Tag: Economic Growth

  • PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए संयुक्त रूप से लगभग ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में सरकारी बैंकों का अब तक का सबसे बड़ा लाभ माना जा रहा है। इस उपलब्धि के बीच वित्त मंत्रालय ने बैंकों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए खर्च में अनुशासन बनाए रखने और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

    वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की, जिसमें बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बैंकों की लाभप्रदता की सराहना की, लेकिन साथ ही उन्हें सतर्क रहने की भी सलाह दी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी बैंकों की बेहतर वित्तीय स्थिति के पीछे गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में कमी, ऋण वसूली में सुधार, डिजिटल बैंकिंग का विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ जैसे प्रमुख कारण रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग सुधारों और सख्त निगरानी के कारण सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

    संबंधित ख़बरें: Adani Group Initiative: अडानी समूह और गुजरात सरकार मिलकर कच्छ के 11 आईटीआई संस्थानों का करेंगे आधुनिकीकरण!

    वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने परिचालन खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखें और संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करें। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना आवश्यक बताया गया है।

    बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रिकॉर्ड मुनाफा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास का संकेत है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था उद्योगों, व्यापार और उपभोक्ताओं को ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक सहयोग और तकनीकी नवाचार सरकारी बैंकों की वृद्धि को और मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, लाभप्रदता बनाए रखने के लिए बैंकों को सतर्कता, लागत नियंत्रण और बेहतर ग्राहक सेवाओं पर लगातार ध्यान देना होगा।

    रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद वित्त मंत्रालय का संदेश स्पष्ट है कि बैंक केवल वर्तमान उपलब्धियों पर निर्भर न रहें, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयार रहें। इससे बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और देश की आर्थिक मजबूती दोनों को लाभ मिलेगा।

  • RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: Reserve Bank of India ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। आरबीआई के अनुसार, इन परिस्थितियों का असर आर्थिक विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ने की आशंका है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम से जुड़ी चिंताएं निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में अनिश्चितता भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी कि इन परिस्थितियों का असर कॉर्पोरेट आय और बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो पर भी पड़ सकता है। हालांकि आरबीआई ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिति मजबूत बनी हुई है और देश की वित्तीय व्यवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।

    संबंधित ख़बरें: IndiGo Q4 Results: इंडिगो को चौथी तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये का भारी नुकसान!

    रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर लगातार जोर, कॉर्पोरेट और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट तथा प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते निवेश और विकास को समर्थन देंगे।

    आरबीआई ने यह भी कहा कि सरकार की राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता और केंद्रीय बैंक के तरलता बढ़ाने के कदम बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम करने में मददगार साबित होंगे।

    हाल ही में Nirmala Sitharaman ने भी कहा था कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की कीमतों में तेजी से भारत के विदेशी मुद्रा व्यय पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन जरूरी आयातों का भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है, जिससे आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

  • Piyush Goyal: पीयूष गोयल ने रखा 2000 अरब डॉलर वार्षिक निर्यात का लक्ष्य!

    Piyush Goyal: पीयूष गोयल ने रखा 2000 अरब डॉलर वार्षिक निर्यात का लक्ष्य!

    Piyush Goyal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात कारोबार को आत्मनिर्भरता की एक पहचान बताते हुए सोमवार को कहा कि देश का निर्यात अगले पांच वर्षों में 2000 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है और चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात 1000 अरब डॉलर को पार कर जाएगा।

    गोयल ने निर्यात कारोबार में विस्तार को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सच्ची पहचान बताते हुए कहा कि वस्तु और सेवा, दोनों क्षेत्रों में भारत में वृद्धि हुई है जो मौजूदा वैश्विक माहौल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वह यहां भारत मंडपम में आयोजित ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ की वेबसाइट जारी करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    अमेरिकी आयात शुल्क की कार्रवाइयों और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद वर्ष 2025-26 में निर्यात 863 अरब डॉलर तक पहुँच गया जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है।गोयल ने सभी हितधारकों से ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया और इस कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। भारतीय व्यापार महोत्सव’ 12 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

    निर्यात क्षेत्र को सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा देते हुए उन्होंने कहा कि निर्यात का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में जो व्यापार समझौते किये हैं उनमें लगभग 38 विकसित देशों के साथ ‘मुक्त व्यापार व्यवस्था’ की दिशा में प्रयास किए गए हैं। इन समझौतों से बड़े बाज़ारों तक विशेष पहुँच मिलेगी, जहाँ भारतीय सामान प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम आयात शुल्क पर बेचे जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ये समझौते धीरे-धीरे लागू होंगे।

    संबंधित ख़बरें: AM Intelligence Labs Investment Agreement: डॉ. श्रीकांत शिंदे की पहल से महाराष्ट्र में ₹1.14 लाख करोड़ का निवेश, ग्रीन एआई कंप्यूट हब बनेगा

    उन्होंने बताया कि ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता जून से लागू हो सकता है,और अन्य समझौते कागज़ी कार्रवाई की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लागू कर दिये जाएंगे। पीयूष गोयल ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे वाणिज्य मंत्रालय के ‘ट्रेड पोर्टल’ के माध्यम से आयात के रुझानों का अध्ययन करें और घरेलू विनिर्माण तथा आयात के विकल्प तलाशने के अवसरों की पहचान करें।

    उन्होंने कहा कि भारत अभी भी ‘पूंजीगत वस्तुओं’ जैसे क्षेत्रों में विदेशी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। उन्होंने राजकोट, जालंधर, लुधियाना, बटाला और पुणे जैसे औद्योगिक केंद्रों से आह्वान किया कि वे आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन बढ़ाएँ। देश में अब चिकित्सा उपकरणों के बढ़ते विनिर्माण और विशेष रूप से विशाखापत्तनम में निर्मित एक ‘सीटी स्कैन मशीन’ का ज़िक्र करते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत में बने उत्पादों को ज़्यादा अपनाने से उनकी मांग बढ़ेगी और उत्पादन का पैमाना भी विस्तृत होगा।

    उन्होंने आयोजकों से आग्रह किया कि वे देश भर से विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ में आमंत्रित करें। इस कार्यक्रम में 1,000 व्यवसायों की भागीदारी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि हर राज्य से 25 महिला उद्यमियों को आमंत्रित किया जाए, जिससे अकेले ही लगभग 700-750 प्रतिभागी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे।