क्या मोदी सरकार ने बांग्लादेश में टूटे हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों की मदद दी?:शिवसेना (यूबीटी)
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका के महापौर (Mumbai Mayor) पद के लिए भाजपा ने रितू तावडे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 11 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव में उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही रितू तावडे के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिस पर शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रितू तावडे ने कहा है कि वे मुंबई के हर नागरिक के लिए काम करना चाहती हैं। उनका दावा है कि मुंबईकर टैक्स (Mumbaikar Tax) देने वाला, जागरूक और संवेदनशील नागरिक है, लेकिन आज उसे फुटपाथ और सड़कों पर चलने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण की बड़ी वजह बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं। तावडे के मुताबिक, यदि मुंबई को सुरक्षित रखना है, तो इन लोगों को शहर से बाहर करना उनकी प्राथमिकता होगी।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कटाक्ष किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश में तोड़े गए हिंदू मंदिरों को बनाने के लिए सीधे “केंद्र सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये की सहायता” देने का कोई आधिकारिक प्रावधान यूनियन बजट 2026-27 में नहीं किया है।
वास्तव में, इस बजट में भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली विदेशी मदद की राशि पहले के 120 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 60 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले साल की तुलना में आधी है। यह बजट प्रावधान बांग्लादेश की सहायता के सामान्य विदेशी विकास सहयोग के रूप में है और उसमें किसी विशिष्ट धार्मिक स्थल की मरम्मत या मंदिर निर्माण जैसे प्रोजेक्ट का उल्लेख नहीं है। इस सहायता कटौती को दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और वहां चल रही अन्य परिस्थितियों के बीच एक आर्थिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।
महापौर चुनाव से पहले इस बयानबाज़ी ने मुंबई की राजनीति को गरमा दिया है। जहां भाजपा शहर की सुरक्षा और अतिक्रमण को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है।

