15 जुलाई 2026 को होने वाली सुनवाई सच बनाम भष्टाचार की लड़ाई की है
मुंबई | प्रतिनिधि
घाटकोपर स्थित आदित्य को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड के पुनर्विकास विवाद में अब सभी की निगाहें म्हाडा के डिप्टी रजिस्ट्रार अभिजीत देशपांडे के निर्णय पर टिकी हैं। सोसायटी के कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्होंने सुनवाई के दौरान पुनर्विकास प्रक्रिया से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत कर दिए हैं, ताकि वैध डेवलपर का चयन हो सके और प्रत्येक सदस्य को उसका कानूनी अधिकार प्राप्त हो।
15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित सुनवाई को लेकर रहिवासियों में बड़ी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि यह सुनवाई उनके लिए सच्चाई और कथित भ्रष्टाचार के बीच की लड़ाई है। रहिवासियों का दावा है कि यदि निर्णय प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष रूप से लिया गया, तो उन्हें न्याय मिलेगा। वहीं उनका आरोप है कि यदि अनियमितताओं या भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला, तो उनके हित प्रभावित हो सकते हैं।
MHADA to Decide Aditya Society Redevelopment Dispute
सोसायटी के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया है कि निर्वाणा डेवलपर्स के मालिक वर्धमान संघवी कथित रूप से कुछ विवादित एवं अवैध सदस्यों के माध्यम से पुनर्विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिससे पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। उनका दावा है कि यदि पुनर्विकास नियमानुसार नहीं हुआ तो कई परिवारों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

सदस्यों के प्रतिनिधियों का कहना है कि डिप्टी रजिस्ट्रार के समक्ष हुई दो सुनवाई के दौरान बिल्डर पक्ष अपनी वैधता और संबंधित दस्तावेजों को संतोषजनक ढंग से प्रस्तुत नहीं कर सका। ऐसे में अब अंतिम निर्णय को लेकर सदस्यों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
सदस्यों ने लगाए ये प्रमुख आरोप
सोसायटी के कुछ सदस्यों के अनुसार वर्ष 2021 से सदस्यता, मतदाता सूची, प्रबंध समिति की वैधता और पुनर्विकास प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें की जाती रही हैं। उनका आरोप है कि—
- सदस्य रजिस्टर, ‘आई’ रजिस्टर, ‘जे’ रजिस्टर और शेयर प्रमाणपत्रों की समय पर जांच नहीं हुई।
- वैध सोसाइटी मतदाता सूची को लेकर विवाद लंबे समय तक बना रहा।
- समिति की वैधता का मुद्दा वर्षों तक लंबित रहा।
- पुनर्विकास प्रक्रिया की वैधानिकता पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया।
- शिकायतों और आपत्तियों का समयबद्ध निस्तारण नहीं हुआ।
- न्यायालय के निर्देशों और म्हाडा के नियमों के पालन में विलंब हुआ।
- आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने के लिए सदस्यों को लगातार पत्राचार करना पड़ा।
आपराधिक मामले के बाद भी उठे सवाल
सदस्यों का कहना है कि पंतनगर पुलिस थाने में आपराधिक मामला दर्ज होने और न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद कई प्रशासनिक मुद्दों पर समय पर निर्णय नहीं लिया गया। उनका सवाल है कि यदि जांच और कार्रवाई समय पर होती तो क्या यह विवाद इतना गंभीर रूप लेता।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
सोसायटी के कुछ सदस्यों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं में पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

