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  • Export Duties on Petrol-Diesel: मॉरीशस-मालदीव को भी पेट्रोल-डीजल पर निर्यात शुल्क से छूट!

    Export Duties on Petrol-Diesel: मॉरीशस-मालदीव को भी पेट्रोल-डीजल पर निर्यात शुल्क से छूट!

    Export Duties on Petrol-Diesel: सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर अगले पखवाड़े के लिए निर्यात पर शुल्क की नयी दरें मंगलवार को घाेषित कीं तथा इसके साथ ही सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से मॉरीशस और मालदीव को निर्यात किये जाने वाले इन ईंधन को निर्यात शुल्क से मुक्त करने की घोषणा की।

    अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा केवल नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किये जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात को ही शुल्क से छूट मिली थी। सरकार ने घरेलू उपभोग के लिए आपूर्ति किये जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू वर्तमान उत्पाद शुल्क की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया है।

    केंद्र सरकार की ओर से 01 जुलाई बुधवार से शुरू होने वाले अगले पखवाड़े के लिए इन उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की जो नयी दरों की अधिसूचना जारी की गयी है, उसके अंतर्गत पेट्रोल के निर्यात पर प्रति लीटर चार रुपये शुल्क लगाया जायेगा जो पहले 1.5 रुपये था। नयी दर में विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) चार रुपये और सड़क एवं अवसंरचना उपकर (आरईसी) शून्य रहेगा।

    इसके विपरीत डीजल के निर्यात पर शुल्क 14 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.50 रुपये कर दिया गया है जो एसएईडी के रूप में होगा तथा इसमें आरआईसी शून्य रहेगा। इसी तरह एटीएफ के निर्यात पर प्रति लीटर 7.50 रुपये का एसएईडी लगाया जायेगा जो अभी 12.50 रुपये है।

    पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच देश में सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से गत 27 मार्च को पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर एसएईडी तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर (आरआईसी) लगाया था। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त बनाये रखना है।

    इन शुल्कों की दरों की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है। इससे पहले इनकी समीक्षा 16 जून 2026 से प्रभावी हुई थी। शुल्क की नयी दरें पिछले पुनरीक्षण के बाद की अवधि के दौरान कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के औसत अंतरराष्ट्रीय मूल्यों के आधार पर निर्धारित की जाती हैं।

    इन उत्पादों पर निर्यात शुल्क लागू करते समय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किये जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात को इस शुल्क से छूट दी गयी थी।

    अब इस छूट का विस्तार करते हुए मॉरीशस और मालदीव को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। इन देशों को सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा इन उत्पादों के निर्यात पर अब एसएईडी और आरईसी नहीं लगाया जायेगा।

  • Kotak Mahindra Bank: कोटक महिंद्रा बैंक ने शुरू की नये एमडी की तलाश, पद छोड़ेंगे अशोक वसवानी!

    Kotak Mahindra Bank: कोटक महिंद्रा बैंक ने शुरू की नये एमडी की तलाश, पद छोड़ेंगे अशोक वसवानी!

    Kotak Mahindra Bank: निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैंक ने नये प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तलाश शुरू कर दी है। मौजूदा एमडी एवं सीईओ अशोक वसवानी ने बैंक के निदेशकमंडल को बताया है कि वह 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहे अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा इस पद पर नियुक्ति से इच्छुक नहीं हैं।

    इसके बाद निदेशक मंडल की शनिवार को हुई बैठक में उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी। कोटक महिंद्रा बैंक ने आज शेयर बाजारों को बताया कि नये एमडी एवं सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया नियामक समय-सीमा में पूरी कर ली जायेगी। कोटक महिंद्रा बैंक की स्थापना साल 2003 में हुई थी।

    इससे पहले यह कोटक महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड (केएमएफएल) के नाम से एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में काम कर रहा था। केएमएफएल देश की पहली एनबीएफसी थी जिसे एक वाणिज्यिक बैंक के रूप में सूचीबद्ध किया गया। बैंक का राजस्व 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में 14,174.77 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 4,026.55 करोड़ रुपये रहा था।

  • Lloyds Engineering Acquisition: लॉयड्स इंजीनियरिंग ने स्टील इन्फ्रा सॉल्यूशंस में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदी

    Lloyds Engineering Acquisition: लॉयड्स इंजीनियरिंग ने स्टील इन्फ्रा सॉल्यूशंस में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदी

    Lloyds Engineering Acquisition: इंजीनियरिंग और ईपीसी क्षेत्र की कंपनी लॉयड्स इंजीनियरिंग वर्क्स लिमिटेड ने स्टील इन्फ्रा सॉल्यूशंस कंपनी लिमिटेड में नियंत्रक हिस्सेदारी के अधिग्रहण की घोषणा की है। यह सौदा 1,220 करोड़ रुपये के इक्विटी मूल्यांकन पर किया गया है।

    वर्ष 2017 में स्थापित स्टील इन्फ्रा सॉल्यूशंस संरचनात्मक इस्पात समाधानों के डिजाइन, इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन, आपूर्ति और स्थापना के क्षेत्र में कार्यरत है। कंपनी ने अब तक देश के 22 राज्यों में 187 परियोजनाएं पूरी की हैं। इनमें दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल-1, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), द्वारका कन्वेंशन सेंटर, राउरकेला अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम और बेंगलुरु इंटरनेशनल टेक पार्क जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

    कंपनी के पास देशभर में छह फैब्रिकेशन इकाइयां और चार इंजीनियरिंग एवं डिजाइन केंद्र हैं। इसकी वार्षिक फैब्रिकेशन क्षमता लगभग एक लाख टन है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 817 करोड़ रुपये का परिचालन राजस्व, 92 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ और 44 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। वर्तमान में इसके पास करीब 1,134 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है।

    लॉयड्स इंजीनियरिंग वर्क्स प्रिसीजन हेवी स्ट्रक्चरल फैब्रिकेशन, औद्योगिक उपकरण, रक्षा, विद्युत इंजीनियरिंग और ईपीसी क्षेत्रों में सक्रिय है। कंपनी का वार्षिक राजस्व 3,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि इसकी ऑर्डर बुक 8,000 करोड़ रुपये और बाजार पूंजीकरण लगभग 12,800 करोड़ रुपये है।

    यह अधिग्रहण नकद और इक्विटी दोनों माध्यमों से किया जाएगा। सौदे के बाद लॉयड्स इंजीनियरिंग की योजना स्टील इन्फ्रा सॉल्यूशंस की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर दो लाख टन प्रतिवर्ष करने की है, जिससे कंपनी देश की सबसे बड़ी संरचनात्मक इस्पात फैब्रिकेशन कंपनियों में शामिल हो सकेगी।

  • PPI Launch India: 15 जून से लागू होगा नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, महंगाई मापने का तरीका बदलेगा!

    PPI Launch India: 15 जून से लागू होगा नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, महंगाई मापने का तरीका बदलेगा!

    PPI Launch India: भारत सरकार 15 जून 2026 से महंगाई मापने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) लागू करेगी और साथ ही संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (WPI) श्रृंखला भी जारी करेगी। यह बदलाव देश की आर्थिक गतिविधियों और मूल्य परिवर्तनों को अधिक सटीक तरीके से मापने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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    नया PPI केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, रेलवे और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा। इससे उत्पादकों पर पड़ने वाले लागत दबाव और मूल्य परिवर्तनों का व्यापक आकलन संभव होगा।

    सरकार अगले कुछ वर्षों में WPI से PPI की ओर धीरे-धीरे संक्रमण की योजना पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की महंगाई मापने की प्रणाली वैश्विक मानकों के अधिक अनुरूप हो जाएगी और नीति निर्माण में मदद मिलेगी। संशोधित WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा, जबकि नई प्रणाली में वस्तुओं और सेवाओं का अधिक व्यापक दायरा शामिल होगा।