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  • AI Investment Plan: मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: AI में 10 लाख करोड़ का करेंगे निवेश

    AI Investment Plan: मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: AI में 10 लाख करोड़ का करेंगे निवेश

    Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए अगले सात वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का ऐलान किया है। उनका लक्ष्य साफ है—जिस तरह Jio Platforms ने इंटरनेट को हर हाथ तक पहुंचाया, उसी तरह अब AI को हर भारतीय के लिए सस्ता और सुलभ बनाया जाएगा।


    AI Investment Plan के लिए विदेशी निर्भरता खत्म करने पर जोर

    अंबानी ने कहा कि भारत को अपनी तकनीकी जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा है। उन्होंने इसे “इंटेलिजेंस को किराये पर लेना” बताया और स्पष्ट किया कि देश को अपना सुरक्षित और स्वदेशी AI इकोसिस्टम विकसित करना होगा।

    उनके अनुसार, जियो ने देश को डेटा क्रांति से जोड़ा था, और अब रिलायंस भारत को “एज ऑफ इंटेलिजेंस” में ले जाने की तैयारी कर चुका है।


    रिलायंस के AI मिशन के 3 प्रमुख आधार

    1. जामनगर में अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर
    जामनगर में विश्वस्तरीय एआई डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जो 10 गीगावाट ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे। इससे तकनीक और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रहेगा।

    2. जियो नेटवर्क के जरिए लो-लेटेंसी AI सेवाएं
    देशभर में फैले जियो के टेलीकॉम नेटवर्क का उपयोग कर ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे बिना रुकावट (लो-लेटेंसी) के AI सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    3. गांव-गांव तक AI की पहुंच
    रिलायंस एक सुरक्षित और व्यापक सिस्टम विकसित करेगा, जिसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। यह तकनीक गांवों के खेतों, छोटे स्कूलों, मोहल्ले के क्लीनिकों और किराना दुकानों तक पहुंचेगी।


    राष्ट्र निर्माण की दिशा में कदम

    मुकेश अंबानी ने स्पष्ट किया कि यह निवेश केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका मानना है कि जियो भारत के AI ट्रांसफॉर्मेशन की धुरी बनेगी और इससे सरकारी सेवाओं, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आएगा।

    यह पहल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • BJP के विष्णु प्रसाद शर्मा टीएमसी(All India Trinamool Congress) में शामिल, बंगाल चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

    BJP के विष्णु प्रसाद शर्मा टीएमसी(All India Trinamool Congress) में शामिल, बंगाल चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को झटका देते हुए उत्तर बंगाल के कर्सियोंग से विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ने पार्टी छोड़कर All India Trinamool Congress (टीएमसी) का दामन थाम लिया है। इस बात की जानकारी टीएमसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए साझा की गई।

    ममता बनर्जी के नेतृत्व पर जताया भरोसा

    टीएमसी ने अपने बयान में कहा कि शर्मा का मानना है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही बंगाल का समावेशी विकास संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह अब ममता बनर्जी की अगुवाई में राज्य की जनता की सेवा करेंगे। पार्टी ने उनका “तहे दिल से स्वागत” करते हुए कहा कि उनके शामिल होने से संगठन की ताकत बढ़ेगी और जनहित के कार्यों को गति मिलेगी।

    पहले भी जताया था असंतोष

    गौरतलब है कि शर्मा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से बगावत कर दी थी। उन्होंने दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का समर्थन करते हुए कहा था कि दार्जिलिंग पहाड़ियों के विकास और विशेष ध्यान की आवश्यकता है।

    शर्मा ने कई बार सार्वजनिक रूप से भाजपा नेतृत्व पर क्षेत्रीय मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि पार्टी ने आश्वासन तो दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर वादे पूरे नहीं किए।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने दावा किया कि शर्मा का अपने निर्वाचन क्षेत्र में कोई खास जनाधार नहीं है और वह लंबे समय से पार्टी के संपर्क में भी नहीं थे। भाजपा ने इस घटनाक्रम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है।

    चुनावी समीकरण पर असर?

    पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है। चुनाव की घोषणा मार्च के दूसरे या तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है, जबकि अप्रैल में सभी सीटों पर मतदान कराया जा सकता है। ऐसे में चुनाव से पहले भाजपा विधायक का टीएमसी में शामिल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    टीएमसी ने यह भी बताया कि ब्रात्य बसु और डॉ शशि पांजा की मौजूदगी में शर्मा ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी साझा किया गया है।

    बंगाल की सियासत में यह दलबदल आगामी चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। अब देखना होगा कि इस कदम का उत्तर बंगाल और दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • Jharkhand: जया प्रदा का मेदिनीनगर में रोड शो, चुनावी सरगर्मी तेज

    Jharkhand: जया प्रदा का मेदिनीनगर में रोड शो, चुनावी सरगर्मी तेज

    Jhankhand News: मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, शहर की सियासी फिजा गर्म होती जा रही है। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर संभव रणनीति अपना रहे हैं। इसी क्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व सांसद जया प्रदा 21 फरवरी को मेदिनीनगर पहुंचकर रोड शो करेंगी, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

    भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन

    जया प्रदा (Jaya Prada) भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी अरुणा शंकर के समर्थन में शहर की सड़कों पर रोड शो करेंगी। उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। स्थानीय स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं और इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि स्टार प्रचारक की मौजूदगी से मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और चुनावी माहौल में नया जोश पैदा होगा।

    विकास और शांति पर फोकस

    अरुणा शंकर इस बार पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरी हैं। वह अपने पूर्व मेयर कार्यकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों को प्रमुखता से जनता के सामने रख रही हैं। उनका मुख्य चुनावी एजेंडा शहर में शांति, सुव्यवस्था और सतत विकास को बनाए रखना है। समर्थकों का दावा है कि उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुईं, जिनसे आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।

    क्या साबित होगा गेम चेंजर?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जया प्रदा का रोड शो भाजपा के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकता है। स्टार प्रचारक के रूप में उनकी लोकप्रियता चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। इससे विरोधी दलों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ेगा और मुकाबला और अधिक कड़ा होने की संभावना है।

    मतदाता अब भी खामोश

    हालांकि चुनावी तापमान बढ़ चुका है, लेकिन मतदाता फिलहाल अपनी राय खुलकर जाहिर नहीं कर रहे हैं। लोकतंत्र में गुप्त मतदान के अधिकार के कारण जनता चुप्पी साधे हुए है। माना जा रहा है कि असली तस्वीर मतदान के दिन ही सामने आएगी।

    अब सबकी निगाहें 21 फरवरी को होने वाले रोड शो पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस शक्ति प्रदर्शन का मेदिनीनगर की चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

  • UP Election: लखनऊ में संघ-सरकार मंथन, 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू

    UP Election: लखनऊ में संघ-सरकार मंथन, 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू

    हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग पर संघ-सीएम की अहम बातचीत

    लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में बुधवार शाम हुई बैठक ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे 2027 (UP Election) के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

    2027 के चुनाव का रोडमैप?

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में हिंदुत्व के एजेंडे को और सशक्त करने तथा विपक्ष के ‘पीडीए’ कार्ड का जवाब तैयार करने पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच समन्वय बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई।

    मुख्यमंत्री योगी पहले ही काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक-आध्यात्मिक केंद्रों का उल्लेख कर चुके हैं। अब इन मुद्दों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संघ के सहयोग की रणनीति पर विचार हुआ। हाल ही में मोहन भागवत का “हम सब हिंदू हैं” बयान भी सामाजिक समरसता और जातिगत विभाजनों को कम करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

    संगठन की बड़ी भूमिका

    सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में संघ के लगभग दो लाख कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका देने की योजना पर चर्चा हुई। इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधा संपर्क स्थापित कर जनाधार मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    बैठक में अवैध घुसपैठ, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई, ‘घर वापसी’ और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बताया जा रहा है कि कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्न पर दोनों नेताओं की सोच में सामंजस्य दिखाई दिया।

    सरकार-संगठन समन्वय पर जोर

    बैठक के दौरान सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के जरिए मुख्यमंत्री योगी के एजेंडे को जमीनी स्तर पर और मजबूती दी जा सकती है।

    हालांकि, इस बैठक को लेकर आधिकारिक बयान सीमित हैं, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।

  • Shivaji Maharaj Jayanti: शिवनेरी किला पर शिवजयंती के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति, बड़ा हादसा टला

    Shivaji Maharaj Jayanti: शिवनेरी किला पर शिवजयंती के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति, बड़ा हादसा टला

    छत्रपति शिवाजी महाराज ( shivaji Maharaj Jayanti) के जन्मस्थान शिवनेरी किले पर शिवजयंती के पावन अवसर पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भारी जनसैलाब और संकरे रास्तों के कारण किला परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हो गए। प्रशासन की ढीली व्यवस्थाओं और पर्याप्त पुलिस बल की कमी को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर तालुका में स्थित इस ऐतिहासिक किले पर इस वर्ष शिवजयंती के मौके पर राज्य के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में शिवभक्त पहुंचे थे। रात से ही शिवज्योत लेकर आए युवा, विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और दर्शनार्थी किले में एकत्र होने लगे थे। सुबह होते-होते किला परिसर खचाखच भर गया और आवाजाही अनियंत्रित होने लगी।

    संकरे रास्ते बने मुख्य कारण

    हादसे की मुख्य वजह किले के तंग और घुमावदार रास्ते रहे। अंबरखाना के नीचे स्थित हाथी दरवाजा क्षेत्र और गणेश दरवाजा जैसे संकरे मार्गों पर अचानक भीड़ का अत्यधिक दबाव बन गया। पहले से सीमित चौड़ाई वाले इन रास्तों पर जब एक साथ बड़ी संख्या में लोग आगे बढ़ने लगे तो हालात बेकाबू हो गए और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।

    महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

    धक्का-मुक्की के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और छोटे बच्चों को झेलनी पड़ी। अफरा-तफरी में कुछ महिलाएं और बच्चे नीचे गिर पड़े, जिससे कई लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल जुन्नर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल

    इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था। भीड़ प्रबंधन के लिए स्पष्ट एंट्री-एग्जिट प्लान, बैरिकेडिंग और चरणबद्ध प्रवेश व्यवस्था का अभाव साफ दिखाई दिया।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष शिवजयंती पर भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद इस बार भीड़ नियंत्रण के लिए ठोस और प्रभावी योजना नहीं बनाई गई। अब मांग उठ रही है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए अग्रिम पंजीकरण, सीमित प्रवेश, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन चिकित्सा दल की स्थायी तैनाती जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि आस्था के इस महापर्व पर किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो।

  • Air New Zealand: बिना शोर और धुएं की उड़ान: एयर न्यूजीलैंड ने किया ऑल-इलेक्ट्रिक विमान का सफल परीक्षण

    Air New Zealand: बिना शोर और धुएं की उड़ान: एयर न्यूजीलैंड ने किया ऑल-इलेक्ट्रिक विमान का सफल परीक्षण

    कल्पना कीजिए कि आप बादलों के ऊपर सफर कर रहे हैं, लेकिन न इंजन का तेज शोर है और न ही धुआं। यह अब सपना नहीं रहा। Air New Zealand ने अपने ‘मिशन नेक्स्ट जेनरेशन एयरक्राफ्ट’ के तहत पहले ऑल-इलेक्ट्रिक विमान की सफल टेस्टिंग पूरी कर ली है।

    यह पहल विमानन क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति मानी जा रही है, जो भविष्य में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम कर सकती है।


    अमेरिका–न्यूजीलैंड की साझेदारी

    ग्रीन एयर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए एयर न्यूजीलैंड ने अमेरिकी कंपनी BETA Technologies के साथ साझेदारी की है।

    इस समझौते के तहत ‘ALIA’ नाम के इलेक्ट्रिक विमान को चुना गया है। यह विमान eVTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग) तकनीक पर आधारित है, यानी यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधा ऊपर उठ सकता है और उतर सकता है।

    टेस्टिंग के दौरान इस विमान ने न्यूजीलैंड के पहाड़ी इलाकों और समुद्र के ऊपर उड़ान भरते हुए एक बार चार्ज होने पर 480 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की। छोटे रूटों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


    क्यों खास है ALIA?

    • यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है और उड़ान के दौरान कार्बन उत्सर्जन नहीं करता।
    • इसका शोर बेहद कम है—घरेलू वैक्यूम क्लीनर या मिक्सी से भी कम।
    • खराब मौसम और तेज हवाओं में भी इसने 2000 फीट की ऊंचाई पर सफल उड़ान भरी।
    • इसकी ताकत पारंपरिक टर्बोप्रॉप इंजनों के बराबर मानी जा रही है।

    2050 नेट-जीरो लक्ष्य की ओर कदम

    न्यूजीलैंड सरकार ने 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। एयर न्यूजीलैंड का यह कदम न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा, बल्कि दुनिया को यह संदेश देगा कि बिजली से हवाई सफर अब हकीकत बनने की राह पर है।

    अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले समय में आसमान में उड़ते विमान शोर और धुएं से मुक्त नजर आ सकते हैं।

  • Vijay Mallya Case:भारत वापसी पर असमर्थ विजय माल्या, बॉम्बे हाई कोर्ट में बताया कारण

    Vijay Mallya Case:भारत वापसी पर असमर्थ विजय माल्या, बॉम्बे हाई कोर्ट में बताया कारण

    भगोड़े कारोबारी Vijay Mallya ने भारत लौटने को लेकर असमर्थता जताई है। बुधवार को Bombay High Court में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि वह यह नहीं बता सकते कि वह भारत कब लौट पाएंगे।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ कर रही है। पिछली सुनवाई में अदालत ने माल्या से पूछा था कि क्या उनका भारत लौटने का इरादा है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उनकी अनुपस्थिति में याचिकाओं पर सुनवाई करना मुश्किल होगा।

    माल्या ने क्या कहा?

    माल्या की ओर से वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने अदालत में उनका बयान पढ़ा। बयान में कहा गया कि उनका भारतीय पासपोर्ट 2016 में रद्द कर दिया गया था। साथ ही, यूनाइटेड किंगडम की अदालतों के आदेशों के कारण वह ब्रिटेन से बाहर यात्रा नहीं कर सकते।

    दलील दी गई कि उन्हें किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने या उसे रखने की अनुमति नहीं है। ऐसे में वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि भारत कब लौट सकेंगे।

    माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं।

    किन याचिकाओं पर चल रही है सुनवाई?

    माल्या ने हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं—

    1. उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती।
    2. भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती।

    बचाव पक्ष का कहना है कि आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए उनका भारत में मौजूद होना जरूरी नहीं है।

    क्या हैं आरोप?

    70 वर्षीय माल्या पर बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी में चूक और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। जनवरी 2019 में एक विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।

    हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को माल्या के बयान पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले महीने होगी।

  • ICC Men’s T20 World Cup: भारत ने नीदरलैंड को 17 रन से हराया, लगातार चौथी जीत

    ICC Men’s T20 World Cup: भारत ने नीदरलैंड को 17 रन से हराया, लगातार चौथी जीत

    अहमदाबाद में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप (ICC Men’s T20 World Cup) 2026 के 36वें मुकाबले में भारतीय टीम ने नीदरलैंड को 17 रन से हराकर टूर्नामेंट में अपनी लगातार चौथी जीत दर्ज की। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 193 रन बनाए। जवाब में नीदरलैंड की टीम निर्धारित 20 ओवर में 176 रन ही बना सकी।

    भारत की पारी: दुबे की तूफानी अर्धशतकीय पारी

    टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत निराशाजनक रही। अभिषेक शर्मा लगातार तीसरे मैच में बिना खाता खोले आउट हो गए। हालांकि इसके बाद ईशान किशन ने आक्रामक अंदाज में 7 गेंदों पर 18 रन बनाकर रनगति तेज की, लेकिन वे भी बड़ी पारी नहीं खेल सके।

    bit.ly/INDvNED-T20-WorldCup-2026

    तिलक वर्मा ने 27 गेंदों में 31 रन की संयमित पारी खेलकर मध्यक्रम को संभाला। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 28 गेंदों पर 34 रन बनाकर पारी को स्थिरता दी।

    मुकाबले का रुख उस समय बदला जब शिवम दुबे क्रीज पर आए। उन्होंने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए महज 31 गेंदों में 66 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 4 चौके और 6 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। हार्दिक पांड्या ने भी 21 गेंदों में 30 रन का योगदान दिया। रिंकू सिंह 6 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 193/5 का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

    नीदरलैंड की ओर से लोगन वैन बीक ने 3 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि आर्यन दत्त को 2 सफलता मिली।

    नीदरलैंड की पारी: संघर्ष के बावजूद लक्ष्य से दूर

    194 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड की टीम ने शुरुआत संभलकर की, लेकिन नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से वे दबाव में आ गए। भारतीय गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में सटीक लाइन-लेंथ के साथ रन गति पर लगाम कसी।

    मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने साझेदारी की कोशिश की, लेकिन रन रेट बढ़ने के साथ जोखिम उठाने पड़े और विकेट गिरते रहे। अंतिम ओवरों में तेज रन बटोरने की कोशिश के बावजूद टीम 20 ओवर में 176 रन तक ही पहुंच सकी।

    प्लेइंग इलेवन में बदलाव

    इस मुकाबले में भारतीय टीम मैनेजमेंट ने दो बदलाव किए। अक्षर पटेल और कुलदीप यादव की जगह वॉशिंगटन सुंदर और अर्शदीप सिंह को मौका दिया गया। वहीं, नीदरलैंड ने भी एक बदलाव करते हुए नोह क्रोस को अंतिम एकादश में शामिल किया।

    मैच का नतीजा और महत्व

    इस जीत के साथ भारत ने अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। लगातार चार जीत दर्ज कर टीम ने सेमीफाइनल की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। दूसरी ओर, नीदरलैंड को इस हार के बाद आगे के मुकाबलों में जीत की सख्त जरूरत होगी।

    शिवम दुबे की तूफानी पारी इस मैच का सबसे बड़ा आकर्षण रही, जिसने भारत को 190 के पार पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

  • Wildlife Case: मशहूर लोगों को वन्यजीवों से खेलने की छूट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

    Wildlife Case: मशहूर लोगों को वन्यजीवों से खेलने की छूट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूट्यूबर Elvish Yadav के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि लोकप्रिय व्यक्तियों को “बेजुबान पीड़ित” जैसे सांपों का मनोरंजन के लिए उपयोग करने की अनुमति दी जाती है, तो इससे समाज में “बहुत गलत संदेश” जाएगा।

    मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

    क्या कहा अदालत ने?

    न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने नोएडा में कथित रेव पार्टी में सांप के जहर के उपयोग से जुड़े मामले में दाखिल आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया:

    “क्या लोकप्रिय लोग मनोरंजन के लिए वन्यजीवों(Wildlife) के साथ इस प्रकार का व्यवहार कर सकते हैं? यदि उन्हें ऐसा करने दिया गया तो समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा… क्या आप चिड़ियाघर जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं? आप यह नहीं कह सकते कि आप जो चाहें करेंगे।”

    अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका मुख्य सरोकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत से है।

    क्या है मामला?

    एल्विश यादव के खिलाफ नवंबर 2023 में मामला(Case) दर्ज हुआ था और 17 मार्च 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन के अनुसार पुलिस ने नौ सांप, जिनमें पांच कोबरा शामिल थे, बरामद किए थे। आरोप है कि कथित रेव पार्टियों में सांप के जहर का नशीले पदार्थ की तरह उपयोग किया जाता था।

    आरोपपत्र में दावा किया गया कि ऐसी पार्टियों में विदेशी नागरिकों सहित कई लोग कथित तौर पर सांप के जहर का सेवन करते थे।

    बचाव पक्ष की दलील

    यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्‍ता गुप्ता ने दलील दी कि वे केवल गायक के एक वीडियो में अतिथि के रूप में शामिल हुए थे और किसी रेव पार्टी या प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि यादव कथित स्थल पर मौजूद नहीं थे, न ही उनके पास से कोई सांप या नशीला पदार्थ बरामद हुआ।

    आगे क्या?

    सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2024 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। अब शीर्ष अदालत मामले में दर्ज शिकायत की जांच करेगी और अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

  • Chhattisgarh High Court का विवादित फैसला: ‘योनि पर वीर्यपात बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता’

    Chhattisgarh High Court का विवादित फैसला: ‘योनि पर वीर्यपात बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता’

    बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि केवल योनि के बाहरी हिस्से पर वीर्यपात करना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत ‘बलात्कार’ की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बलात्कार की कानूनी परिभाषा में ‘संभोग’ या ‘प्रवेश’ (penetration) का तत्व आवश्यक है।

    अदालत की प्रमुख टिप्पणी

    न्यायालय ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष ‘प्रवेश’ साबित नहीं कर पाता, तो इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी हरकत अन्य धाराओं के तहत दंडनीय हो सकती है, जिनमें यौन उत्पीड़न या महिला की मर्यादा भंग करने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।

    क्या था मामला?

    मामला एक आपराधिक अपील से जुड़ा था, जिसमें निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने साक्ष्यों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर पाया कि ‘प्रवेश’ का स्पष्ट प्रमाण नहीं है, इसलिए बलात्कार का आरोप टिक नहीं सकता।

    हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि आरोपित का आचरण आपत्तिजनक और दंडनीय है तथा संबंधित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    यह फैसला कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और ‘बलात्कार’ की परिभाषा को लेकर बहस छिड़ गई है।