Maternity Leave: मातृत्व अवकाश एक साल करने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने की मांग

मातृत्व अवकाश एक साल करने की मांग, शिवसेना विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने विधान परिषद में उठाया मुद्दा

मुंबई: कामकाजी महिलाओं की मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) अवधि बढ़ाकर एक वर्ष करने और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने की मांग शिवसेना विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने महाराष्ट्र विधान परिषद में उठाई। उन्होंने यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सदन में हुई चर्चा के दौरान रखा।

डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि आज की जीवनशैली में महिलाओं पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है। कॉर्पोरेट क्षेत्र में कई महिलाएं लगातार 12 घंटे तक लैपटॉप पर काम करती हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। वर्तमान में कामकाजी महिलाओं को छह महीने की मातृत्व अवकाश मिलती है, लेकिन इतने कम समय में कई माताओं को अपने छोटे बच्चों को डे-केयर या पाळनाघर में छोड़कर फिर से काम पर लौटना पड़ता है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाकर एक वर्ष की जाए, ताकि मां अपने बच्चे की बेहतर देखभाल कर सके और बच्चे को उचित पोषण और स्तनपान मिल सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी में नौकरी करने वाली महिलाओं को एक साल की मातृत्व अवकाश दी जाती है।

डॉ. कायंदे ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने गर्भाशय की सर्जरी (हिस्टेरेक्टॉमी) कराने वाली महिलाओं को सवेतन छुट्टी देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र सरकार को भी इस तरह का निर्णय लेना चाहिए, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समय पर्याप्त आराम मिल सके।

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए रेलवे स्टेशन, एसटी डिपो और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाया जाना चाहिए।

डॉ. कायंदे ने पंढरपुर वारी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पुलिस अधिकारी अतुल कुलकर्णी के नेतृत्व में करीब 20 लाख वारकरियों का फेस रिकग्निशन किया गया था। इस तकनीक के माध्यम से बायोमेट्रिक पहचान जैसे रेटिना स्कैन भी किया जा सकता है, जिससे अपराधों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा उन्होंने घरेलू हिंसा रोकथाम कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोटेक्शन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग में खाली पदों को भरने तथा महिलाओं की मदद के लिए काउंसलर और वकीलों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और लाड़ली बहन योजना जैसी पहल महिलाओं के लिए मददगार साबित हुई है। साथ ही राज्य के बजट में 13 जिलों में “उमेद मॉल” शुरू करने की योजना का भी स्वागत किया, जिससे महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।

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