Shahapur Tribal Ashram Schools: आदिवासी आश्रम स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए आज शाहपुर में राज्य-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन!

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Shahapur Tribal Ashram Schools: राज्य के सरकारी आश्रम स्कूलों में छात्रों की दाखिला क्षमता बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज ठाणे जिले के शाहपुर तालुका स्थित अघाई में एक भव्य राज्य-स्तरीय एक-दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यक्रम ‘आत्म मालिक एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स’ में संपन्न हुआ।

इस कार्यशाला का आयोजन आदिवासी विकास विभाग की पहल पर किया गया, जिसमें आदिवासी विकास मंत्री Dr. Ashok Uike मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ सचिव Dinesh Waghmare, आयुक्त Leena Bansod, जिला कलेक्टर Dr. Shrikrishna Panchal, अतिरिक्त आयुक्त Gopichand Kadam और परियोजना अधिकारी Divakar Kalpande सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह पंजीकरण और स्वागत सत्र के साथ हुई। इसके बाद छात्रों के नामांकन अभियान को गति देने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए प्रचार वाहन का उद्घाटन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक बच्चों को आश्रम स्कूलों से जोड़ना है।

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कार्यशाला के दौरान महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले तथा विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले मेधावी आदिवासी छात्रों का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर ‘Shaping Futures: A Journey of Tribal Development in Palghar’ नामक कॉफी-टेबल पुस्तिका का विमोचन किया गया और ‘स्कूल प्रवेशोत्सव’ के लिए विशेष प्रचार जिंगल भी लॉन्च किया गया।

कार्यक्रम में जवाहर परियोजना कार्यालय की अभिनव पहल ‘बैंगलोर यात्रा’ पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें छात्रों के शैक्षणिक और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी जानकारी साझा की गई। दोपहर के सत्र में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। नासिक और ठाणे संभाग के अधिकारियों ने आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, छात्रों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को लेकर अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।

परियोजना अधिकारी दिवाकर कल्पान्डे ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं के प्रधानाध्यापकों, वार्डनों और अधीक्षकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया गया, ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं का समाधान किया जा सके। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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