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  • Shivpanand Route Reopened: भिवंडी में वर्षों बाद खुला परशुराम पाड़ा-राउत पाड़ा शिवपाणंद मार्ग, किसानों में खुशी की लहर

    Shivpanand Route Reopened: भिवंडी में वर्षों बाद खुला परशुराम पाड़ा-राउत पाड़ा शिवपाणंद मार्ग, किसानों में खुशी की लहर

    Shivpanand Route Reopened: वर्षों से अतिक्रमण के कारण बंद पड़े परशुराम पाड़ा से राउत पाड़ा को जोड़ने वाले पारंपरिक शिवपाणंद (खेतों तक पहुंचने का पारंपरिक मार्ग) को आखिरकार प्रशासन ने खुलवा दिया। तहसीलदार के आदेश के बाद राजस्व विभाग ने पुलिस सुरक्षा के बीच अतिक्रमण हटाकर रास्ते को मुक्त कराया। इससे किसानों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, राउत पाड़ा के किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए इसी पारंपरिक रास्ते का उपयोग करना पड़ता था। लेकिन कई वर्षों से अतिक्रमण और कुछ जमीन मालिकों के विरोध के कारण यह मार्ग बंद पड़ा था। ग्रामीणों ने कई बार रास्ता खाली कराने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर ग्राम पंचायत के माध्यम से भिवंडी तहसीलदार के समक्ष औपचारिक दावा प्रस्तुत किया।

    सुनवाई के बाद तहसीलदार ने ग्राम पंचायत और ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद राजस्व प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाकर शिवपाणंद मार्ग को फिर से चालू करा दिया। रास्ता खुलने से अब किसान, मजदूर, पशुओं के साथ बैलगाड़ी और ट्रैक्टर भी सीधे खेतों तक पहुंच सकेंगे। फैसले के बाद ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए प्रशासन और तहसीलदार का आभार व्यक्त किया।

    इस दौरान मंडल अधिकारी भुरकुट, तलाठी अविनाश चव्हाण, सुभाष पाटिल, पंकज तात्या, अनंत भोईर, दाभाड के पुलिस पाटिल दीपक धुले, किरवली के पुलिस पाटिल कुणाल पाटिल, सरपंच अश्विनी वाघे, नंदा वाघे तथा शिवपाणंद आंदोलन के ठाणे जिला समन्वयक शिवाजी राउत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

    इस अभियान को शिवपाणंद रास्ता आंदोलन के महाराष्ट्र अध्यक्ष शरद पावले का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से भिवंडी तालुका के अन्य बंद पड़े शिवपाणंद मार्गों को भी खुलवाने की उम्मीद बढ़ी है। उनका मानना है कि किसानों की एकजुटता और कानूनी संघर्ष से न्याय मिलना संभव है।

  • Weak Monsoon Alert: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका

    Weak Monsoon Alert: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका

    Weak Monsoon Alert: भारत में वर्ष 2026 के दौरान सामान्य से कम मानसून रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बारिश औसत से कम हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    मौसम विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य स्तर से नीचे रह सकती है। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है।

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    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में उल्लेखनीय कमी आती है तो धान, दाल, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

    कमजोर मानसून का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी की उपलब्धता, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है। सरकार और कृषि विशेषज्ञ किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन तथा जल संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहता है तो आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है, जिससे महंगाई नियंत्रण की चुनौती और कठिन हो सकती है। ऐसे में सरकार की नजर मानसून की प्रगति और कृषि उत्पादन पर बनी हुई है।

  • MSP for Kharif Crops 2026-27: खरीफ फसलों के लिए एमएसपी 2026-27 घोषित, धान के भाव में 72 रुपये की बढ़ोतरी

    MSP for Kharif Crops 2026-27: खरीफ फसलों के लिए एमएसपी 2026-27 घोषित, धान के भाव में 72 रुपये की बढ़ोतरी

    MSP for Kharif Crops 2026-27: केंद्र सरकार ने खरीफ फसल वर्ष 2026-27 के विपणन सीजन के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बुधवार को इजाफे का ऐलान किया। पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी में सूरजमुखी में 622 रुपये प्रति क्विंटल, कपास में 557 रुपये प्रति क्विंटल, नाइजरसीड में 515 रुपये प्रति क्विंटल और तिल में 500 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गयी है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए इस वृद्धि को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्निनी वैष्णव ने यहां यह जानकारी देते हुए कहा कि विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित करने की घोषणा के अनुरूप है।

    किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला अपेक्षित लाभ मूंग (61 प्रतिशत) में सबसे अधिक (इसके बाद बाजरा (56 प्रतिशत), मक्का (56 प्रतिशत) और अरहर (54 प्रतिशत) में होगा। शेष फसलों के लिए, किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला लाभ 50 प्रतिशत रहने का अनुमान है।सामान्य धान और ग्रेड-ए के धान में 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गयी है।

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    केंद्र सरकार के इस फैसले से धान का नया समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है जबकि ग्रेड ए धान के लिए किसान को 2461रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा बाजरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया जिससे इसकी एमएसपी बढ़कर 2900 रुपये प्रति क्विंवटल हो गयी है।अनाजों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी रागी में 319 रुपये प्रति क्विंटल तो सबसे कम मक्का में केवल 10 रुपये प्रति क्विंटल ही बढ़ाये गए हैं।

    दलहन में अरहर के भाव में सबसे ज्यादा 450 रुपये प्रति क्विंवटल तो मूंग के भाव में केवल 12 रुपये का इजाफा किया गया है। अरहर की एमएसपी पिछले साल 8000 रुपये प्रति क्विंवटल घोषित की गयी थी। अब इसमें 450 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसकी नयी एमएसपी 8450 रुपये प्रति क्विंवटल हो गयी है।

    इसी तरह उड़द की एमएसपी में 400 रुपये बढ़ाये गए हैं। इससे इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 7800 रुपये प्रति क्विंवटल से तेज होकर 8200 रुपयेप्रति क्विंवटल हो गया है। लागत के अनुपात में देखें तो मूंग के किसान को उसकी लागत से 5438 रुपये प्रति क्विंवटल से 61 प्रतिशत अधिक का फायदा होगा। इसी तरह अरहर के किसान को 54 प्रतिशत का तो उड़द किसान को 51 प्रतिशत का फायदा होगा।