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  • Fake Income Certificate Case: फर्जी आय प्रमाण पत्र जमा करने पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज!

    Fake Income Certificate Case: फर्जी आय प्रमाण पत्र जमा करने पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज!

    Fake Income Certificate Case: ठाणे तहसीलदार कार्यालय के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर आय प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किए जाने का खुलासा होने पर हंगामा मच गया।तहसीलदार कार्यालय को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, घटना के सामने आने के बाद तहसील कार्यालय के ग्राम राजस्व अधिकारी, जीवन निवृत्ति कोरे (53) ने प्रवीण जोशी और शिरीष साठे के खिलाफ वागले एस्टेट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है। वागले एस्टेट पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

    ठाणे तहसील कार्यालय से नागरिकों को वार्षिक आय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया है। राजस्व अधिकारियों द्वारा आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद, संबंधित आवेदन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से तहसील कार्यालय को भेजे जाते हैं और विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद आय प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। 27 अप्रैल, 2026 को ‘आपले सरकार सेवा केंद्र’ के ड्राइवर योगेंद्र भोलाप्रसाद गुप्ता ने आय प्रमाण पत्र के सत्यापन के संबंध में तहसीलदार कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी।

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    जांच के दौरान पता चला कि रमेश एकनाथ शिंदे के नाम पर वर्ष 2025-26 के लिए 2 लाख 40 हजार रुपये का आय प्रमाण पत्र तैयार किया गया था। हालांकि, यह पाया गया कि संबंधित प्रमाण पत्र आधिकारिक प्रणाली में उपलब्ध नहीं था। रमेश शिंदे को इलाज के लिए हजूरी के महावीर जैन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी बेटी तेजस्वी शिंदे ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज शिरीष साठे को दिए थे क्योंकि ये उनके पिता के इलाज के लिए आवश्यक थे।

    पता चला है कि उसने आय प्रमाण पत्र जारी करने के बदले ऑनलाइन क्यूआर कोड के माध्यम से 1850 रुपये लिए थे। जांच में यह भी सामने आया कि यह राशि प्रवीण महादेव जोशी के बैंक खाते में जमा की गई थी। आगे की जांच में, संबंधित आय प्रमाण पत्र पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर पोर्टल पर कोई जानकारी प्रदर्शित नहीं हुई।

    यह भी पाया गया कि प्रमाण पत्र पर दिया गया आउटगोइंग नंबर तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि नायब तहसीलदार दत्तात्रेय बोरदे का नाम फर्जी था। इससे तहसील कार्यालय की ऑनलाइन प्रमाणन प्रणाली के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। इस संबंध में वागले एस्टेट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।