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  • Proof of Citizenship: आधार को नागरिकता का प्रमाण मानने पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

    Proof of Citizenship: आधार को नागरिकता का प्रमाण मानने पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

    Proof of Citizenship: उच्चतम न्यायालय ने आधार कार्ड को नागरिकता, निवास, जन्मतिथि और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। याचिका में कहा गया है कि आधार का उपयोग केवल पहचान सत्यापन तक सीमित है और इसे नागरिकता अथवा निवास के प्रमाण के रूप में मानना आधार अधिनियम, 2016 तथा यूआईडीएआई के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

    याचिका में आधार अधिनियम की धारा 9 का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार आधार संख्या या उसका प्रमाणीकरण किसी व्यक्ति की नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं माना जा सकता। साथ ही अगस्त 2023 में जारी यूआईडीएआई की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि आधार केवल पहचान का दस्तावेज है, न कि नागरिकता, जन्मतिथि या पते का प्रमाण।

    याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि कानूनी प्रावधानों के बावजूद विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आधार को उम्र, पते और नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। इनमें स्कूलों में प्रवेश, जन्म प्रमाण-पत्र जारी करना, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस तथा संपत्ति से जुड़े लेन-देन शामिल हैं।

    याचिका में विशेष रूप से चुनाव आयोग के फॉर्म-6 पर आपत्ति जताई गई है, जिसका उपयोग नए मतदाता पंजीकरण के लिए किया जाता है। इसमें आधार को जन्मतिथि और निवास संबंधी दस्तावेज के रूप में स्वीकार किए जाने को चुनौती दी गई है।

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि आधार केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है। यह उन सभी निवासियों के लिए उपलब्ध है, जिनमें ऐसे विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जिन्होंने निर्धारित अवधि तक भारत में निवास किया हो। याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार प्राप्त करने के लिए किरायानामा या स्थानीय जनप्रतिनिधि के प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, इसलिए इसे नागरिकता का आधार नहीं माना जा सकता। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग की ओर से जवाब दाखिल किए जाने की संभावना है।