Fish in Monsoon: मॉनसून के मौसम में अक्सर खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा को लेकर बहस होती है। सीफ़ूड भी उनमें से एक है। माना जाता है कि इस दौरान सीफ़ूड खाने से बैक्टीरिया के पनपने और पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। सही खान-पान चुनने में आपकी मदद के लिए, एक न्यूट्रिशनिस्ट बारिश के मौसम में मछली खाने से जुड़े छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में बता रही हैं और इसे खरीदने व पकाने के लिए सुरक्षा टिप्स भी दे रही हैं।
क्या बारिश के महीनों में मछली खाना सुरक्षित है?
सुश्री राज कहती हैं कि मॉनसून के मौसम में मछली खाना आम तौर पर सुरक्षित है, बशर्ते वह ताज़ी हो, उसे सही तरीके से रखा गया हो और अच्छी तरह पकाया गया हो। वह आगे कहती हैं कि मॉनसून के मौसम में भी मछली हाई-क्वालिटी प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन और मिनरल का एक पौष्टिक स्रोत बनी रहती है।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, ऑयली मछली में लॉन्ग-चेन ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। यह दिल की बीमारी से बचाव में मदद कर सकता है। यह गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह बच्चे के नर्वस सिस्टम के विकास में मदद कर सकता है।
एक्सपर्ट आगे कहती हैं, “हालांकि, अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत है क्योंकि बारिश के मौसम में ज़्यादा नमी और स्टोरेज की स्थितियों में उतार-चढ़ाव के कारण दूषित होने, खराब होने और बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ इलाकों में मॉनसून के दौरान मछली पकड़ने का काम भी कम हो सकता है क्योंकि यह कई मछली प्रजातियों के प्रजनन का मौसम होता है, जिससे बाज़ार में सीफ़ूड की उपलब्धता और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।”
खराब मछली खाने के जोखिम
सुश्री राज कहती हैं कि खराब या ठीक से न पकाई गई मछली खाने से ये समस्याएं हो सकती हैं:
- फ़ूड पॉइज़निंग
- पेट का इन्फेक्शन
- दस्त (डायरिया)
- उल्टी
- पाचन से जुड़ी अन्य समस्याएं
- फ़ूड पॉइज़निंग
- पेट का इन्फेक्शन
- दस्त (डायरिया)
- उल्टी
- पाचन से जुड़ी अन्य समस्याएं
किन्हें ज़्यादा खतरा है? इस सवाल का जवाब देते हुए एक्सपर्ट कहती हैं, “कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इस दौरान सीफ़ूड खाते समय खास सावधानी बरतनी चाहिए। भरोसेमंद विक्रेताओं से मछली चुनना और सही स्टोरेज सुनिश्चित करना स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए ज़रूरी कदम हैं।”
मॉनसून में मछली खाने के लिए सुरक्षा टिप्स
मॉनसून के दौरान सीफ़ूड का मज़ा लेते हुए सुरक्षित रहने के लिए, सुश्री राज इन बातों का पालन करने का सुझाव देती हैं:
- मछली सिर्फ़ भरोसेमंद विक्रेताओं से खरीदें जो साफ़-सफ़ाई और सही रेफ्रिजरेशन का ध्यान रखते हों। ताज़ी मछली में हल्की गंध, साफ़ आंखें, सख्त मांस और चमकीले गलफड़े (gills) होने चाहिए।
- ऐसी मछली न लें जिसमें तेज़ बदबू हो, जो चिपचिपी हो या जिसका रंग बदला हुआ हो। खरीदने के बाद, मछली को फ्रिज में रखें और जितनी जल्दी हो सके उसे पका लें।
- कच्ची मछली को छूने के बाद अपने हाथों, बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह धो लें ताकि क्रॉस-कंटैमिनेशन (एक चीज़ से दूसरी चीज़ में कीटाणु फैलना) से बचा जा सके।
- मछली को अच्छी तरह पकाना भी ज़रूरी है, क्योंकि ठीक से पकाने से हानिकारक बैक्टीरिया, पैरासाइट और दूसरे सूक्ष्मजीव मर जाते हैं।
- मानसून के दौरान कच्चा या अधपका सीफ़ूड (समुद्री भोजन) खाने से बचें, जिसमें बिना पकी मछली वाली डिशेज़ भी शामिल हैं।
निष्कर्ष
सबसे ज़रूरी बात है ताज़गी, साफ़-सफ़ाई, सही तरीके से स्टोर करना और अच्छी तरह पकाना। भरोसेमंद जगहों से सीफ़ूड खरीदकर, उसे सही ढंग से स्टोर करके और सुरक्षित तरीके से खाना संभालकर, ज़्यादातर लोग बारिश के मौसम में भी सुरक्षित रूप से मछली का मज़ा ले सकते हैं। अगर मछली की ताज़गी या क्वालिटी को लेकर कोई शक हो, तो उसे न खाना ही बेहतर है, क्योंकि जोखिम लेने के बजाय खाने से होने वाली बीमारी से बचना हमेशा ज़्यादा सुरक्षित होता है।

