भिवंडी: शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है और विभिन्न इलाकों में इनकी संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण शहर में आवारा कुत्तों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। शहर के ईदगाह, शांतिनगर, कामतघर, नागाव, गायत्रीनगर, निजामपुर और कोंबडपाडा जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते मौजूद हैं, जिनका प्रबंधन करने में नगर निगम प्रशासन का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग विफल साबित हुआ है। इससे नागरिकों, विशेषकर छोटे बच्चों में दहशत का माहौल है।
नगर निगम ने कुत्तों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए 12 वर्षों से बंद पड़े श्वान नसबंदी केंद्र को 11 नवंबर 2024 को दोबारा शुरू किया। इस काम का जिम्मा ‘व्हेट्स सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर एंड रुरल डेवलपमेंट’ नामक संस्था को सौंपा गया है, जिसे प्रति कुत्ता नसबंदी के लिए 1440 रुपये दिए जाते हैं। शहर में लगभग 24 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं, जिनमें से अब तक करीब 7 से 9 हजार कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की जा चुकी है।(Bhiwandi incident)
पशु प्रेमी दीप्ति देशमुख ने जानकारी दी है कि नगर निगम द्वारा शुरू किए गए इस नसबंदी केंद्र में भारी गंदगी फैली हुई है। संस्था और प्रशासन की अनदेखी के कारण बेजुबान जानवरों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है। नसबंदी के बाद कुत्तों को जिस शेल्टर में रखा जाता है, वहां मल-मूत्र और उल्टी की सफाई नहीं की जाती। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। एक ही पिंजरे या जाल में 5-5 कुत्तों को रखा जा रहा है। सर्जरी के बाद कमजोर कुत्ते आपस में लड़ते हैं, जिससे वे दोबारा घायल हो रहे हैं। नियमानुसार, कुत्ते को जिस इलाके से पकड़ा गया है, नसबंदी के बाद उसे वहीं छोड़ना अनिवार्य है।
लेकिन शिकायत है कि कुत्तों को दूसरे इलाकों में छोड़ दिया जाता है। नए इलाके में छोड़े जाने के कारण वहां के पुराने कुत्ते इन्हें स्वीकार नहीं करते, जिससे उनके बीच हिंसक लड़ाइयां होती हैं। साथ ही, भोजन न मिलने के कारण ये कुत्ते अधिक आक्रामक और चिड़चिड़े हो रहे हैं। पशु प्रेमी दीप्ति देशमुख का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में नगर निगम प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन प्रशासन और ठेकेदार संस्था जानबूझकर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

