Nagpur: मध्य रेलवे के नागपुर मंडल ने एक बार फिर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का परिचय दिया है। टिकट जांच कर्मचारियों की सतर्कता के कारण एक असहाय किशोर को संभावित खतरे से बचाकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
जानकारी के अनुसार, 6 जून 2026 को नागपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ड्यूटी के दौरान मुख्य टिकट परीक्षक (हेड टीई) प्रवीण लोंडसे को एक किशोर संदिग्ध परिस्थितियों में स्टेशन परिसर में घूमता हुआ दिखाई दिया। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम मोहम्मद आसिफ तथा पिता का नाम मोहम्मद याकूब बताया। उसने स्वयं को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का निवासी बताया।
किशोर ने रेलवे कर्मचारियों को बताया कि वह पिछले दो महीनों से रोजगार की तलाश में नागपुर में रह रहा था और उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उसकी स्थिति को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल उसे भोजन, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई।
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किशोर के पास उपलब्ध पारिवारिक संपर्क विवरण के आधार पर उसके परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। रेलवे कर्मचारियों ने उसके रिश्तेदारों से बातचीत कर उन्हें नागपुर पहुंचकर बच्चे को अपने संरक्षण में लेने का अनुरोध किया।
नियमों के तहत आगे की कार्रवाई के लिए किशोर को चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया है। उसके परिजनों को पूरी जानकारी देकर नागपुर बुलाया गया है। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने और किशोर के सुरक्षित रूप से परिवार से पुनर्मिलन तक उसकी देखभाल चाइल्ड केयर हेल्पलाइन की निगरानी में की जा रही है।
मुख्य टिकट परीक्षक प्रवीण लोंडसे की सतर्कता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना ने इस किशोर को संभावित खतरे से बचाने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नागपुर मंडल ने उनके इस सराहनीय मानवीय कार्य और जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए उन्हें बधाई दी है।

