Tag: Financial Inclusion

  • MFIN Leadership Change: दिव्यज्योति पटनायक बने माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क के अध्यक्ष, ज्ञान मोहन उपाध्यक्ष निर्वाचित!

    MFIN Leadership Change: दिव्यज्योति पटनायक बने माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क के अध्यक्ष, ज्ञान मोहन उपाध्यक्ष निर्वाचित!

    MFIN Leadership Change: माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (एमएफआईएन) ने अन्नपूर्णा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिव्यज्योति पटनायक को अपने बोर्ड का नया अध्यक्ष और चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञान मोहन को उपाध्यक्ष चुना है।

    एमएफआईएन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख उद्योग संगठन है। इसके सदस्यों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), लघु वित्त बैंक तथा एनबीएफसी-माइक्रो फाइनेंस संस्थान (एमएफआई) शामिल हैं। संगठन को आरबीआई द्वारा स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) के रूप में मान्यता प्राप्त है।

    गुरुग्राम में 26 जून 2026 को आयोजित एमएफआईएन की 17वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन किया गया। इसके साथ ही संगठन के शासी बोर्ड में चार नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें नमरा फाइनेंस लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आलोक पटेल, क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गणेश नारायणन, एलएंडटी फाइनेंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुदीप्त रॉय तथा स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकटेश कृष्णन शामिल हैं।

    नवनियुक्त अध्यक्ष दिव्यज्योति पटनायक ने कहा कि माइक्रो फाइनेंस क्षेत्र के लिए यह एक सकारात्मक दौर है, जहां पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है और नकदी उपलब्धता भी बढ़ रही है। उन्होंने जिम्मेदार विस्तार, नियामकों और ऋणदाताओं के साथ विश्वास मजबूत करने तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वहीं, उपाध्यक्ष ज्ञान मोहन ने कहा कि माइक्रो फाइनेंस ने विशेष रूप से महिलाओं और वंचित समुदायों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराकर लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। उन्होंने भरोसा जताया कि क्षेत्र के विकास के अगले चरण में ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

  • Public Welfare Meeting: ठाणे मनपा ने पीएम-स्वनिधी स्कीम के तहत एक पब्लिक वेलफेयर मीटिंग रखी!

    Public Welfare Meeting: ठाणे मनपा ने पीएम-स्वनिधी स्कीम के तहत एक पब्लिक वेलफेयर मीटिंग रखी!

    Public Welfare Meeting: शहर में स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने और उन्हें मेनस्ट्रीम में लाने के लिए, ठाणे मनपा ने 19 जून, 2026 को सुबह 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक नरेंद्र बल्लाल ऑडिटोरियम, हेडक्वार्टर ठाणे मनपा, ठाणे में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि स्कीम के तहत एक पब्लिक वेलफेयर मीटिंग रखी है।

    प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधी) स्कीम के तहत, इस स्कीम का स्ट्रक्चर अलग-अलग स्टेज में 15 से 50 हज़ार रुपये का लोन और 7 परसेंट की इंटरेस्ट सब्सिडी है। एडमिनिस्ट्रेशन के इस फैसले से हज़ारों वेंडर्स को राहत मिलेगी जो गुज़ारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस लोकलयन मेले में, केंद्र सरकार की आठ स्कीमों का फ़ायदा क्रेडिट कार्ड की सुविधा और स्वनिधि स्कीम के तहत खुशहाली दी जाएगी।

    पीएम-स्वनिधी स्कीम की गाइडलाइंस के मुताबिक, पहले फेज़ में 15 हज़ार रुपये, दूसरे फेज़ में 25 हज़ार रुपये और तीसरे फेज़ में 50 हज़ार रुपये का लोन दिया जाएगा। साथ ही, इस लोन पर केंद्र सरकार की तरफ से 7 परसेंट तक की इंटरेस्ट सब्सिडी दी जा रही है और इसके अलावा, डिजिटल ट्रांज़ैक्शन को बढ़ावा दिया जाएगा, क्रेडिट कार्ड की सुविधा और फाइनेंशियल लिटरेसी ट्रेनिंग के साथ-साथ अलग-अलग सरकारी स्कीम से जुड़ने के मौके भी दिए जाएंगे।

    आसान शब्दों में कहें तो, अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर के इस बड़े हिस्से को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की यह एक तारीफ़ के काबिल कोशिश है। यह स्कीम स्ट्रीट वेंडर्स को प्राइवेट साहूकारों के चंगुल से आज़ाद कराने में मदद करेगी। आम स्ट्रीट वेंडर्स अक्सर अपने रोज़ाना के काम के लिए फाइनेंस या प्राइवेट साहूकारों से 10 से 20 परसेंट की एक्स्ट्रा रेट पर लोन लेते हैं। पीएम-स्वनिधी उन्हें 7 परसेंट इंटरेस्ट सब्सिडी के साथ ऑफिशियल लोन देगा।

    इससे उनका फाइनेंशियल शोषण रुकेगा और ज़मीनी इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा। स्ट्रीट वेंडर्स की संख्या और उनके काम का दायरा बढ़ेगा।सामाजिक विकास विभाग की उपायुक्त डॉ. मिताली संचेती ने ज़्यादा से ज़्यादा स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे व्यापारियों से लोक कल्याण मेला में हिस्सा लेने की अपील की है।

  • India Nepal UPI Service: नेपाल में भी शुरू हुई यूपीआई सेवा, भारत-नेपाल के बीच मोबाइल ऐप से होगा आसान भुगतान!

    India Nepal UPI Service: नेपाल में भी शुरू हुई यूपीआई सेवा, भारत-नेपाल के बीच मोबाइल ऐप से होगा आसान भुगतान!

    India Nepal UPI Service: भारत और नेपाल के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दोनों देशों ने मोबाइल ऐप आधारित सीमा-पार धन हस्तांतरण सेवा शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब दोनों देशों के नागरिक मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से आसानी से पैसे भेज और प्राप्त कर सकेंगे।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, 6 जून को आधिकारिक रूप से शुरू की गई इस सुविधा के तहत भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और नेपाल के नेशनल पेमेंट इंटरफेस (एनपीआई) को सीधे जोड़ा गया है। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षित, तेज और निर्बाध डिजिटल लेन-देन संभव हो गया है।

    यह तकनीकी एकीकरण नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (एनसीएचएल) के सहयोग से विकसित किया गया है।

    सरकार का कहना है कि यूपीआई-एनपीआई कनेक्टिविटी वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के साथ-साथ भारत और नेपाल के बीच आर्थिक एवं डिजिटल सहयोग को नई गति देगी। यह पहल सुलभ, सुरक्षित और कम लागत वाले सीमा-पार भुगतान के क्षेत्रीय लक्ष्य को भी आगे बढ़ाती है।

    नेपाल के जुड़ने के साथ अब भारतीय यूपीआई सेवा कुल नौ देशों—Singapore, United Arab Emirates, France, Mauritius, Nepal, Bhutan, Qatar, Sri Lanka और Cambodia में उपलब्ध हो गई है। इन देशों में भारतीय यात्री अपने परिचित यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।

  • Boosting Microfinance Sector: क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 की अवधि बढ़ी, बड़े कर्ज भी होंगे शामिल!

    Boosting Microfinance Sector: क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 की अवधि बढ़ी, बड़े कर्ज भी होंगे शामिल!

    Boosting Microfinance Sector: केंद्र सरकार ने माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र को मजबूती देने के लिए क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI 2.0) की अवधि बढ़ाने और इसके दायरे का विस्तार करने का फैसला किया है। अब यह योजना 31 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी, जिससे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFI) को अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को दिए जाने वाले ऋण पर सरकार गारंटी प्रदान करती है। योजना के लिए कुल 20,000 करोड़ रुपये के ऋण पर गारंटी का प्रावधान किया गया है। हालांकि यदि निर्धारित गारंटी सीमा समय से पहले पूरी हो जाती है, तो योजना उसी समय समाप्त मानी जाएगी।

    सरकार ने योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बड़े एनबीएफसी-एमएफआई के लिए ऋण सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये कर दी है। यह सुविधा संबंधित संस्थान की प्रबंधनाधीन कुल परिसंपत्तियों (AUM) के 20 प्रतिशत तक लागू होगी।

    सरकार का मानना है कि योजना की अवधि बढ़ाने और बड़े वित्तीय संस्थानों को शामिल करने से माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में ऋण प्रवाह बढ़ेगा तथा छोटे उधारकर्ताओं तक वित्तीय सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।

    मार्च 2026 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक लगभग 770 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। योजना के अनुसार, छोटे एनबीएफसी-एमएफआई के लिए डिफॉल्ट राशि का 80 प्रतिशत, मध्यम आकार की संस्थाओं के लिए 75 प्रतिशत और बड़े संस्थानों के लिए 70 प्रतिशत तक की गारंटी उपलब्ध कराई जाती है।

    योजना के तहत गारंटी शुल्क 0.50 प्रतिशत वार्षिक निर्धारित किया गया है। साथ ही माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए ब्याज दरों पर भी नियंत्रण रखा गया है, ताकि अंतिम लाभ छोटे उधारकर्ताओं तक पहुंच सके।

  • PM SVANidhi: छह साल में लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को मिला सहारा, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी योजना!

    PM SVANidhi: छह साल में लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को मिला सहारा, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी योजना!

    PM SVANidhi: प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना ने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। जून 2020 में शुरू की गई यह योजना आज देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन चुकी है। योजना की सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज्यादा ऋण वितरित किए गए हैं। इन ऋणों की कुल राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। योजना के तहत रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी अनौपचारिक और महंगे ब्याज वाले कर्जों पर निर्भरता कम हुई है।

    योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये तक के ऋण तीन चरणों में प्रदान किए जाते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले विक्रेताओं को ब्याज सब्सिडी, डिजिटल कैशबैक और यूपीआई आधारित रुपे क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

    संबंधित खबरें: India-Australia Defence Cooperation: रक्षा सामग्री और सेवाओं पर नए समझौते की तैयारी

    डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए योजना के तहत 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इन लाभार्थियों ने अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये है। ब्याज सब्सिडी और कैशबैक के माध्यम से लाभार्थियों को करीब 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ भी मिला है।

    स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्टों के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से ऋण मिला। वहीं लाभार्थियों की वार्षिक आय में औसतन 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। योजना के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, डिजिटल भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।

    पीएम स्वनिधि योजना आज केवल ऋण सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि लाखों छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।