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  • BNCMC Board Poster Controversy: मनपा के सूचना बोर्ड पर बिल्डर का पोस्टर चिपकाने का मामला, एफआईआर दर्ज!

    BNCMC Board Poster Controversy: मनपा के सूचना बोर्ड पर बिल्डर का पोस्टर चिपकाने का मामला, एफआईआर दर्ज!

    BNCMC Board Poster Controversy: शहर में अवैध बैनर और पोस्टरों के बढ़ते चलन के बीच भिवंडी महानगरपालिका के आधिकारिक सूचना बोर्ड पर एक बिल्डर का विज्ञापन चिपकाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मनपा प्रशासन हरकत में आया और संबंधित मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।

    जानकारी के अनुसार, शहर के इंदिरा गांधी मेमोरियल (आईजीएम) अस्पताल के प्रवेश द्वार के सामने स्थित फ्लाईओवर के खंभे पर मनपा द्वारा एक चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। इस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि सार्वजनिक स्थानों, बिजली के खंभों, स्ट्रीट लाइट पोल और फ्लाईओवर के कॉलम पर बिना अनुमति बैनर, होर्डिंग और पोस्टर लगाना प्रतिबंधित है तथा ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    आरोप है कि देर रात एक युवक ने उसी मनपा सूचना बोर्ड पर एक निजी डेवलपर का विज्ञापन पोस्टर चिपका दिया, जिससे मनपा की चेतावनी पूरी तरह ढंक गई। इतना ही नहीं, इस दौरान डेवलपर के प्रचार का गीत बजाते हुए वीडियो भी बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया गया। वीडियो सामने आने के बाद नागरिकों में नाराजगी देखी गई।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए भिवंडी महानगरपालिका की प्रभाग समिति-1 के अधिकारी नितीन पंजाबराव जामनेकर ने निजामपुर पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शहर में लंबे समय से अवैध बैनर, पोस्टर और भित्ति विज्ञापनों की भरमार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। भिवंडी महानगरपालिका के पांचों प्रभागों में बड़ी संख्या में बिना अनुमति लगाए गए पोस्टर और बैनर दिखाई देते हैं। इनमें राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के प्रचार-प्रसार से जुड़े पोस्टर भी शामिल हैं, जिससे शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है।

    हालांकि मनपा का अतिक्रमण विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर अवैध बैनर और पोस्टर हटाता है, लेकिन पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने से इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही है। शहरवासियों ने मांग की है कि बिना अनुमति विज्ञापन लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और इस संबंध में ठोस नीति बनाकर मनपा के राजस्व में भी वृद्धि की जाए।

  • BNCMC Election Controversy: 24 उम्मीदवारों को चौथी नोटिस, 15 जून को सचिवालय में पेश होने का आदेश

    BNCMC Election Controversy: 24 उम्मीदवारों को चौथी नोटिस, 15 जून को सचिवालय में पेश होने का आदेश

    BNCMC Election Controversy: भिवंडी महानगरपालिका चुनाव संपन्न हुए लगभग साढ़े पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन चुनाव लड़ने वाले 24 उम्मीदवार अब तक अपने चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं कर पाए हैं। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए चुनाव खर्च जांच दल ने चौथी बार नोटिस जारी कर सभी उम्मीदवारों को 15 जून 2026 को सचिवालय में सुनवाई के लिए उपस्थित रहने का आदेश दिया है। लगातार नोटिस के बावजूद जवाब नहीं देने वाले उम्मीदवारों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

    गौरतलब है कि भिवंडी महानगरपालिका का सार्वजनिक चुनाव 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुआ था। 23 प्रभागों के 90 वार्डों में कुल 438 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। चुनाव नियमों के अनुसार परिणाम घोषित होने के एक माह के भीतर प्रत्येक उम्मीदवार को अपने चुनावी खर्च और खातों का पूरा ब्यौरा संबंधित चुनाव अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य होता है।

    हालांकि अधिकांश उम्मीदवारों ने समय पर अपना लेखा-जोखा जमा कर दिया, लेकिन 24 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने चुनाव परिणाम आने के पांच माह बाद भी अपने खर्च का विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। इनमें कुछ उम्मीदवार चुनाव हारने के बाद जानकारी देने से बच रहे हैं, जबकि कुछ पर जानबूझकर नियमों की अनदेखी करने का आरोप है।

    नगर परिषद शाखा, कोंकण विभाग के उपयुक्त डॉ. सागर घोलप ने 11 जून 2026 को चौथी नोटिस जारी करते हुए इन 24 उम्मीदवारों को 15 जून को सुनवाई के लिए तलब किया है। इससे पहले भी तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संबंधित उम्मीदवारों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    सूत्रों के अनुसार नोटिस प्राप्त करने वालों में 7 महिला और 17 पुरुष उम्मीदवार शामिल हैं। चुनाव खर्च निरीक्षण दल का मानना है कि बार-बार नोटिस के बावजूद जानकारी न देना चुनावी नियमों का उल्लंघन है, जिसके चलते संबंधित उम्मीदवारों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

    चौथी नोटिस जारी होने के बाद संबंधित उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया है। अब 15 जून की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां अनुपस्थित रहने या संतोषजनक स्पष्टीकरण न देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

  • BNCMC Corruption: भिवंडी मनपा के घनकचरा विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, आपराधिक कार्रवाई की मांग

    BNCMC Corruption: भिवंडी मनपा के घनकचरा विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, आपराधिक कार्रवाई की मांग

    BNCMC Corruption: भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका (मनपा) के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग की ई-निविदा प्रक्रिया में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर एक निजी कंपनी द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता गौरव संतोष भोइर ने इस मामले में संबंधित कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए भिवंडी मनपा के महापौर नारायण चौधरी, आयुक्त अनमोल सागर तथा उप महापौर एवं घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के अधिकारियों को लिखित ज्ञापन सौंपा है।

    ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि दिसंबर 2024 में भिवंडी मनपा के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के माध्यम से अपशिष्ट संग्रहण (कचरा संकलन) का ठेका प्राप्त करने के लिए नवी मुंबई की एक कंपनी ने कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। कंपनी ने दावा किया था कि उसे इस प्रकार के कार्यों का पूर्व अनुभव है, जिसके आधार पर उसे निविदा प्रदान की गई।

    गौरव भोइर के अनुसार, सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत संबंधित दस्तावेजों की जांच करने पर यह सामने आया कि प्रस्तुत किया गया प्रमाणपत्र कथित रूप से फर्जी और जाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त कंपनी ने इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर भिवंडी मनपा को गुमराह किया और करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

    भोइर ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि संबंधित कंपनी ने राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं में भी इसी प्रकार के दस्तावेजों का उपयोग कर ठेके हासिल किए हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी निविदाएं प्राप्त करना न केवल प्रशासन के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।

    उन्होंने दावा किया कि इस मामले के कारण शासन को करोड़ों रुपये का संभावित आर्थिक नुकसान हुआ है तथा निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इसके अलावा, भिवंडी मनपा के कुछ पार्षदों द्वारा भी संबंधित कंपनी के खिलाफ विभिन्न शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

    गौरव संतोष भोइर ने मांग की है कि संबंधित कंपनी के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, उसका अनुबंध रद्द किया जाए, कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा अनुबंध प्राप्त करने में शामिल जिम्मेदार व्यक्तियों को भी सह-आरोपी बनाया जाए। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

    भोइर ने कहा कि वह इस कथित ई-टेंडर घोटाले की शिकायत राज्य के मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री, शहरी विकास विभाग, कोंकण आयुक्त तथा ठाणे जिला कलेक्टर के समक्ष भी प्रस्तुत करेंगे।

    मनपा का पक्ष

    भिवंडी मनपा के महापौर ने कहा, “यदि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग की ई-निविदा प्रक्रिया में किसी प्रकार की धोखाधड़ी पाई जाती है, तो संबंधित कंपनी के दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यदि यह सिद्ध होता है कि मनपा को गुमराह कर वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी की गई है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”

  • BNCMC General Body Meeting: नाला सफाई और अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर भिवंडी नगर निगम की महासभा में भारी हंगामा!

    BNCMC General Body Meeting: नाला सफाई और अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर भिवंडी नगर निगम की महासभा में भारी हंगामा!

    BNCMC General Body Meeting: मानसून में अब केवल बीस दिन शेष हैं, लेकिन भिवंडी शहर में अभी तक नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हो सका है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार (7 मई) को हुई भिवंडी महानगरपालिका की महासभा में नाला सफाई और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मिलीभगत के विषयों पर जमकर हंगामा हुआ। महासभा में नाला सफाई की निविदा प्रक्रिया को मंजूरी देने के साथ-साथ प्रभाग अधिकारियों की मनमानी, भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बदले आर्थिक लेन-देन जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।

    नाला सफाई में देरी पर प्रशासन को घेरा
    भाजपा पार्षद सुमित पाटिल ने प्रश्न उठाया कि जब मानसून सिर पर है, तो प्रशासन हर बार नाला सफाई में देरी क्यों करता है? क्या यह देरी ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए की जा रही है? उन्होंने प्रशासन से इस विलंब का स्पष्टीकरण मांगा। वहीं, यशवंत टावरे ने सुझाव दिया कि नाला सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थिति वैसी ही बनी रहती है।

    इसके बजाय यदि नगर निगम खुद के जेसीबी, पोकलेन और डंपर खरीद ले और साल भर नालों की सफाई करे, तो करोड़ों रुपये बचाए जा सकते हैं। पार्षद रोहित चौधरी ने कहा कि केवल बीस दिनों में ठेकेदार क्या काम कर पाएंगे, इसलिए ठेकेदारों को स्थानीय पार्षदों के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए। कमलाकर पाटिल ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के प्रशासक काल में देरी से हुई सफाई का खामियाजा जनता ने भुगता है, क्या इस बार भी वही गलतियाँ दोहराई जाएंगी? उन्होंने प्रभाग स्तर पर निगरानी समिति बनाने का सुझाव दिया।

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    अवैध निर्माण कार्रवाई के नाम पर वसूली का आरोप
    राष्ट्रवादी (शरद पवार) कांग्रेस के पार्षद फराज बाबा बहाउद्दीन ने महासभा में सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “शहर में अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर बढ़ गए हैं। प्रभाग समिति क्रमांक 5 के प्रभाग अधिकारी सईद चिवणे, खतरनाक और अवैध इमारतों के बिल्डरों से 2 लाख रुपये, मरम्मत के नाम पर 3 लाख रुपये और गालाधारकों से 10 हजार रुपये की फिरौती वसूल रहे हैं।”

    पार्षद फराज के आरोपों पर प्रभाग अधिकारी सईद चिवणे ने जवाब देने की कोशिश की, लेकिन महासभा में कई पार्षदों ने उनके जवाबों को असंतोषजनक और टालमटोल वाला बताया। इस बहस से यह बात सार्वजनिक हो गई कि नगर निगम के अधिकारी अवैध निर्माणों की आड़ में किस तरह वसूली कर रहे हैं। फराज ने यह मांग भी की कि प्रभाग अधिकारियों को दी गई सरकारी गाड़ियाँ वापस ले लेनी चाहिए।

    जमीन खाली कराने का ‘उद्योग’
    शिवसेना (शिंदे गुट) के गुट नेता मनोज काटेकर ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के चलते किसी भी इमारत को ‘अति खतरनाक’ घोषित कर तुरंत गिरा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अब भू-मालिकों को जमीन खाली करा के देने का “उद्योग” चला रहा है। काटेकर ने मांग की कि ऐसी इमारतों में ‘पगड़ी’ पर रहने वाले किरायेदारों को सुरक्षा देने के लिए उनका विधिवत पंचनामा किया जाना चाहिए।