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  • Customs duty exemption: महत्वपूर्ण पेट्रो-रसायन उत्पादों पर सीमा शुल्क में छूट 15 जुलाई तक बढ़ी!

    Customs duty exemption: महत्वपूर्ण पेट्रो-रसायन उत्पादों पर सीमा शुल्क में छूट 15 जुलाई तक बढ़ी!

    Customs duty exemption: पश्चिम एशिया के संकट को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रो रसायन उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की अवधि 15 दिन बढ़ा दी है। सरकार ने इस साल 01 अप्रैल को यह छूट देने की घोषणा की थी। इसकी अवधि तीन महीने की थी जो 30 जून को समाप्त हो रही थी। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा मंगलवार को जारी अधिसूचना के जरिये पूर्व की अधिसूचना में संशोधन कर छूट की अवधि आगे बढ़ायी गयी है।

    इस छूट से पेट्रो-रसायन कच्चे माल और मध्यवर्ती पदार्थों पर निर्भर क्षेत्रों, जैसे प्लास्टिक, पैकेजिंग, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, वाहनों के कल-पूर्जे और अन्य विनिर्माण उद्योगों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के लिए अंतिम उत्पादों की लागत में कमी आने की उम्मीद है।

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछली अधिसूचना के जरिये 30 जून तक महत्वपूर्ण पेट्रो-रसायन उत्पादों के आयात पर पूरी तरह से सीमा शुल्क में छूट देने का निर्णय लिया था।

    वित्त मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह छूट घरेलू बाजार में पेट्रो-रसायनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदान की गयी थी क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया था। मंत्रालय ने कहा है कि चूंकि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुचारु और बिना किसी व्यवधान के संक्रमण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छूट की अवधि 15 दिन के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

  • 10 Women Entrepreneurs Honoured: डीपी वर्ल्ड और नीति आयोग ने ‘वी राइज’ कार्यक्रम में 10 महिला उद्यमियों को किया सम्मानित!

    10 Women Entrepreneurs Honoured: डीपी वर्ल्ड और नीति आयोग ने ‘वी राइज’ कार्यक्रम में 10 महिला उद्यमियों को किया सम्मानित!

    10 Women Entrepreneurs Honoured: डीपी वर्ल्ड और नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) ने ‘वी राइज’ कार्यक्रम के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली 10 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। सम्मानित उद्यमियों ने खाद्य एवं पेय पदार्थ, हस्तशिल्प, उपभोक्ता उत्पाद, ब्यूटी एवं वेलनेस सहित कई क्षेत्रों में नवाचार और व्यवसायिक सफलता का परिचय दिया है।

    कार्यक्रम के लिए देशभर से 600 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 10 महिला उद्यमियों का चयन किया गया। यह पहल महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों की बढ़ती भागीदारी और भारत की आर्थिक प्रगति में उनके योगदान को रेखांकित करती है।

    समारोह में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने कहा कि किसी भी सफलता के पीछे तैयारी, दृढ़ता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का साहस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक एवं डब्ल्यूईपी की मिशन निदेशक एना रॉय ने कहा कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और ऐसे समय में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना अधिक समावेशी एवं सशक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए आवश्यक है।

    डीपी वर्ल्ड इंडिया के प्रबंध निदेशक हेमंत कुमार रुइया ने कहा कि महिला उद्यमी नवाचार को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और देश की आर्थिक प्रगति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय भारत के विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

  • Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देशभर में निवेश-तैयार एवं विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मार्च में मंजूर ‘भव्य’ योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए कर दिये हैं और चार महीने में 50 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव को मंजूरी देने का लक्ष्य है।

    इस योजना के तहत पूरे देश में 100 औद्योगिक पार्कों की स्थापना का लक्ष्य है जो 100 एकड़ से 1000 एकड़ तक के हो सकते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में हम 25 एकड़ के पार्क को भी मंजूरी दे सकते हैं। दिशानिर्देशों के तहत केंद्र सरकार भव्य के तहत राज्यों को प्रति पार्क प्रति एकड़ जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए एक करोड़ रुपये या जमीन की प्रति एकड़ बाजार दर में से जो भी कम होगा, उसके बाराबर सहायता देगी।

    मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनके लिए लगभग 33,660 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। पहले चरण में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन प्रक्रिया के माध्यम से 50 तक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क के लिए राज्यों को विशेष प्रयोजन इकाई का गठन करना होगा जो इन औद्योगिक पट्टियों में बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन करेगी।

    गोयल ने कहा, ‘सरकार इस योजना को लेकर कितनी सक्रियता से काम कर रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी गत 18 मार्च को मिली थी और इसे अप्रैल में अधिसूचित कर दिया गया था। अब इसके दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं तथा चार महीने में 50 औद्योगिक पार्क मंजूर करने की तैयारी है।’

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    गोयल ने कहा कि इस चार महीने को भी दो भागों में बांट दिया गया है और पहले दो महीनों में 20 पार्क मंजूर कर दिये जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारें इस योजना के लिए प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत कर सकती है।

    उन्होंने बताया कि भव्य योजना का उद्देश्य “मेक इन इंडिया”, “पीएम गति शक्ति” तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने की सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप एकीकृत औद्योगिक अवसंरचना का विकास कर भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

    भव्य के लिए जारी दिशा-निर्देशों में पार्कों की पात्रता के मानदंड, परियोजना की चयन प्रक्रिया, वित्तपोषण संरचना, प्रशासनिक ढांचा, निगरानी प्रणाली तथा कार्यान्वयन व्यवस्था सहित विस्तृत रूपरेखा प्रदान की गई है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य “निवेश-तैयार” औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिसमें प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिता सेवाएं, श्रमिक सहायता अवसंरचना, डिजिटल शासन प्रणाली तथा सतत विकास संबंधी सुविधाएं शामिल होंगी।

    दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रीनफील्ड तथा पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्कों दोनों का विकास किया जा सकेगा। गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम 100 एकड़ भूमि तथा पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत 1000 एकड़ तक के बड़े औद्योगिक पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।

    चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया के तहत प्रस्तावों का मूल्यांकन मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्थल की उपयुक्तता, अवसंरचना की गुणवत्ता, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती, नीतिगत सुविधा, डिजिटल शासन की तैयारी तथा दीर्घकालिक स्थिरता जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर किया जाएगा।

    दिशा-निर्देशों में भूमिगत उपयोगिता प्रणाली, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएं, डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली, कौशल विकास सुविधाएं तथा एकीकृत साझा अवसंरचना जैसे घटकों की गुणवत्ता के मूल्यांकन का भी प्रावधान किया गया है।

    योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित एसपीवी के माध्यम से किया जाएगा। ये एसपीवी परियोजना की योजना, विकास, संचालन, प्रबंधन, निवेशक सुविधा तथा दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगी।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) को योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) नियुक्त किया गया है। दिशा-निर्देशों में निजी डेवलपर्स की भागीदारी हेतु परियोजना-विशिष्ट एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्क विकास का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा, पारदर्शिता सुरक्षा उपाय और जवाबदेही तंत्र निर्धारित किए गए हैं।

    योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों में जीआईएस-आधारित निगरानी प्रणाली, समय-समय पर प्रगति रिपोर्टिंग, ऑडिट व्यवस्था तथा डीपीआईआईटी सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति द्वारा निगरानी का प्रावधान शामिल किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों में लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उपयोगिता अवसंरचना तथा औद्योगिक विकास से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय का भी प्रावधान किया गया है।

  • Berger Paints FY26 Results: महंगाई के असर से मांग कमजोर, कंपनी का मुनाफा 4.5% घटा!

    Berger Paints FY26 Results: महंगाई के असर से मांग कमजोर, कंपनी का मुनाफा 4.5% घटा!

    Berger Paints ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के नतीजों में मुनाफे में गिरावट दर्ज की है। कंपनी के अनुसार इस अवधि में उसका शुद्ध लाभ करीब 4.5% घट गया। साथ ही कंपनी ने बढ़ती महंगाई और कमजोर उपभोक्ता मांग को लेकर चिंता भी जताई है।

    कंपनी का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता पर दबाव का असर पेंट उद्योग पर दिखाई दे रहा है। खासतौर पर शहरी और ग्रामीण बाजारों में मांग पहले की तुलना में कुछ धीमी पड़ी है।

    Berger Paints के अधिकारियों के मुताबिक कच्चे माल और परिवहन लागत में उतार-चढ़ाव से भी कंपनी के मार्जिन पर असर पड़ा है। हालांकि कंपनी ने बिक्री बढ़ाने और बाजार हिस्सेदारी मजबूत बनाए रखने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाने की बात कही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई बढ़ने से लोग गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं, जिसका असर घरों की पेंटिंग और रेनोवेशन जैसे सेक्टर पर पड़ रहा है। इससे पेंट कंपनियों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

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    कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में यदि महंगाई नियंत्रित नहीं हुई तो उपभोक्ता मांग और कमजोर हो सकती है। हालांकि त्योहारों और रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार पेंट उद्योग फिलहाल लागत नियंत्रण और प्रतिस्पर्धा दोनों चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में कंपनियां नए उत्पाद और ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।

    नतीजों के बाद निवेशकों की नजर अब कंपनी की भविष्य की रणनीति और बाजार में मांग की स्थिति पर बनी हुई है। आने वाले तिमाहियों में महंगाई और कच्चे माल की कीमतें कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

  • Retail Inflation April 2026: महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंची, खाद्य वस्तुओं के दामों का असर!

    Retail Inflation April 2026: महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंची, खाद्य वस्तुओं के दामों का असर!

    Retail Inflation April 2026: देश में रिटेल महंगाई दर अप्रैल महीने में बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में इजाफे के कारण देखी गई। पिछले कुछ महीनों से राहत के संकेत मिलने के बाद अब फिर से महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार सब्जियां, फल, दूध, अनाज और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर असर पड़ा है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी होने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, सप्लाई चेन की दिक्कतें और परिवहन लागत में बढ़ोतरी भी खाद्य महंगाई बढ़ने के पीछे अहम वजह हैं। कई राज्यों में गर्मी और खराब मौसम के कारण सब्जियों और फलों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां भी भारत की महंगाई पर असर डाल रही हैं। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

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    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि दोनों देशों के बीच हालात और बिगड़ते हैं, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित होंगी और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बनेगा।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो आने वाले महीनों में परिवहन, बिजली और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर उद्योगों से लेकर आम परिवारों तक देखने को मिल सकता है।

    हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा रिटेल महंगाई अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तय सीमा के भीतर बनी हुई है। लेकिन लगातार बढ़ती खाद्य कीमतें और वैश्विक तनाव आने वाले समय में केंद्रीय बैंक की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

    सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में मानसून, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हालात यह तय करेंगे कि महंगाई दर में और बढ़ोतरी होगी या स्थिति नियंत्रण में रहेगी।