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  • शंकराचार्य को अतीक अहमद की तरह मारने की धमकी, FIR दर्ज न होने पर विरोध की चेतावनी

    शंकराचार्य को अतीक अहमद की तरह मारने की धमकी, FIR दर्ज न होने पर विरोध की चेतावनी

    वाराणसी : स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती को जान से मारने की गंभीर धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा उन्हें कुख्यात अपराधी अतीक अहमद की तरह खत्म करने की धमकी दी गई है, जिससे सनातन समाज में आक्रोश का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती देशभर में गौ रक्षा के उद्देश्य से “गौ माता – राष्ट्रमाता अभियान” चला रहे हैं। इस अभियान के तहत आगामी 03 मई से उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा में उनकी “गविष्ठी यात्रा” प्रस्तावित है।

    इस यात्रा के दौरान वे लोगों को गौ हत्या के विरोध में आवाज उठाने तथा हर विधानसभा में “राम गौ धाम” के निर्माण के लिए प्रेरित करने वाले हैं।

     धमकी भरे संदेश और कॉल

    शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को ज्योतिर्मठ के आधिकारिक नंबर पर लगातार आपत्तिजनक और धमकी भरे टेक्स्ट मैसेज प्राप्त हुए। इसके बाद नंबर ब्लॉक करने पर 6 अप्रैल को वॉइस मेल के जरिए फिर से धमकी भरे ऑडियो संदेश भेजे गए।

    इन संदेशों में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए शंकराचार्य को जान से मारने की धमकी दी गई और उनकी यात्रा के दौरान हमला करने की बात कही गई।

     FIR दर्ज कराने में देरी

    इस गंभीर मामले को लेकर शंकराचार्य के प्रतिनिधि मंडल द्वारा भेलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया गया। आरोप है कि पुलिस ने लगातार “एक घंटे में आइए” कहकर पूरे दिन टालमटोल किया और गुरुवार शाम 5 बजे तक भी FIR दर्ज नहीं की गई।

     विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

    मामले में कार्रवाई न होने से नाराज समर्थकों ने 9 अप्रैल 2026 को भेलपुर थाने पर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द FIR दर्ज नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

     बड़े सवाल

    – क्या गौ रक्षा के लिए आवाज उठाना गलत है?

    – क्या किसी धार्मिक नेता को इस तरह धमकी देना कानूनन और नैतिक रूप से सही है?

    – इन धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और किसका संरक्षण प्राप्त है?

    इस घटना ने कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी जल्द और प्रभावी कार्रवाई करता है।