Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswat: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में शिवाजी जयंती पर ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ का शुभारंभ

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में काशी के शंकराचार्य घाट से ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ की शुरुआत।

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राष्ट्रीय स्वाभिमान। प्रेम चौबे

वाराणसी। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर काशी के Shankaracharya Ghat पर विशेष कार्यक्रम आयोजित कर ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गौभक्त शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत गंगा पूजन से हुई। इसके बाद Chhatrapati Shivaji Maharaj के चित्र पर तिलक लगाकर पुष्प अर्पित किए गए और उपस्थित लोगों को गौरक्षा का संकल्प दिलाया गया। अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे और उन्होंने गौ, ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के ग्रंथों में राजा का कर्तव्य गौ, ब्राह्मण और देवालयों की रक्षा करना बताया गया है। भगवान राम से लेकर भगवान कृष्ण, आदि शंकराचार्य, महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज तक सभी ने इसी परंपरा का पालन किया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि गौ, ब्राह्मण और मंदिरों की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों द्वारा शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिसमें गौरक्षा से जुड़े प्रसंगों को दर्शाया गया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय सारस्वत परिषद की ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गौरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के लिए ‘करपात्र गौभक्त सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संस्था की ओर से गिरीश चंद्र तिवारी और प्रो. विवेकानंद तिवारी ने प्रदान किया।

मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार सुबह काशी स्थित श्रीविद्यामठ से लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां 11 मार्च को ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रस्थान से पहले वे चिंतामणि गणेश मंदिर में पूजन-अर्चन करेंगे और इसके बाद संकट मोचन मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंगबाण का पाठ किया जाएगा।

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