Tasleem Merchant Case: मुंब्रा 24 मई 2026 को राष्ट्रीय स्वाभिमान में प्रकाशित खबर के बाद मामले की गंभीरता और विभिन्न दावों की सत्यता को समझने के उद्देश्य से तसलीम मर्चेंट द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की कड़ियों की पड़ताल की गई। इसी क्रम में तसलीम मर्चेंट द्वारा मुंब्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर क्रमांक 0688/2026 के जांच अधिकारी (I.O.) विनायक शामराव माने से मुलाकात कर मामले के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली गई।
मुंब्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर क्रमांक 0688/2026 को लेकर सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में चल रही चर्चाओं के बीच मुंब्रा पुलिस ने मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि तसलीम मर्चेंट द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत तथा नदीम मर्चेंट उर्फ ‘नदीम चिकना’ की गिरफ्तारी, दोनों अलग-अलग कानूनी मामले हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
जांच अधिकारी विनायक शामराव माने के अनुसार, तसलीम मर्चेंट की शिकायत पर मुंब्रा पुलिस स्टेशन में एफआईआर क्रमांक 0688/2026 दर्ज की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 79, 351(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, मामले में नामजद सना मेमन को नियमानुसार नोटिस जारी किया जा चुका है तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ प्रिंट माध्यमों में तसलीम मर्चेंट द्वारा लगाए गए आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि जांच अभी जारी है। I.O. माने के अनुसार, किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले आरोपों को सिद्ध नहीं माना जा सकता और पुलिस को कानून व प्रक्रिया के दायरे में रहकर ही कार्य करना पड़ता है। इसी बीच, मुंब्रा पुलिस ने स्पष्ट किया कि नदीम मर्चेंट उर्फ ‘नदीम चिकना’ को एक अलग आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 69/2026 दर्ज है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 310(2), 311, 206(5), 304(1), 352 और 351 के तहत मामला दर्ज है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर 19 मई 2026 को मुंब्रा के दरगाह रोड क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए API तेजस सावंत और उनकी टीम ने नदीम मर्चेंट उर्फ ‘नदीम चिकना’ को हिरासत में लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां प्रारंभिक पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी दी गई। पूछताछ के उपरांत आरोपी को पुनः अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत (जेल कस्टडी) में भेज दिया गया। I.O. माने ने कहा कि यदि किसी आरोपी को किसी अन्य मामले में हिरासत में लिया जाता है, तो उससे जुड़े अन्य मामलों और शिकायतों पर भी पुलिस की नजर रहती है, लेकिन हर कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्य और अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही की जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के कार्य की एक विधिक सीमा होती है और जांच के दौरान नियमों का पालन अनिवार्य है। मुंब्रा पुलिस ने पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज कराने वाले सभी शिकायतकर्ताओं से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले सोशल मीडिया, समाचार अथवा अन्य प्रिंट मीडिया माध्यमों से ऐसी जानकारी प्रसारित न करें, जिससे जांच प्रक्रिया या पुलिस की छवि प्रभावित हो।
यदि किसी पक्ष को किसी प्रकार की शिकायत है, तो उसके लिए न्यायिक प्रक्रिया एवं कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से फरार आरोपी नदीम मर्चेंट उर्फ ‘नदीम चिकना’ की गिरफ्तारी को मुंब्रा पुलिस की एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा नागरिकों की शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टीम लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

