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  • PPI Launch India: 15 जून से लागू होगा नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, महंगाई मापने का तरीका बदलेगा!

    PPI Launch India: 15 जून से लागू होगा नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, महंगाई मापने का तरीका बदलेगा!

    PPI Launch India: भारत सरकार 15 जून 2026 से महंगाई मापने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) लागू करेगी और साथ ही संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (WPI) श्रृंखला भी जारी करेगी। यह बदलाव देश की आर्थिक गतिविधियों और मूल्य परिवर्तनों को अधिक सटीक तरीके से मापने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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    नया PPI केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, रेलवे और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा। इससे उत्पादकों पर पड़ने वाले लागत दबाव और मूल्य परिवर्तनों का व्यापक आकलन संभव होगा।

    सरकार अगले कुछ वर्षों में WPI से PPI की ओर धीरे-धीरे संक्रमण की योजना पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की महंगाई मापने की प्रणाली वैश्विक मानकों के अधिक अनुरूप हो जाएगी और नीति निर्माण में मदद मिलेगी। संशोधित WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा, जबकि नई प्रणाली में वस्तुओं और सेवाओं का अधिक व्यापक दायरा शामिल होगा।

  • Weak Monsoon Alert: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका

    Weak Monsoon Alert: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका

    Weak Monsoon Alert: भारत में वर्ष 2026 के दौरान सामान्य से कम मानसून रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बारिश औसत से कम हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    मौसम विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य स्तर से नीचे रह सकती है। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है।

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    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में उल्लेखनीय कमी आती है तो धान, दाल, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

    कमजोर मानसून का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी की उपलब्धता, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है। सरकार और कृषि विशेषज्ञ किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन तथा जल संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहता है तो आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है, जिससे महंगाई नियंत्रण की चुनौती और कठिन हो सकती है। ऐसे में सरकार की नजर मानसून की प्रगति और कृषि उत्पादन पर बनी हुई है।