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  • Manav Kalyan Puja: मानव कल्याण शक्ति ज्योति फाऊंडेशन द्वारा निःशुल्क रूद्राभिषेक एवं अतिरुद्र महायज्ञ संपन्न!

    Manav Kalyan Puja: मानव कल्याण शक्ति ज्योति फाऊंडेशन द्वारा निःशुल्क रूद्राभिषेक एवं अतिरुद्र महायज्ञ संपन्न!

    Manav Kalyan Puja: नालासोपारा पूर्व पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की पावन पूर्णिमा पर गोरेगांव स्थित जिताई नगर के आजोबा नागेश्वर महादेव मंदिर में रविवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्था मानव कल्याण शक्ति ज्योति फाऊंडेशन के तत्वावधान में आयोजित निःशुल्क रूद्राभिषेक एवं अतिरुद्र महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया तथा विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

    सुबह 9 बजे से सायंकाल 4 बजे तक चले इस दिव्य अनुष्ठान में कर्मकांडी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं रुद्रपाठ से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। भगवान शिव के जयकारों और हवन की पवित्र आहुतियों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की सक्रिय सहभागिता ने सनातन संस्कृति के प्रति उनकी आस्था और समर्पण को प्रदर्शित किया।

    संस्था पदाधिकारियों ने बताया कि मानव कल्याण शक्ति ज्योति फाऊंडेशन केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों में भी निःशुल्क धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन कर समाज को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का कार्य कर रही है। संस्था द्वारा यज्ञोपवीत संस्कार, त्रिपिंडी श्राद्ध, पितृपक्ष पिंडदान, पितृ विसर्जन तथा श्रावणी उपाकर्म जैसे धार्मिक कर्मकांड भी निःशुल्क संपन्न कराए जाते हैं।

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    कार्यक्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए संस्था द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित ढंग से की गई थीं। श्रद्धालुओं ने संस्था के इस सेवा एवं धर्म कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया।

    इस सफल आयोजन में संस्था के संस्थापक आचार्य धर्मराज पांडेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवदत्त पांडेय, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बागेश पांडेय तथा प्रदेश महामंत्री अभय शुक्ल के मार्गदर्शन में मुख्य आयोजक जितेन्द्र दूबे, राम सुरेश दूबे, रोहित गुप्ता एवं शशिकांत मिश्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    साथ ही राजकुमार मिश्रा, अरुण सिंह, अरविंद शुक्ल, विश्वदेव मिश्र, अनिल तिवारी, सुधीर सिंह, देवीकांत पांडे, अंतीमा मिश्रा, हिरा पांडे, संतोषी मिश्रा, पं. धनंजय मिश्रा, प्रभात मिश्रा, पं. जितेन्द्र मिश्रा, पंकज पांडेय, रूद्र पांडे, हर्ष पांडे, अनंत शुक्ल, अनन्य शुक्ल, आर्यन मिश्रा, आलोक चौबे, विशाल सिंह, सत्यप्रकाश तिवारी, आशीष दूबे, कृष्णा, सनी सहित संस्था के पदाधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों का सराहनीय सहयोग रहा। धर्म, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला यह आयोजन क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना रहा तथा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर गया।

  • Srimad Bhagavatam: अमृतमय श्रीमद्भागवत सुनकर भक्त हुए भावविभोर; श्री कृष्ण जन्म के बाद वासुदेव का कान्हा को गोकुल छोड़ने जाना!

    Srimad Bhagavatam: अमृतमय श्रीमद्भागवत सुनकर भक्त हुए भावविभोर; श्री कृष्ण जन्म के बाद वासुदेव का कान्हा को गोकुल छोड़ने जाना!

    Srimad Bhagavatam: सावरकर फाउंडेशन की ओर से वार्ड नं 63 के में पुनीत पुरुषोत्तम मास में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा मथुरा से आये पूज्य आचार्य श्री श्री 1008 ललिता शरण देवाचार्य के शिष्य महावीर शरण शास्त्री के मुखारविंद से वामन अवतार और श्री कृष्ण जन्म कथा सुनकर भक्त हुए भावविभोर। श्री कृष्ण के जन्म की कथा बाद देवी माया प्रभु की आज्ञा से वासुदेव को अपनी माया से जगती हैं और कृष्ण को कंस से बचाने के लिए गोकुल भेजते हैं जहां यशोदा ने एक कन्या को जनम दिया था जो की माँ शक्ति थी।

    वासुदेव कृष्ण को टोकरी में लेकर चल पड़ते हैं देवी माया कारागार के सभी दरवाज़ खोल देती हैं और सभी सैनिकों को भी बेहोश कर देती हैं। वासुदेव कृष्ण को लेकर अपने साथ निकल पड़ते हैं रस्ते में वो यमुना नदी पार करते हैं तो बारिश होने लगती है। शेष नाग क्षीर सागर से आते हैं और श्री कृष्ण को बारिश से बचाने के लिए अपने फ़न को को फैला देते हैं। देवी यमुना जी भी जल का स्तर बढ़ा देती हैं और उन्हें रोक देती हैं और श्री कृष्ण से विनती करती हैं की उन्हें अपने चरण चुने का मौक़ा दे।

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    श्री कृष्ण यमुना जी की प्रार्थना स्वीकार कर लेते हैं और यमुना जी कृष्ण के चरण छूकर उन्हें प्रणाम करने के बाद नदी का स्तर काम कर देती हैं। वासुदेव नदी पार करके गोकुल पहुँच जाते हैं और यशोदा के पास लेती कन्या के साथ कृष्ण को बदल लेते हैं और वहाँ से वापस आ जाते हैं। वापस आने के बाद देवी माया वासुदेव को यह सारे वाक्य को मिटा देती हैं।

    इस धार्मिक अनुष्ठान में हजारों की संख्या में भक्त उपस्थित होकर लाभांवित हो रहे हैं।कथा के समापन के बाद महाप्रसाद की व्यवस्था फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है।इस कथा के आयोजक सावरकर फाउंडेशन के अध्यक्ष नगरसेवक रूपेश गजानन सावरकर के अथक प्रयास से चल रहा है।