छह सीटें होने के बावजूद कांग्रेस में फूट डालकर महापौर पद पर कब्ज़ा किया था। अब अग्रिम जमानत मिलने के बाद पार्टी की बढ़ती सक्रियता और शहर में मची आपसी कलह का फायदा उठाकर समीकरण बदल सकती है, जो शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

