मुंबई: मुंबई महानगरपालिका(BMC) के नगर अभियंता विभाग में कनिष्ठ अभियंता (सिविल/मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल) पदों की भर्ती परीक्षा होने के बावजूद अब तक परिणाम घोषित नहीं होने पर मुंबई की मेयर रितू तावड़े ने प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में लंबित है, इसलिए अंतिम सुनवाई जल्द कराने के लिए न्यायालय से अनुरोध किया जाए और प्रशासन अपनी बात मजबूती से रखे।

मेयर रितू तावड़े ने भर्ती से संबंधित लंबित मुद्दों पर हाल ही में महानगरपालिका अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि दुय्यम अभियंता भर्ती प्रक्रिया में छानबीन के दौरान अपात्र या अनुपस्थित उम्मीदवारों के कारण जो पद खाली हैं, उन्हें प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवारों से भरने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया तेज की जाए।
नगर अभियंता विभाग में कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 250 पद और कनिष्ठ अभियंता (मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल) के 130 पद भरने के लिए 15 अक्टूबर 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था। इस भर्ती परीक्षा में लगभग 50 हजार उम्मीदवारों ने भाग लिया था। हालांकि एक साल बीतने के बाद भी परिणाम घोषित नहीं होने से उम्मीदवारों में असंतोष बढ़ रहा है।
बैठक में म्युनिसिपल इंजीनियर्स एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष रमेश भुतेकर सहित अन्य उम्मीदवारों ने कहा कि मामला अदालत में होने के बावजूद परिणाम घोषित करने पर कोई रोक नहीं है। साथ ही उन्होंने मांग की कि दुय्यम अभियंता भर्ती में अपात्र या अनुपस्थित उम्मीदवारों की जगह प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन का अवसर दिया जाए।
इस पर महानगरपालिका की ओर से अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे ने बताया कि भर्ती विज्ञापन में केवल डिप्लोमा धारकों को पात्र बताया गया था। इसके खिलाफ डिग्रीधारी उम्मीदवारों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।
उच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर 2024 को अंतरिम आदेश देते हुए डिग्रीधारकों को भी मौका देने की बात कही, जिसके बाद परीक्षा आयोजित की गई। बाद में इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जहां उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी गई।
डॉ. ढाकणे ने बताया कि अब प्रशासन की ओर से वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों को नियुक्त कर अदालत में मजबूती से पक्ष रखा जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होनी है।
मेयर रितू तावड़े ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसमें अनावश्यक देरी से युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए प्रशासन को न्यायालय में मजबूत पक्ष रखते हुए अंतिम सुनवाई जल्द कराने का प्रयास करना चाहिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

