Indian Textile Sector: भारतीय कपड़ा क्षेत्र के लिए ओमान के बाजार में निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बना!

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Indian Textile Sector: केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (भारत-ओमान सेपा) के प्रभावी होने से देश के टेक्सटाइल, कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए वहां शुल्क मुक्त प्रवेश मिलने लगा है जिससे वहां दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ी है।

मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्ष 2025–26 में ओमान को भारत का टेक्सटाइल, कपड़े और हस्तशिल्प का निर्यात 9.51 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर था जबकि ओमान हर साल कुल मिला कर लगभग 59.8 करोड अमेरिकी डॉलर के टेक्सटाइल और कपड़े का आयात करता है। अभी भारत ओमान के आयातित टेक्सटाइल्स एवं कपड़ा बाजार में लगभग 11 प्रतिशत स्थान रखता है और उसका तीसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल आपूर्तिकर्ता है।

मंत्रालय का कहना है कि ऐसे में सेपा एक्सपोर्ट को काफी बढ़ाने और बाज़ार में ज़्यादा हिस्सा पाने का एक साफ मौका देता है। भारतीय एक्सपोर्टर ओमान में कपड़ों, मेड-अप्स, कालीनों और कपड़ों जैसे अहम क्षेत्रों में में बढ़ती माँग का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। इन क्षेत्रों में खासकर मूल्यवान और डिज़ाइन- पर केंद्रित शामिल हैं।

सेपा के तहत ओमान ने भारत के साथ व्यापार में टेक्सटाइल और कपड़ों की सभी 945 प्रशुल्क श्रेणियों में तुरंत शुल्क मुक्त प्रवेश दे दिया है। इससे वहां भारतीय कपड़ा उत्पादों पर पांच प्रतिशत का शुल्क खत्म हो गया है जो ओमाना एमएफएन व्यवस्था व्यापार में सार्वाधिक वरीयता वाले देश की डब्ल्यूटी व्यवस्था) के तहत सभी देशों पर लगने वाले पांच प्रतिशत के शुल्क से छुटकारा मिल जाएगा। इससे वहां के बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत के आधार पर प्रतिस्पर्धा क्षमता काफी बढ़ गई है।

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इसके साथ ही हस्त शिल्प उत्पादों पर 5 प्रतिशत का एमएफएन शुल्क हटने से इन उत्पादों को वहां शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इस समझौते में ‘सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन’ (सी-ओ6ओ) का एक आधुनिक और पूरी तरह से डिजिटल फ्रेमवर्क शामिल है, जिससे दोनों देशों के बीच माल के उद्गम प्रमाण-पत्र का आसानी से इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन हो सकेगा, लेन-देन की लागत कम होती है, काम करने का तरीका बेहतर होगाऔर व्यापार का प्रवाह और भी आसान होगा है।

इस समझौते से बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में भी सहयोग को मज़बूत होगा । इसमें ‘भौगोलिक संकेत’ (जीआई) को मान्यता दी गयी है, जिससे उम्मीद है कि ओमान के बाज़ार में भारत के जीआई-टैग वाले हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की पहचान और बाज़ार में उनकी बिक्री की क्षमता बढ़ेगी, जिससे दुनिया भर में “ब्रांड इंडिया” को और बढ़ावा मिलेगा।

मंत्रालय का कहना है कि भारत-ओमान सेपा को के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने, सप्लाई-चेन के संबंधों के और गहरे होने तथा भारतीय निर्यातकों, कारीगरों और एमएसएमई के लिए नए मौके पैदा होने की उम्मीद है। यह समझौता ओमान को भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को तेज़ करने और दुनिया के बाज़ार में एक प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के तौर पर भारत की स्थिति को और मज़बूत करने के लिए तैयार है।

गत वर्ष 18 दिसंबर को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान सल्तनत के वाणिज्य, उद्योग और निवेश संवर्धन मंत्री क़ैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ़ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे राजधानी में इसी सप्ताह पहली जून को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में तत्काल प्रभाव से शुरू करने की घोषणा की। यह समझौता हस्ताक्षर के बाद छह माह में लागू हुआ है।

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