RPF’s Transfer Management Module: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल (टीएमएम) को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। फरवरी और मार्च 2026 में प्रस्तावित वार्षिक कार्यकाल (टेन्योर) स्थानांतरण जून माह की शुरुआत तक भी पूर्ण नहीं हो सके हैं जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार तबादलों में हो रही देरी के कारण कई कर्मचारियों के सामने आवास, परिवार और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है लेकिन स्थानांतरण आदेश लंबित होने के कारण अनेक कर्मचारी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि बच्चों का प्रवेश वर्तमान शहर में कराएँ या संभावित नई तैनाती वाले स्थान पर।
जानकारों का मानना है कि वर्तमान ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल की संरचना अर्धसैनिक बलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई प्रतीत होती है जबकि आरपीएफ की कार्यप्रणाली उनसे काफी अलग और अधिक जटिल है। सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल जैसे संगठनों में स्थानांतरण अक्सर इकाइयों या बटालियनों के स्तर पर होते हैं जबकि आरपीएफ को रेलवे नेटवर्क के विभिन्न जोन, मंडल, पोस्ट, चौकियों, एस्कॉर्टिंग ड्यूटी, अपराध नियंत्रण और खुफिया इकाइयों में मानव संसाधनों का प्रबंधन करना पड़ता है।
कर्मचारियों का कहना है कि आरपीएफ की विशिष्ट आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण प्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि तकनीकी व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब वह संगठन की वास्तविक कार्यप्रणाली के अनुरूप हो। लंबित तबादलों के कारण कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
कई परिवार अनिश्चितता की स्थिति में हैं और नए शैक्षणिक सत्र के बीच उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी से मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ रहे हैं। हालांकि स्थानांतरण में देरी के पीछे प्रशासनिक कारणों या तकनीकी चुनौतियों को लेकर रेलवे अथवा आरपीएफ प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ऐसे में यह स्पष्ट रूप से कहना संभव नहीं है कि देरी का कारण प्रशासनिक लापरवाही है या सिस्टम संबंधी जटिलताएँ। कर्मचारियों और उनके परिवारों ने संबंधित अधिकारियों से लंबित स्थानांतरण प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए व्यावहारिक और समयबद्ध व्यवस्था विकसित करने की मांग की है।

