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  • Forest and Government Land Encroachment: भिवंडी के ग्रामीण क्षेत्रों में वन और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण; कार्रवाई हुई शुरू!

    Forest and Government Land Encroachment: भिवंडी के ग्रामीण क्षेत्रों में वन और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण; कार्रवाई हुई शुरू!

    भिवंडी: भिवंडी तालुका में हो रहे नए विकास कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक और व्यावसायिक प्रगति हो रही है। हालांकि, एमएमआरडीए के तहत सुनियोजित विकास के बजाय, रसूखदार लोगों ने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया है और पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नालों और छोटे नालों को भी बंद करने का प्रयास किया है। इसके परिणामस्वरूप, मानसून के दौरान कई गांवों की सीमाओं और परिवहन मार्गों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे यातायात में भारी बाधा उत्पन्न होती है। (Forest and Government Land Encroachment)

    हैरानी की बात यह है कि जिलाधिकारी कार्यालय, जिला परिषद, पंचायत समिति का निर्माण एवं सिंचाई विभाग और राज्य का सार्वजनिक निर्माण विभाग इस ओर कोई ठोस कार्रवाई न करते हुए केवल मूकदर्शक बने हुए हैं। मुंबई-नासिक राजमार्ग के पास ग्रुप ग्राम पंचायत कुरुंद के अंतर्गत मौजे वाहुली गाँव में वन विभाग और चरागाह की भूमि पर हुए अतिक्रमण के कारण बारिश के पानी की निकासी रुक गई है। इस संबंध में संयुक्त वन प्रबंधन समिति और वाहुली गाँव विकास प्रतिष्ठान ने हाल ही में वन मंत्री गणेश नाईक से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।(Forest and Government Land Encroachment)

    यदि आगामी मानसून से पहले जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका खामियाजा वाहुली, कुरुंद और आसपास के ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। कुरुंद ग्रुप ग्राम पंचायत के वाहुली गाँव और आसपास के विस्तृत वन क्षेत्र की सुरक्षा वर्ष 2095 से ‘संयुक्त वन प्रबंधन समिति’ और ‘वाहुली गाँव विकास प्रतिष्ठान’ द्वारा की जा रही है। इसके लिए संस्था ने निजी खर्च पर सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए हैं। वर्ष 2007-08 से इस क्षेत्र में विकास कार्यों ने गति पकड़ी और धान के खेतों की जगह बड़े पैमाने पर गोदाम बनाने का व्यवसाय फलने-फूलने लगा।

    आरोप है कि इन गोदामों के निर्माण के दौरान उद्यमियों ने वन विभाग की भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया। स्थानीय नागरिकों ने जंगल और चरागाह क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण के खिलाफ कई शिकायतें कीं, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। व्यवसायियों ने नदी, नाले, कुएं और बोरवेल जैसे जल स्रोतों के सूखने के बाद उन जगहों पर भी कब्जा कर लिया है और यहाँ तक कि ग्रामीणों के पैदल रास्तों को भी नहीं छोड़ा।

    वन विभाग को बार-बार सबूत देने के बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इसके अलावा, अवैध खनिज ले जाने वाले वाहनों ने भी वन क्षेत्र के पेड़ों को काटकर अपना रास्ता बना लिया है। स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने कुरुंद वाहुली के गुरचरण सर्वे नंबर 71/6, 77/16, 65/8 और 20 में हुए अतिक्रमण के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं। अब स्थानीय लोग इस वन कटाई के खिलाफ एकजुट हो गए हैं और वन मंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।

    वन मंत्री के पास ज्ञापन पहुँचने के बाद इसे ठाणे और पडघा वन मंडल कार्यालय भेजा गया। इसके बाद पडघा के वन परिक्षेत्र अधिकारी रमेश रसाळ ने अतिक्रमण स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारी ने वन विभाग के संरक्षित क्षेत्र (सर्वे नंबर 52) के पास सुरक्षा दीवार बनाने वाले सर्वे नंबर 58/1 के मालिक राजेश देशपांडे को लिखित पत्र जारी किया है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि वे भिवंडी तालुका भूमि अभिलेख कार्यालय से तत्काल भूमि की सीमा निश्चित कराएं। इस प्रक्रिया के दौरान वन विभाग के सर्वेयर भी उपस्थित रहेंगे। प्रशासन की इस सक्रियता से क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है।