World Environment Day: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वेदांता समूह ने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2021 की तुलना में उसके धातु कारोबार में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की तीव्रता में 15 प्रतिशत की कमी आई है। कंपनी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, बायोमास ईंधन और हरित तकनीकों के उपयोग से यह उपलब्धि हासिल की गई है।
वेदांता के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में उसके परिचालनों में नवीकरणीय ऊर्जा की खपत में साल-दर-साल 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई और यह लगभग 400 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई। इससे करीब 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली। कंपनी ने 365 किलो टन बायोमास ईंधन का भी उपयोग किया, जिससे अनुमानित 5 से 6 लाख टन अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।
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समूह ने बताया कि वित्त वर्ष 2021 में प्रति टन धातु उत्पादन पर कार्बन उत्सर्जन 6.45 टन था, जिसे घटाकर वित्त वर्ष 2026 में 5.44 टन कर दिया गया है। यह उपलब्धि वेदांता की चार-स्तरीय डीकार्बोनाइजेशन रणनीति के तहत हासिल हुई, जिसमें ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, स्वच्छ ईंधनों का उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और कार्बन ऑफसेटिंग उपाय शामिल हैं।
वेदांता पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वृक्षारोपण और पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दे रही है। कंपनी ने वर्ष 2021 से अब तक अपने परिचालन क्षेत्रों के आसपास लगभग 40 लाख पेड़ लगाए हैं। केवल वित्त वर्ष 2026 में ही करीब 10 लाख पौधे लगाए गए, जिससे खनन क्षेत्रों और औद्योगिक भूमि के पुनर्वास को बढ़ावा मिला है।
कंपनी ने कहा कि वह वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की ‘ट्रिलियन ट्रीज़’ पहल के तहत वर्ष 2030 तक 70 लाख पेड़ लगाने के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम कर रही है। वेदांता का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और व्यापक वृक्षारोपण जैसे कदम भविष्य में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

