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  • Animal Healthcare Services: किसानों को 1962 हेल्पलाइन और WhatsApp चैटबॉट के ज़रिए उनके घर पर हेल्थ सर्विस मिलेंगी

    Animal Healthcare Services: किसानों को 1962 हेल्पलाइन और WhatsApp चैटबॉट के ज़रिए उनके घर पर हेल्थ सर्विस मिलेंगी

    Animal Healthcare Services: महाराष्ट्र राज्य के पशुपालकों और किसानों को तुरंत और तेज़ी से जानवरों की सर्विस देने के लिए एनिमल हस्बैंड्री कमिश्नरेट ने एक ज़रूरी कदम उठाया है। पशुपालन विभाग, भारत फाइनेंशियल इन्क्लूजन लिमिटेड और इंडसइंड बैंक के साथ मिलकर पिछले पांच सालों से राज्य में टोल-फ्री हेल्पलाइन सर्विस ‘1962’ को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

    इस हेल्पलाइन के तहत चलने वाली ‘मोबाइल वेटनरी यूनिट्स’ यानी मोबाइल वेटनरी गाड़ियों के ज़रिए ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में किसानों के घर पर फ्री हेल्थ सर्विस दी जा रही हैं। इस स्कीम का फ़ायदा उठाकर अब तक 8 लाख से ज़्यादा जानवरों का समय पर, आसानी से और भरोसे के साथ इलाज किया जा चुका है।

    इस पहल की बड़ी सफलता के बाद, प्रशासन ने अब जानवरों की सर्विस को और भी तेज़ और मॉडर्न बनाने के लिए ‘WhatsApp-बेस्ड चैटबॉट सर्विस’ शुरू की है। इस डिजिटल पहल का मुख्य मकसद पूरे महाराष्ट्र के किसानों को उनके घरों से रियल-टाइम (तुरंत) मेडिकल मदद देना और एडमिनिस्ट्रेशन से सीधे बातचीत करना आसान बनाना है।

    इस चैटबॉट को बहुत ही आसान तरीके से डिज़ाइन किया गया है और किसान अपने मोबाइल से +91 9063142299 पर WhatsApp मैसेज भेजकर या एडमिनिस्ट्रेशन के ऑफिशियल QR कोड को स्कैन करके इस सर्विस का फायदा उठा सकते हैं। इस सुविधा का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। बताए गए WhatsApp नंबर पर सिर्फ “Hi” का मैसेज भेजकर, किसानों को जानवरों की बीमारियों, इलाज और वैक्सीनेशन के बारे में डिटेल में जानकारी मिलती है।

    साथ ही, इसके ज़रिए पशुपालन से जुड़ी अलग-अलग सरकारी योजनाओं की जानकारी भी मिल सकती है। इस चैटबॉट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान सीधे जानवरों के डॉक्टरों से चैट, ऑडियो कॉल या वीडियो कॉल (टेलीकंसल्टेशन) के ज़रिए जुड़ सकते हैं और दूर से सलाह ले सकते हैं। इसके अलावा, यह अस्पतालों और जानवरों की सेवाओं और अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) के लिए गाइड भी देता है।

    इस नए डिजिटल सिस्टम को शुरू से ही किसानों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, और अक्टूबर 2025 से मई 2026 के बीच, 615 किसानों ने इस चैटबॉट का सक्सेसफुली इस्तेमाल किया है, जबकि 201 पशुपालकों ने वीडियो कॉल के ज़रिए सीधे डॉक्टरों से सलाह ली है। इस पहल से किसानों का आने-जाने का समय और खर्च बचेगा, और इमरजेंसी में जानवरों को तुरंत इलाज देकर उनकी प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

    पशुपालन विभाग पूरे महाराष्ट्र में टेक्नोलॉजी-बेस्ड और एफिशिएंट वेटेरिनरी सिस्टम बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। पशुपालन विभाग की कमिश्नर डॉ. किरण पाटिल ने कहा कि विभाग ने पशुपालकों को तुरंत मेडिकल सर्विस देने को टॉप प्रायोरिटी दी है और ज़्यादा से ज़्यादा किसानों से 1962 कॉल सेंटर सर्विस और नए WhatsApp चैटबॉट का फायदा उठाने की अपील की है।

  • HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिला का प्रसव कराने से इंकार करने के मामले में जिला महिला अस्पताल हमीरपुर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मौदहा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ को मामले की जांच सौंपी गई है।

    जांच अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने मंगलवार को बताया कि महोबा जिले के खन्ना क्षेत्र निवासी दंपती एचआईवी पॉजिटिव हैं। महिला के पति ने प्रसव के लिए पत्नी को मौदहा सीएचसी में भर्ती कराया था, जहां एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिलने पर स्टाफ ने प्रसव कराने से मना कर दिया और जिला महिला अस्पताल हमीरपुर रेफर कर दिया।

    उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल पहुंचने पर भी रेफरल कार्ड देखते ही महिला को तत्काल कानपुर रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एचआईवी पॉजिटिव प्रसूताओं का हर हाल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराया जाए। इसके लिए विशेष किट और चिकित्सकीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है।

    बताया गया कि 21 मई को महिला ने कानपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव कराया, जिसमें परिवार का लगभग 40 हजार रुपये खर्च हो गया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हमीरपुर पहुंचकर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल से शिकायत की। जिलाधिकारी ने मामले की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गीतम सिंह को सौंपी, जिन्होंने आगे जांच डिप्टी सीएमओ को दे दी।

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    जांच के दौरान मौदहा सीएचसी अधीक्षक डॉ. रजत तिवारी ने कहा कि स्टाफ ने महिला को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया था और उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. के.एस. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में पूर्व में एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं तथा इसके लिए अलग ऑपरेशन थिएटर और विशेष किट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि महिला को रेफर किए जाने की जानकारी की जांच कराई जाएगी।

    डॉ. मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल का अधिकांश स्टाफ इस प्रकार के मामलों में प्रशिक्षित नहीं है। वहीं जांच अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने दावा किया कि एचआईवी संक्रमित महिलाओं के प्रसव संबंधी मामलों में स्वास्थ्य केंद्रों पर लगभग 90 प्रतिशत स्टाफ अप्रशिक्षित है, जबकि सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में एचआईवी जांच की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई प्रसूताओं की जांच किए बिना ही प्रसव करा दिया जाता है। साथ ही महिला अस्पताल की काउंसलर को पुरुष अस्पताल से संबद्ध किए जाने के कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों की सूचना आईसीटीसी को दी जानी चाहिए, लेकिन कई बार ऐसा नहीं किया जाता।