तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि यदि उसकी सरकार को अस्थिर करने या शासन परिवर्तन की कोई भी कोशिश की गई तो उसका जवाब बेहद खौफनाक होगा। हाल के दिनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए अचानक सैन्य हमलों के बाद ईरान की नई नेतृत्व व्यवस्था ने संकेत दिया है कि हालात बिगड़ने पर परमाणु हथियारों (Atomic Attack) के इस्तेमाल तक की नौबत आ सकती है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया संघर्ष में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के बाद देश में भारी जनहानि हुई है और हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन के बाद देश अभी शोक से उबर भी नहीं पाया था कि युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई।
सत्ता परिवर्तन की आशंका पर सख्त चेतावनी
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका और इज़रायल अगर वहां की मौजूदा व्यवस्था को गिराने की कोशिश करेंगे तो इसका अंजाम पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकता है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वह इज़रायल के परमाणु ठिकानों को सीधे निशाना बनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
ईरान का कहना है कि यह उसके आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है और वह किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
अमेरिका और इज़रायल की रणनीति
इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयानों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। इन नेताओं का मानना है कि सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान में ऐसी स्थिति पैदा की जा सकती है, जिससे वहां की जनता खुद शासन के खिलाफ खड़ी हो जाए।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी और इज़रायली हमले अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे हैं। पुलिस चौकियों, अर्धसैनिक संगठनों और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। तेहरान में कई पुलिस स्टेशनों पर हुए हमलों ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है।
प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर करने की कोशिश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों का मकसद केवल सैन्य ताकत को कमजोर करना नहीं है, बल्कि ईरान के प्रशासनिक नियंत्रण को भी कमजोर करना है। मिडिल लेवल कमांडरों और फील्ड यूनिट्स को निशाना बनाकर शासन तंत्र को पंगु बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
यदि ऐसा होता है तो ईरान की सरकार के लिए देश के भीतर संभावित जनविद्रोह को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
‘डूम्सडे’ मिसाइल परीक्षण और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका
इसी बीच अमेरिका ने कैलिफोर्निया के पास अपनी ‘डूम्सडे’ मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसे अत्यधिक विनाशकारी माना जाता है। इस परीक्षण और मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर पहुंच सकती है।
आम लोगों पर भी पड़ रहा असर
युद्ध की आशंका का असर आम नागरिकों के जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों ने मध्य पूर्व के ऊपर से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स को रद्द कर दिया है। केवल भारत में ही सुरक्षा कारणों से करीब 180 उड़ानों को रद्द किया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
उधर, अमेरिकी हमले में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने और उसमें सवार 80 से अधिक लोगों की मौत की खबरों ने इस संघर्ष को और दर्दनाक बना दिया है।
शांति की अपील
इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

