₹10 Crore Scam: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल (बृहन्मुंबई एवं ठाणे जिला) के माध्यम से सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता और न्यायालय को गुमराह करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में सुरक्षा रक्षक मंडल के अध्यक्ष अशोक डोके सहित संबंधित अधिकारियों की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से विस्तृत जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता तथा फाइट फॉर राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद पांडुरंग घोलप ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, श्रम मंत्री आकाश फुंडकर और श्रम विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत देकर की है।
शिकायत के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 को मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के तत्कालीन उपायुक्त मारुति पांडुरंग गायकवाड ने मे. सैनिक इंटेलिजेंस सिक्युरिटी प्रा. लि. नामक ठेकेदार कंपनी के माध्यम से कार्यरत सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण के लिए पत्र जारी किया था। हालांकि, संबंधित सुरक्षा रक्षक वास्तव में कहां, कितने समय से और किस विभाग में कार्यरत थे, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया है कि उच्च न्यायालय में केवल 161 सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण से संबंधित याचिका लंबित होने के बावजूद लगभग 490 अतिरिक्त सुरक्षा रक्षकों का पंजीकरण किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना और प्रशासन द्वारा न्यायालय को गुमराह करने का मामला बताया है।
शिकायत में आगे कहा गया है कि न्यायालय में दायर शपथपत्र में तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड ने लगभग 650 सुरक्षा रक्षकों की कोई जानकारी महानगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी, जबकि इससे पहले उन्हीं अधिकारियों द्वारा पंजीकरण के लिए अनुशंसा पत्र जारी किया गया था। इससे शासन और न्यायालय को विरोधाभासी जानकारी देने का आरोप और गंभीर हो गया है।
इसके अलावा, संबंधित सुरक्षा रक्षकों से पंजीकरण खर्च के नाम पर ₹1 लाख से ₹1.50 लाख तक की राशि अग्रिम कर्ज के रूप में लेकर उनके वेतन से कटौती किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे सुरक्षा रक्षकों के आर्थिक शोषण और बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का संकेत बताया है।
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वहीं सुरक्षा रक्षक मंडल के निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में संबंधित 650 सुरक्षा रक्षकों को पिछले 15 वर्षों से कार्यरत बताते हुए उनके पंजीकरण पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही गई है। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जानकारी वास्तविकता से मेल नहीं खाती और शासन व न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से गलत जानकारी प्रस्तुत की गई है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड बाद में नवी मुंबई महानगरपालिका में कार्यरत रहते हुए भ्रष्टाचार के एक मामले में ACB द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इससे पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने इस पूरे मामले में ₹10 करोड़ से अधिक के आर्थिक घोटाले का दावा करते हुए अवैध पंजीकरण तत्काल रद्द करने, सुरक्षा रक्षकों से वसूली गई राशि वापस करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
इन आरोपों के बाद मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल का कामकाज एक बार फिर विवादों में आ गया है। अब राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। “यदि सुरक्षा रक्षकों को न्याय नहीं मिला तो तीव्र जन आंदोलन किया जाएगा,” ऐसा इशारा शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने दिया है।

