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  • Srimad Bhagavatam: अमृतमय श्रीमद्भागवत सुनकर भक्त हुए भावविभोर; श्री कृष्ण जन्म के बाद वासुदेव का कान्हा को गोकुल छोड़ने जाना!

    Srimad Bhagavatam: अमृतमय श्रीमद्भागवत सुनकर भक्त हुए भावविभोर; श्री कृष्ण जन्म के बाद वासुदेव का कान्हा को गोकुल छोड़ने जाना!

    Srimad Bhagavatam: सावरकर फाउंडेशन की ओर से वार्ड नं 63 के में पुनीत पुरुषोत्तम मास में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा मथुरा से आये पूज्य आचार्य श्री श्री 1008 ललिता शरण देवाचार्य के शिष्य महावीर शरण शास्त्री के मुखारविंद से वामन अवतार और श्री कृष्ण जन्म कथा सुनकर भक्त हुए भावविभोर। श्री कृष्ण के जन्म की कथा बाद देवी माया प्रभु की आज्ञा से वासुदेव को अपनी माया से जगती हैं और कृष्ण को कंस से बचाने के लिए गोकुल भेजते हैं जहां यशोदा ने एक कन्या को जनम दिया था जो की माँ शक्ति थी।

    वासुदेव कृष्ण को टोकरी में लेकर चल पड़ते हैं देवी माया कारागार के सभी दरवाज़ खोल देती हैं और सभी सैनिकों को भी बेहोश कर देती हैं। वासुदेव कृष्ण को लेकर अपने साथ निकल पड़ते हैं रस्ते में वो यमुना नदी पार करते हैं तो बारिश होने लगती है। शेष नाग क्षीर सागर से आते हैं और श्री कृष्ण को बारिश से बचाने के लिए अपने फ़न को को फैला देते हैं। देवी यमुना जी भी जल का स्तर बढ़ा देती हैं और उन्हें रोक देती हैं और श्री कृष्ण से विनती करती हैं की उन्हें अपने चरण चुने का मौक़ा दे।

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    श्री कृष्ण यमुना जी की प्रार्थना स्वीकार कर लेते हैं और यमुना जी कृष्ण के चरण छूकर उन्हें प्रणाम करने के बाद नदी का स्तर काम कर देती हैं। वासुदेव नदी पार करके गोकुल पहुँच जाते हैं और यशोदा के पास लेती कन्या के साथ कृष्ण को बदल लेते हैं और वहाँ से वापस आ जाते हैं। वापस आने के बाद देवी माया वासुदेव को यह सारे वाक्य को मिटा देती हैं।

    इस धार्मिक अनुष्ठान में हजारों की संख्या में भक्त उपस्थित होकर लाभांवित हो रहे हैं।कथा के समापन के बाद महाप्रसाद की व्यवस्था फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है।इस कथा के आयोजक सावरकर फाउंडेशन के अध्यक्ष नगरसेवक रूपेश गजानन सावरकर के अथक प्रयास से चल रहा है।