Mumbra’s Shil Phata Submerged: मुंब्रा का सील फाटा क्षेत्र एक बार फिर जलभराव की गंभीर समस्या से जूझता नजर आया। हैरानी की बात यह है कि न तो मूसलाधार बारिश हुई और न ही कोई तूफानी मौसम था। जून के अंतिम दिन शुरू हुई साधारण बारिश ने ही पूरे इलाके की व्यवस्था की पोल खोल दी। देखते ही देखते सड़कों पर पानी भर गया, यातायात पूरी तरह ठप हो गया और लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं था। नालों में पानी की निकासी नहीं हो रही थी और सड़क किनारे बने ड्रेनेज सिस्टम भी पूरी तरह विफल साबित हुए। कई स्थानों पर जब नालों के ढक्कन हटाए गए, तब कहीं जाकर पानी का बहाव शुरू हुआ। तब तक पानी दुकानों, मकानों और वाहनों में घुस चुका था, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर वर्ष मानसून से पहले करोड़ों रुपये नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर खर्च किए जाते हैं, फिर भी पहली ही सामान्य बारिश में पूरा इलाका पानी-पानी कैसे हो गया? यदि इतनी मामूली बारिश में यह हाल है, तो आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश के दौरान स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बारिश से पहले जलनिकासी की समुचित योजना बनाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। यही वजह है कि हर साल लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है।
अब नागरिकों की मांग है कि मनपा इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले, जलनिकासी व्यवस्था का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण करे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि हर मानसून में जनता को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

