आजमगढ़ (Azamgarh): आजमगढ़ के अत्रौलिया थाना क्षेत्र, ग्राम इटौरी-खालिसपुर में 20 जनवरी 2026 को रामलोटन तिवारी की 13 वर्षीय बेटी को स्कूल से घर लौटते समय कुछ बदमाशों ने अपहरण (13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh) कर लिया। आज 23 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन सोया हुआ है और कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ है।

घटना के बाद बच्ची के साथ आने वाली सहेलियां मानसिक रूप से परेशान हैं। इसके बावजूद पुलिस ने माता-पिता को बयान देने से रोककर जांच में विलंब किया। जिले के DM और थाना प्रशासन (SO, CO) भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या कानून केवल आम जनता के लिए है या पुलिस और सरकार अधिकारियों के लिए अलग है।
राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय ने कहा, “अगर पुलिस अधिकारियों की बेटी का अपहरण हुआ होता, तो क्या वे हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहते?” उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना सिर्फ कागजों में है, असली धरातल पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो रही।
उपाध्याय ने कहा कि बलात्कार, अपहरण और अपराधों में लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है कि यूपी पुलिस अपराधियों के लिए सुरक्षित वातावरण बना रही है। उन्होंने योगी सरकार से तत्काल कठोर कदम उठाने, दोषियों को गिरफ्तार करने और प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।
स्थानीय नागरिक और राजनीतिक नेता भी कह रहे हैं कि अगर यही निष्क्रियता जारी रही, तो अपराधियों में और हिम्मत बढ़ेगी और आम जनता के लिए कानून और सुरक्षा केवल शब्दों तक सीमित रह जाएगी।

