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  • Bangladesh India China Relations: बंगलादेश के लिए भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की चुनौती

    Bangladesh India China Relations: बंगलादेश के लिए भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की चुनौती

    Bangladesh India China Relations: बंगलादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा को दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोमवार देर रात चीन के बंदरगाह शहर डालियान पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया, जो दोनों देशों के बढ़ते संबंधों का संकेत माना जा रहा है।

    चीन वर्तमान में बंगलादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और विकास परियोजनाओं का प्रमुख वित्तपोषक है। इस यात्रा के दौरान कई आर्थिक और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को अंतिम रूप दिए जाने के साथ-साथ रक्षा सहयोग, विशेषकर लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद, पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रधानमंत्री रहमान की यात्रा का कार्यक्रम सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। उन्होंने पहले कुआलालंपुर का दौरा किया, इसके बाद डालियान में एक सम्मेलन में भाग लिया और अब बीजिंग में चीनी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं में शामिल होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इस क्रम को अपनाने का उद्देश्य भारत की संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रखना है, क्योंकि नई दिल्ली ने भी बंगलादेशी प्रधानमंत्री को भारत आने का निमंत्रण दिया है।

    पूर्व राजनयिक रीवा गांगुली दास के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ होने वाली बैठकों में जिन मुद्दों पर चर्चा होगी, वे बंगलादेश की विदेश नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष के अंत तक प्रधानमंत्री रहमान की भारत यात्रा होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बंगलादेश की मौजूदा विदेश नीति ‘बंगलादेश फर्स्ट’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसके तहत ढाका किसी एक महाशक्ति पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है।

    आर्थिक दृष्टि से भी यह यात्रा अहम है। बंगलादेश चीन से चार अरब डॉलर से अधिक की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है, जबकि चीन समर्थित वित्तीय संस्थानों के पास लगभग नौ अरब डॉलर की अन्य परियोजनाएं भी विचाराधीन हैं। तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना, मोंगला बंदरगाह का विस्तार और चटगांव के निकट अनवारा औद्योगिक क्षेत्र का विकास प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं।

    रक्षा क्षेत्र में चीन निर्मित लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा आगे बढ़ता है तो इससे क्षेत्रीय सामरिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है, विशेषकर भारत के लिए, क्योंकि बंगलादेश का भूगोल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित है।

    वर्ष 2024 के राजनीतिक परिवर्तनों के बाद भारत और बंगलादेश के संबंधों में कुछ चुनौतियां उभरी हैं। हालांकि दोनों देशों के राजनयिकों को उम्मीद है कि नई सरकार के कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन के साथ बढ़ते आर्थिक और रक्षा सहयोग को इस स्तर तक सीमित रखना होगा कि वह भारत के साथ संबंधों में अविश्वास का कारण न बने। बंगलादेश के लिए चीन निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास का महत्वपूर्ण स्रोत है, जबकि भारत भौगोलिक निकटता, व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अनिवार्य साझेदार बना हुआ है।

    विश्लेषकों के अनुसार, इस दौरे की वास्तविक सफलता समझौतों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि ढाका भविष्य में भी भारत और चीन दोनों के साथ संतुलित और भरोसेमंद संबंध बनाए रखने में कितना सफल रहता है।

  • Modi-Carney Meeting: मोदी-कार्नी की मुलाकात में भारत-कनाडा संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर

    Modi-Carney Meeting: मोदी-कार्नी की मुलाकात में भारत-कनाडा संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर

    Modi-Carney Meeting: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।

    बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा रिश्तों में आई सकारात्मक प्रगति पर संतोष जताया और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर विशेष जोर दिया।

    दोनों पक्षों ने एलएनजी, एलपीजी और धातुकर्म कोयला क्षेत्र में बढ़ते व्यावसायिक सहयोग की समीक्षा की। साथ ही हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय दौरों और संवादों में आई तेजी का स्वागत किया। इस दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की हालिया कनाडा यात्रा का भी उल्लेख किया गया।

    प्रधानमंत्रियों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर जारी वार्ताओं में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और इसे इस वर्ष पूरा करने की इच्छा जताई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कांसुलर सेवाओं, रक्षा, वित्त और प्रवासन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने सामान्य सूचना सुरक्षा समझौते (जीएसओआईए) पर बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया। साथ ही रक्षा संस्थानों के बीच बढ़ते आदान-प्रदान को भी सकारात्मक कदम बताया गया।

    कौशल विकास, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में जारी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ (आईओआरए) में कनाडा को संवाद भागीदार बनाए जाने के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की।

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘रायसीना अमेरिकाज़’ पहल शुरू करने की घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा यात्रा के निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री कार्नी का आभार व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने भविष्य में सुविधाजनक समय पर इस यात्रा की तिथि तय करने के लिए संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

  • Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि पर तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले को अवैध बताते हुए किया खारिज!

    Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि पर तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले को अवैध बताते हुए किया खारिज!

    Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि के संबंध में फैसला सुनाने वाले तथाकथित मध्यस्थता न्यायाधिकरण को अवैध बताते हुए उसके फैसले को खारिज कर दिया है। भारत ने इस संबंध में अपने पहले के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा है कि उसने इस तथाकथित न्यायाधिकरण को कभी मान्यता नहीं दी है इसलिए इसके द्वारा सुनाये गये फैसले अवैध हैं। भारत ने जोर देकर कहा है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका निर्णय अभी भी बरकरार है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले से संबंधित मीडिया के प्रश्नों के जवाब में शनिवार को कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 15 मई को एक ” फैसला ” दिया है, जिसे इसने सिंधु जल संधि के सामान्य व्याख्या के मुद्दों पर पहले जारी फैसले के पूरक के रूप में “अधिकतम जलाशय” से संबंधित बताया है।

    संबंधित ख़बरें: Thane Traffic Police: ट्रैफिक पुलिस, ट्रैफिक वार्डन को रेनकोट बांटे गए; पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे के हाथों 1,000 कर्मचारियों को रेन कोट का वितरण!

    उन्होंने कहा,”भारत तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायाधिकरण की सभी पूर्व घोषणाओं को दृढ़तापूर्वक खारिज किया है। भारत ने कभी भी इस तथाकथित न्यायाधिकरण की स्थापना को मान्यता नहीं दी है। इसके द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही, या निर्णय अवैध है। भारत का सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय अब भी लागू है।”

    भारत ने पिछले वर्ष मई में पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद कड़ा कदम उठाते हुए इस संधि को ‘स्थगित’ कर दिया था। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से खत्म नहीं कर देता। भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।