भिवंडी। शहर के भंडारी कंपाउंड स्थित गंगारामवाड़ी इलाके में गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसे में चार मंजिला जर्जर कोहिनूर अपार्टमेंट के बी-विंग का हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे में मलबे में दबने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोगों को जिंदा बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते एनडीआरएफ, टीडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और भिवंडी मनपा की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी रहीं। हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

Kohinoor Building Collapse
भिवंडी मनपा प्रभाग समिति-4 के सहायक आयुक्त अरविंद घुंघरे के अनुसार, सर्वे नंबर 1557/0 पर स्थित चार मंजिला कोहिनूर अपार्टमेंट का निर्माण वर्ष 2007 में हुआ था। गुरुवार रात करीब 11.20 बजे इमारत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद एनडीआरएफ और टीडीआरएफ की टीमें भारी मशीनरी, पोकलेन, जेसीबी और गैस कटर के साथ राहत कार्य में जुटीं। सरियों को गैस कटर से काटकर मलबा हटाया गया और पूरी रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान चार लोगों को घायल अवस्था में मलबे से जिंदा निकालकर आईजीए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं मलबे से अब तक 10 शव निकाले जा चुके हैं। मृतकों की पहचान शमीम शेख (32), रणजीत सिंह (45), मिराज रसूल शेख (34), संतोष कुमार पांडे (42), शमीम अंसारी (30), राकेश कुमार पासवान (28), अशोक पासवान (43) और मुकेश पासवान (20) के रूप में हुई है। दो मृतकों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। राकेश, अशोक और मुकेश पासवान तीनों भाई बताए जा रहे हैं और इमारत में मरम्मत का काम कर रहे थे।
एनडीआरएफ के अनुसार, इमारत की पहली मंजिल पर रहने वाले कुछ लोगों तथा मरम्मत कार्य में लगे मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका थी। जिला प्रशासन और आपातकालीन टीमों की प्राथमिकता मलबे को हटाकर सभी संभावित लोगों की तलाश करना रही।
मनपा ने पहले ही घोषित कर रखा था जर्जर
भिवंडी मनपा के उपायुक्त विक्रम दराडे ने बताया कि मनपा प्रशासन ने कोहिनूर अपार्टमेंट को पहले ही धोखादायक घोषित कर नोटिस जारी किए थे। उनके अनुसार, 7 सितंबर 2020 को पहली नोटिस जारी कर इमारत को खतरनाक बताया गया था। इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को दूसरी नोटिस देकर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अंततः 5 जून 2026 को मनपा ने इमारत को तोड़ने की नोटिस जारी की और इमारत को खाली भी करा लिया गया था। हालांकि तोड़क कार्रवाई पूरी होने से पहले ही गुरुवार रात इमारत का हिस्सा ढह गया।
हादसे से ठीक पहले इमारत में कुछ आवाजें और सुगबुगाहट सुनाई देने की बात सामने आई है। खतरे का अंदेशा होते ही अधिकांश लोग समय रहते बाहर निकल गए, जिससे संभावित रूप से बड़ा जनहानि टल गई।
रात के अंधेरे में चल रहा था मरम्मत का काम
स्थानीय विधायक महेश चौघुले के अनुसार, इमारत को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था और मनपा की ओर से कई बार नोटिस भी दिए गए थे। अधिकांश परिवारों को इमारत से बाहर निकाल दिया गया था। हादसे के समय कुछ मजदूर और अन्य लोग सामान निकालने या मरम्मत कार्य के सिलसिले में इमारत के अंदर मौजूद थे।
विधायक के मुताबिक, मरम्मत के दौरान एक साथ तीन पिलरों पर काम किए जाने के कारण पिलरों में क्रैक आया और इमारत का संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद बी-विंग का हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद आपदा व्यवस्थापन मंत्री गिरीश महाजन, जिलाधिकारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल, सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा, विधायक महेश चौघुले, मनपा महापौर नारायण चौधरी, अतिरिक्त आयुक्त विठ्ठल डाके सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की।
प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद घटनास्थल को सुरक्षा घेरे में लेकर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन अब हादसे के कारणों और मरम्मत कार्य के दौरान अपनाए गए सुरक्षा मानकों की जांच में जुटा है।

