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IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

अब फाइनेंशियल बिड्स के मूल्यांकन के साथ IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अपने सबसे अहम मोड़ पर
अब फाइनेंशियल बिड्स के मूल्यांकन के साथ IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अपने सबसे अहम मोड़ पर
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नई दिल्ली। IDBI बैंक के विनिवेश (IDBI Bank Disinvestment) की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के तहत कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने अपनी फाइनेंशियल बोलियां जमा कर दी हैं।

एमिरेट्स NBD दुबई सरकार के स्वामित्व वाला बैंक है, जबकि फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी है। शॉर्टलिस्ट किए गए इन तीनों बोलीदाताओं की फाइनेंशियल बिड का अब तय प्रक्रिया के तहत वैल्यूएशन किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, फाइनल चयन केवल सबसे ऊंची बोली के आधार पर नहीं होगा। इसमें प्राइस के साथ-साथ कई क्वालिटेटिव और रेगुलेटरी फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि बैंक की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रबंधन क्षमता सुनिश्चित की जा सके।

DIPAM ने की फाइनेंशियल बिड्स की पुष्टि

डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने पहले ही फाइनेंशियल बिड्स मिलने की पुष्टि कर दी थी। DIPAM सचिव ने 6 फरवरी को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि IDBI बैंक के स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के लिए फाइनेंशियल ऑफर प्राप्त हो चुके हैं और उनका मूल्यांकन तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

शॉर्टलिस्ट किए गए निवेशकों से फाइनल फाइनेंशियल ऑफर मिलने के बाद यह सौदा अपने निर्णायक मूल्यांकन चरण में प्रवेश कर जाता है।

सरकार और LIC बेचेगी 60.72% हिस्सेदारी

इस स्ट्रेटेजिक सेल में IDBI बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल का हस्तांतरण भी शामिल है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

यह विनिवेश केंद्र सरकार के व्यापक स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना और नॉन-कोर सेक्टर्स में सरकारी भागीदारी को कम करना है।

2021 में PCA से बाहर निकलने के बाद बढ़ी रफ्तार

IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को मार्च 2021 में नई गति मिली थी, जब बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकला। एसेट क्वालिटी, कैपिटल एडिक्वेसी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के बाद PCA से बाहर आना प्राइवेट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक अहम शर्त माना जा रहा था। अब फाइनेंशियल बिड्स के मूल्यांकन के साथ IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुंच गई है।

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