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  • Maharashtra Police Modernization: महाराष्ट्र पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए ₹733.28 करोड़ की योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी!

    Maharashtra Police Modernization: महाराष्ट्र पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए ₹733.28 करोड़ की योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी!

    Maharashtra Police Modernization: केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए ₹733.28 करोड़ की महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत कुल निधि का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

    इस मंजूरी पर आभार व्यक्त करते हुए राज्य नेतृत्व ने माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah का धन्यवाद किया है। बताया गया कि इस निधि के माध्यम से महाराष्ट्र पुलिस को समुद्री सुरक्षा, नशा विरोधी अभियान, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अधिक उपयोग, नागरिक सुरक्षा, आधुनिक हथियार, नए वाहन और अन्य आधुनिक संसाधनों से अधिक सशक्त बनाया जाएगा। इससे पुलिस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने और कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

  • Maharashtra Police Modernization: महाराष्ट्र पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए ₹733.28 करोड़ की योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी!

    Maharashtra Police Modernization: महाराष्ट्र पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए ₹733.28 करोड़ की योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी!

    Maharashtra Police Modernization: केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए ₹733.28 करोड़ की महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत कुल निधि का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

    इस मंजूरी पर आभार व्यक्त करते हुए राज्य नेतृत्व ने माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah का धन्यवाद किया है। बताया गया कि इस निधि के माध्यम से महाराष्ट्र पुलिस को समुद्री सुरक्षा, नशा विरोधी अभियान, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अधिक उपयोग, नागरिक सुरक्षा, आधुनिक हथियार, नए वाहन और अन्य आधुनिक संसाधनों से अधिक सशक्त बनाया जाएगा। इससे पुलिस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने और कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

  • Ravindra Chavan: मोदी सरकार ने 12 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया : रवींद्र चव्हाण

    Ravindra Chavan: मोदी सरकार ने 12 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया : रवींद्र चव्हाण

    Ravindra Chavan: भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और जो देश पहले कई मामलों में अन्य देशों पर निर्भर था, वह आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश को नई दिशा देने के साथ विकास और सुशासन का मजबूत आधार तैयार किया है।

    शुक्रवार को ठाणे में आयोजित पत्रकार परिषद में रवींद्र चव्हाण ने मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये, प्रदेश महासचिव एवं विधायक निरंजन डावखरे, विधायक संजय केलकर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

    चव्हाण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए गरीबों को अपना घर उपलब्ध कराने का अभियान चलाया गया है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय देश रक्षा सामग्री के लिए विदेशी देशों पर निर्भर था, लेकिन आज भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोदी सरकार ने देश की सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

    कोरोना महामारी के दौरान भारत ने न केवल अपने नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण उपलब्ध कराया, बल्कि दुनिया के अनेक देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराकर मानवता की सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया। ऊर्जा क्षेत्र में ‘वन नेशन-वन ग्रिड’ की अवधारणा को साकार करते हुए बिजली उत्पादन में वृद्धि की गई और लोडशेडिंग जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया।

    चव्हाण ने कहा कि सौर ऊर्जा और अन्य गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाया गया है। इससे उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में चौथे स्थान पर पहुंच चुकी है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना है।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र भी विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करने में राज्य के 14 करोड़ नागरिकों का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। महाराष्ट्र देश की विकास यात्रा का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है और हर क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • PM SVANidhi: छह साल में लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को मिला सहारा, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी योजना!

    PM SVANidhi: छह साल में लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को मिला सहारा, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी योजना!

    PM SVANidhi: प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना ने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। जून 2020 में शुरू की गई यह योजना आज देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन चुकी है। योजना की सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज्यादा ऋण वितरित किए गए हैं। इन ऋणों की कुल राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। योजना के तहत रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी अनौपचारिक और महंगे ब्याज वाले कर्जों पर निर्भरता कम हुई है।

    योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये तक के ऋण तीन चरणों में प्रदान किए जाते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले विक्रेताओं को ब्याज सब्सिडी, डिजिटल कैशबैक और यूपीआई आधारित रुपे क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

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    डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए योजना के तहत 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इन लाभार्थियों ने अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये है। ब्याज सब्सिडी और कैशबैक के माध्यम से लाभार्थियों को करीब 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ भी मिला है।

    स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्टों के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से ऋण मिला। वहीं लाभार्थियों की वार्षिक आय में औसतन 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। योजना के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, डिजिटल भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।

    पीएम स्वनिधि योजना आज केवल ऋण सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि लाखों छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

  • Combat Ebola Infection: नड्डा ने इबोला संक्रमण से निपटने की तैयारियों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की!

    Combat Ebola Infection: नड्डा ने इबोला संक्रमण से निपटने की तैयारियों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की!

    Combat Ebola Infection: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हाल ही में सामने आए इबोला विषाणु संक्रमण के प्रकोप के मद्देनजर देश में इससे निपटने और एहतियाती उपायों की यहां सोमवार को समीक्षा की। भारत में इबोला संक्रमण का अभी तक मामला सामने नहीं आया है।

    समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, आईसीएमआर के महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस), अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य), निदेशक, एनसीडीसी और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में केंद्र सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक प्रतिक्रिया उपायों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिये गये है।

    स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने परामर्श में कहा है कि कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में बदलती स्थिति और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों को देखते हुए, सभी भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक इन देशों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस प्रकोप को अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) घोषित किया है और अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) ने इसे महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईसीएस) घोषित किया है।

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    गौरतलब है कि कांगो में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की निगरानी बढ़ाने के बाद इस देश में अब तक इबोला के 900 से अधिक संदिग्ध मामलों की पहचान की गयी है। इस प्रकोप का मुख्य केंद्र इटुरी प्रांत है, जहां पहले से ही करीब 50 लाख लोग लगातार जारी हिंसक संघर्ष में फंसे हुए हैं। इस वजह से शुरुआती दौर में मामले की पहचान करना मुश्किल हो गया है और संकट गहरा गया है।

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “एक्टिव केस-खोज अभियानों के कारण कांगों में इबोला के कुल 904 संदिग्ध मामले सामने आये हैं। इनमें प्रयोगशाला की ओर से पुष्ट किये गये 101 संक्रमण के मामले भी शामिल हैं।” डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकोप का मुख्य केंद्र इटुरी प्रांत है, जहां पहले से ही करीब 50 लाख लोग लगातार जारी हिंसक संघर्ष में फंसे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस कारण महत्वपूर्ण स्वास्थ्य और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा है। टेड्रोस के अनुसार, मौजूदा असुरक्षा और डर की वजह से प्रभावित समुदायों में गहरा अविश्वास पैदा हो गया है। इस माहौल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रयासों को गंभीर रूप से बाधित किया है। इससे संक्रमितों के संपर्क में आये लोगों का पता लगाने और शुरुआती दौर में संक्रमण की पहचान का काम बेहद मुश्किल हो गया है।

    कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि तीन प्रभावित प्रांतों में इस घातक वायरस के कारण 204 लोगों की मौत हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने 16 मई को बुंडिबुग्यो इबोला वायरस स्ट्रेन के कारण फैले इस प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (पीएचईआईसी) घोषित किया था।

    इबोला एक अत्यंत घातक और संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके कारण गंभीर रक्तस्राव (हेमोरेजिक बुखार) और अंगों का खराब होना होता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (खून, लार, पसीना आदि) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। अभी तक इसका कोई टीका या दवा नहीं है जिसकी वजह से यह जानलेवा साबित हो रहा है।

  • Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देशभर में निवेश-तैयार एवं विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मार्च में मंजूर ‘भव्य’ योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए कर दिये हैं और चार महीने में 50 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव को मंजूरी देने का लक्ष्य है।

    इस योजना के तहत पूरे देश में 100 औद्योगिक पार्कों की स्थापना का लक्ष्य है जो 100 एकड़ से 1000 एकड़ तक के हो सकते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में हम 25 एकड़ के पार्क को भी मंजूरी दे सकते हैं। दिशानिर्देशों के तहत केंद्र सरकार भव्य के तहत राज्यों को प्रति पार्क प्रति एकड़ जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए एक करोड़ रुपये या जमीन की प्रति एकड़ बाजार दर में से जो भी कम होगा, उसके बाराबर सहायता देगी।

    मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनके लिए लगभग 33,660 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। पहले चरण में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन प्रक्रिया के माध्यम से 50 तक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क के लिए राज्यों को विशेष प्रयोजन इकाई का गठन करना होगा जो इन औद्योगिक पट्टियों में बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन करेगी।

    गोयल ने कहा, ‘सरकार इस योजना को लेकर कितनी सक्रियता से काम कर रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी गत 18 मार्च को मिली थी और इसे अप्रैल में अधिसूचित कर दिया गया था। अब इसके दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं तथा चार महीने में 50 औद्योगिक पार्क मंजूर करने की तैयारी है।’

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    गोयल ने कहा कि इस चार महीने को भी दो भागों में बांट दिया गया है और पहले दो महीनों में 20 पार्क मंजूर कर दिये जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारें इस योजना के लिए प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत कर सकती है।

    उन्होंने बताया कि भव्य योजना का उद्देश्य “मेक इन इंडिया”, “पीएम गति शक्ति” तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने की सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप एकीकृत औद्योगिक अवसंरचना का विकास कर भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

    भव्य के लिए जारी दिशा-निर्देशों में पार्कों की पात्रता के मानदंड, परियोजना की चयन प्रक्रिया, वित्तपोषण संरचना, प्रशासनिक ढांचा, निगरानी प्रणाली तथा कार्यान्वयन व्यवस्था सहित विस्तृत रूपरेखा प्रदान की गई है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य “निवेश-तैयार” औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिसमें प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिता सेवाएं, श्रमिक सहायता अवसंरचना, डिजिटल शासन प्रणाली तथा सतत विकास संबंधी सुविधाएं शामिल होंगी।

    दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रीनफील्ड तथा पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्कों दोनों का विकास किया जा सकेगा। गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम 100 एकड़ भूमि तथा पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत 1000 एकड़ तक के बड़े औद्योगिक पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।

    चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया के तहत प्रस्तावों का मूल्यांकन मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्थल की उपयुक्तता, अवसंरचना की गुणवत्ता, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती, नीतिगत सुविधा, डिजिटल शासन की तैयारी तथा दीर्घकालिक स्थिरता जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर किया जाएगा।

    दिशा-निर्देशों में भूमिगत उपयोगिता प्रणाली, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएं, डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली, कौशल विकास सुविधाएं तथा एकीकृत साझा अवसंरचना जैसे घटकों की गुणवत्ता के मूल्यांकन का भी प्रावधान किया गया है।

    योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित एसपीवी के माध्यम से किया जाएगा। ये एसपीवी परियोजना की योजना, विकास, संचालन, प्रबंधन, निवेशक सुविधा तथा दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगी।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) को योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) नियुक्त किया गया है। दिशा-निर्देशों में निजी डेवलपर्स की भागीदारी हेतु परियोजना-विशिष्ट एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्क विकास का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा, पारदर्शिता सुरक्षा उपाय और जवाबदेही तंत्र निर्धारित किए गए हैं।

    योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों में जीआईएस-आधारित निगरानी प्रणाली, समय-समय पर प्रगति रिपोर्टिंग, ऑडिट व्यवस्था तथा डीपीआईआईटी सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति द्वारा निगरानी का प्रावधान शामिल किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों में लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उपयोगिता अवसंरचना तथा औद्योगिक विकास से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय का भी प्रावधान किया गया है।

  • पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार: शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली की यात्रा के लिए रुके थे

    पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार: शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली की यात्रा के लिए रुके थे

    लखनऊ / देवरिया। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी अमिताभ ठाकुर को लखनऊ क्राइम ब्रांच और देवरिया पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर देवरिया ले जाया है। ठाकुर उस समय लखनऊ–दिल्ली जा रही ट्रेन में सवार थे जब उन्हें हिरासत में लिया गया।

    गिरफ्तारी का विवरण

    स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, ठाकुर को ट्रेन रुकने पर सादे कपड़ों में उपस्थित पुलिसकर्मियों ने उठाकर हिरासत में लिया और उन्हें देवरिया ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ शुरू की गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि गिरफ्तारी योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई।

    आरोप क्या हैं?

    पुलिस का दावा है कि वर्ष 1999 में देवरिया में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान ठाकुर ने अपने पद का दुरुपयोग कर जिला उद्योग केंद्र, देवरिया के औद्योगिक प्लॉट संख्या B-2 का आवंटन अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर कराया। आरोप है कि आवंटन के लिए कूट रचित (जाली) दस्तावेज तैयार किए गए — जिसमें छद्म नाम, झूठे पते और परिवर्तित अभिलेख शामिल थे — और बाद में प्लॉट को लाभ के लिए बेचा गया। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने यह प्रार्थना-पत्र/शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई।

    दर्ज धाराएँ और सजा की जानकारी

    • धारा 419 — किसी अन्य की पहचान धारण कर धोखाधड़ी: सजा तक 3 वर्ष या जुर्माना या दोनों।
    • धारा 420 — धोखाधड़ी व संपत्ति हानि: सजा तक 7 वर्ष व जुर्माना।
    • धारा 467 — मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी: आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा व जुर्माना।
    • धारा 468 — जाली दस्तावेज बनाना धोखाधड़ी के उद्देश्य से: सजा तक 7 वर्ष व जुर्माना (अक्सर जमानत पर संकुल)।
    • धारा 471, 34, 120B भी आरोपपत्र में शामिल हैं। (नोट: सजा का निर्धारण अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।)

    पुलिस का बयान और वर्तमान स्थिति

    लखनऊ क्राइम ब्रांच और देवरिया पुलिस ने मामले की जांच और सत्यापन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ठाकुर को देवरिया सदर कोतवाली में रखा गया और उनसे पूछताछ जारी है; आगे की कानूनी कार्यवाही—रिमांड, पेशी या जमानत—आगामी सुनवाई के अनुसार तय होगी।


    ठाकुर के प्रति प्रतिक्रिया

    पूर्व आईपीएस और सामाजिक सक्रियता में जुड़े ठाकुर ने इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में आरोपों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ या ‘मंसूबाबद्ध’ बताकर खारिज किया था; इस गिरफ्तारी से जुड़े उनके हालिया बयान उपलब्ध होते ही उसे जोड़ा जाएगा। पहले भी इस प्रकरण पर मीडिया पर और सोशल प्लेटफॉर्म पर ठाकुर व उनके वकील की प्रतिक्रिया दर्ज रही है।


    निष्कर्ष — आगे क्या होने की सम्भावना है

    • पुलिस के बयान, दर्ज धाराओं और गिरफ्तारी के बाद प्राथमिकी के आधार पर जांच तेज़ कर दी गई है।
    • अगला कदम़: पुलिस द्वारा पूछताछ, सम्भवतः रिमांड के लिए अदालत में पेशी, और यदि आवश्यक हुआ तो जमानत याचिका/जमानत सुनवाई।
    • कोर्ट(Delhi High Court) और जांच एजेंसियों के आधिकारिक प्रवक्ताओं से प्राप्त बयानों के बाद ही केस की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।