Sanitation Workers Issues: महाराष्ट्र राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष मुकेश सारवान ने चेतावनी दी है कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा और यदि समस्याओं के समाधान में ढिलाई बरती गई तो संबंधित अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार को मुकेश सारवान ने भिवंडी महानगरपालिका का दौरा कर सफाई कर्मचारियों की समस्याओं की समीक्षा की तथा मनपा आयुक्त अनमोल सागर के साथ विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर आयोजित समीक्षा बैठक में अतिरिक्त आयुक्त विठ्ठल डाके, नयना ससाणे, उपायुक्त विक्रम दराडे, सहायक आयुक्त शैलेश दोंदे तथा विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में महानगरपालिका के सफाई कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के साथ-साथ सामाजिक न्याय विभाग और नगर विकास विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। मुकेश सारवान ने स्थापना विभाग के अधिकारियों और आयुक्त से चर्चा करते हुए यह जानकारी ली कि सफाई कर्मचारियों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं को किस प्रकार लागू किया जा रहा है।
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उन्होंने ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रमसाफल्य योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन सफाई कर्मचारियों ने 25 वर्ष या उससे अधिक समय तक सेवा दी है, उन्हें मालिकाना हक के आधार पर निःशुल्क फ्लैट उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इस संबंध में उन्होंने मनपा प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई कर मामले का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए।
मुकेश सारवान ने 30 अप्रैल 2025 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दूषित नालों में काम करते समय जान गंवाने वाले, स्थायी रूप से दिव्यांग या विकलांग हुए मैनुअल स्कैवेंजर्स और सफाई कर्मचारियों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा 13 अक्टूबर 2024 के सरकारी आदेश के तहत लंबित अनुकंपा नियुक्ति और वारिस हक से जुड़े मामलों की जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया।
उन्होंने महानगरपालिका प्रशासन को निर्देश दिया कि सफाई कर्मचारियों के स्वीकृत, भरे गए और रिक्त पदों का विवरण तैयार किया जाए तथा कर्मचारियों के समग्र विकास के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए। बैठक के दौरान आयोग की ओर से दोहराया गया कि सफाई कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और यदि समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

