Halosulfuron Methyl Herbicide Import: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कृषि रसायनों के आयात और उपयोग से जुड़े मामलों में नियामकीय नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली स्थित कंपनी क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड (सीसीपीएल) को हर्बीसाइड हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल के आयात और निर्माण के लिए दिया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया। यह रसायन मुख्य रूप से गन्ना और मक्का जैसी फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। अदालत ने पाया कि संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों और तथ्यों की पर्याप्त जांच किए बिना कंपनी को पंजीकरण की अनुमति दे दी थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कृषि रसायनों जैसे संवेदनशील उत्पादों के मामले में नियमों की अनदेखी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि सीसीपीएल को वर्ष 2011 में सिंगापुर की कंपनी फर्टीएग्रो द्वारा निर्मित और आपूर्ति किए गए नमूनों के आयात की अनुमति मिली थी। इसके बाद वर्ष 2016 में कंपनी ने चीन की जियांग्सू एग्रोकेमिकल्स द्वारा निर्मित तथा हेबेई बेस्टार द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 98 प्रतिशत के आयात के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र का आवेदन किया। हालांकि अदालत ने पाया कि उस समय यह साबित करने वाला कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड मौजूद नहीं था कि जियांग्सू एग्रोकेमिकल्स को 2011 में इस उत्पाद के निर्माण की अनुमति प्राप्त थी।
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उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि जियांग्सू एग्रोकेमिकल्स को हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 98 प्रतिशत के निर्माण के लिए अस्थायी पंजीकरण अक्टूबर 2018 में प्राप्त हुआ था। इसके बावजूद पंजीकरण समिति ने पहले ही प्रमाणपत्र जारी कर दिया था। अदालत ने कहा कि कीटनाशक अधिनियम की धारा 9(3) के तहत जारी किया गया यह पंजीकरण स्पष्ट रूप से अवैध था। इस निर्णय के बाद सीसीपीएल अब न तो हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 98 प्रतिशत का आयात कर सकेगी और न ही हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 75 प्रतिशत डब्ल्यूजी का घरेलू स्तर पर निर्माण कर पाएगी।
अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में चेतावनी दी कि बिना पर्याप्त परीक्षण या अनधिकृत निर्माताओं से प्राप्त कीटनाशकों और कृषि रसायनों का आयात एवं उपयोग मानव स्वास्थ्य, पशु जीवन और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में नियामकीय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना बेहद आवश्यक है। यह फैसला धनुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया, जिसमें कंपनी की ओर से उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड शोभा राममूर्ति ने पक्ष रखा।

