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  • Book Review: ग्रामीण जीवन का यथार्थ रचती कहानियाँ- अंजलि भर उजास की पुस्तक समीक्षा

    Book Review: ग्रामीण जीवन का यथार्थ रचती कहानियाँ- अंजलि भर उजास की पुस्तक समीक्षा

    • पुस्तक का नाम- अंजलि भर उजास
    • लेखक का नाम- माधव नागदा
    • पुस्तक की विधा- कहानी संग्रह
    • पृष्ठ संख्या– 151
    • मूल्य– 350/-

    Book Review: माधव नागदा की ख्याति इस रूप में है कि वे ग्रामीण परिवेश के यथार्थ को अपनी कहानियों में रेखांकित करने वाले सिद्धहस्त कथाकार हैं। हिंदी कहानी की विकास यात्रा खास करके राजस्थान की हिंदी कहानी की उज्ज्वल परंपरा माधव नागदा की कहानियों की चर्चा के बगैर मुकम्मल नहीं हो सकती। ग्रामीण परिवेश की जो झलक कथा सम्राट प्रेमचंद के वहाँ नजर आती है, वैसा ही ग्रामीण परिवेश रचने-गढ़ने की बेचैनी माधव नागदा के भीतर मौजूद है। राजस्थान साहित्य अकादमी के सुमनेश जोशी पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित माधव नागदा का गद्य और पद्य में बराबर हस्तक्षेप रहा है। खासकर कहानी उनकी ख्याति का आधार रही है।

    इन दिनों माधव नागदा अपने नए कहानी संग्रह ‘अंजलि भर उजास’ के कारण चर्चा में हैं। साहित्य का उद्देश्य मानव चेतना को परिष्कृत व उन्नत करना है। 14 कहानियों से सजा यह संग्रह अंततः यह बताता है कि साहित्य का लक्ष्य ही मनुष्य है। भाषा और शिल्प के स्तर पर माधव नागदा का अपना एक रेंज है। उनकी कहानियों का कथ्य ऐसा बेजोड़ है कि अपने कहन में समाज में हाशिए पर खड़े पात्रों को अपनी तमाम कमजोरियों और शक्तियों के अंतर्विरोधों के बावजूद हारने नहीं देते और उनमें नया उजास भरते हैं।

    संग्रह की प्रतिनिधि कहानी ‘अंजलि भर उजास’ की नायिका रुक्मणी स्त्री अधिकारों की आवाज मुखर करती है। कथ्य के लिहाज से ठेठ देहात से जुड़े शब्द इन कहानियों में मार्मिकता पैदा करते हैं। देश की स्वतंत्रता के बाद के भारत का ग्रामीण जन-जीवन, समाज, संस्कृति और लगातार वैश्वीकरण एवं बाजारवाद के फलस्वरूप गाँवों में जो बदलाव हमें नजर आ रहे हैं, यानी बदलती राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक स्थितियाँ और स्त्री चेतना के स्वर माधव नागदा की कहानियों में नजर आते हैं।

    पुस्तक की भूमिका में वरिष्ठ आलोचक और लेखक डॉ. सूरज पालीवाल ने लिखा, ‘लेखन की सार्थकता अपने परिवेश के यथार्थ को समझ कर उसे आत्मीयता के साथ उकेरना है। यह यथार्थ उनकी कहानियों में बहुत छनकर आता है, इसलिए ये कहानियाँ किसी एक गाँव की कहानी या घटना नहीं रहती, बल्कि पूरे भारत के गाँवों का प्रतिनिधित्व करने लगती हैं।’ बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके नए कथा संग्रह ‘अंजलि भर उजास’ का साहित्य जगत में पुरजोर स्वागत होगा।

    समीक्षक– डॉ. एस.डी. वैष्णव