नवी मुंबई: ऐरोली सेक्टर-15 में महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) की बकाया बिल वसूली के नाम पर मीटर हटाने की कार्रवाई ने स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि महावितरण के ठेकेदार और कुछ कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के घरों और दुकानों के बाहर लगे बिजली मीटर निकालकर ले जा रहे हैं।

स्थानीय रहिवाशों का कहना है कि मीटर हटाने की यह कार्रवाई नियमों के विपरीत हो रही है। कई लोगों ने बताया कि मीटर हटाते समय कर्मचारियों द्वारा कोई नोटिस या सूचना नहीं दी जाती, और जब इसके कारण पूछे जाते हैं तो केवल बकाया बिल की वजह बताई जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से पहले नोटिस देना और समय देना आवश्यक है, लेकिन महावितरण की टीम सीधे मीटर निकाल लेती है।
सामाजिक कार्यकर्ता विठ्ठल बबन बांगर ने भी इस मामले में महावितरण प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई उपभोक्ता मौके पर ही बकाया बिल भरने के लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन मीटर वापस लगाने में देरी की जाती है। इससे लोगों को महावितरण कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं और अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नागरिकों ने बिल वितरण व्यवस्था में भी गड़बड़ी की शिकायत की है। कई सोसायटियों में घर-घर बिल नहीं पहुंचाया जाता, बल्कि बंडल किसी कोने में छोड़ दिया जाता है। इससे समय पर बिल न मिलने के कारण बाद में बकाया के नाम पर कार्रवाई होती है और उपभोक्ताओं पर दबाव बनता है।
विठ्ठल बांगर ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द ही जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो नागरिक आंदोलन की राह अपनाने पर मजबूर होंगे। नागरिक अब इस मामले की शिकायत राज्य के ऊर्जा विभाग, महावितरण के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से करने की तैयारी में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सूचना किसी के परिसर से मीटर हटाना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अब यह देखना होगा कि महावितरण प्रशासन इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में ऐसी कार्रवाई रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

