Medical Help :हजारों फीट की ऊंचाई पर ‘देवदूत’ बना मेडिकल छात्र, विमान में यात्री की बचाई जान

मेडिकल छात्र ने विमान में यात्री की जान बचाई, तत्परता से किया इलाज।

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नालासोपारा। आसमान में उड़ते विमान(Fight) के भीतर अचानक एक यात्री की तबीयत बिगड़ गई। चक्कर, सांस लेने में दिक्कत और तेजी से गिरती ब्लड शुगर ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया। हजारों फीट की ऊंचाई पर जब हर पल कीमती था, तब एक मेडिकल छात्र(Medical Help By Student) यात्री के लिए किसी देवदूत से कम साबित नहीं हुआ। पालघर जिले के वेदांत मेडिकल कॉलेज (Vedant Medical College) के अंतिम वर्ष के छात्र और वसई निवासी डॉ. आर्यन लोलयेकर ने अपनी सूझबूझ और साहस से उस यात्री की जान बचा ली।

यह घटना 3 फरवरी को गोवा से मुंबई जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के विमान में हुई। दोपहर 3:50 बजे दाबोली एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद एक सहयात्री को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी। जांच में पता चला कि उसके रक्त में शुगर का स्तर तेजी से गिर रहा था। हालात बिगड़ते देख विमान के क्रू मेंबर्स ने तुरंत घोषणा की—“क्या विमान में कोई डॉक्टर है?”

घोषणा सुनते ही एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे डॉ. आर्यन लोलयेकर बिना एक पल गंवाए आगे आए। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए विमान में उपलब्ध आपातकालीन(Emergency) ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद से यात्री को कृत्रिम श्वसन देना शुरू किया। करीब 45 मिनट बाद विमान मुंबई में सुरक्षित उतरा, जहां इंडिगो के ग्राउंड स्टाफ ने मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

डॉ. आर्यन की तत्परता से यात्री की हालत स्थिर हो गई। विमान में मौजूद यात्रियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका आभार जताया। इस अनुभव को साझा करते हुए डॉ. आर्यन ने कहा, “यात्री की हालत देखकर एक पल को डर जरूर लगा, लेकिन मेडिकल शिक्षा ने मुझे हिम्मत दी। अगर समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। एक जान बचा सका, यही सबसे बड़ा संतोष है।”

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया फैसला और सेवा का जज्बा किसी की जिंदगी बचा सकता है।

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